
हैदराबाद। कांग्रेस की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) की तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष यडवली वेंकटस्वामी ने पार्टी के भीतर जातिगत भेदभाव और अपने खिलाफ कथित साजिशों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। वेंकटस्वामी ने दलित, पिछड़े और कमजोर वर्गों के नेताओं को संबोधित एक पत्र में दावा किया है कि दलित होने के कारण उन्हें लगातार निशाना बनाया गया और NSUI में उनके नेतृत्व को कमजोर करने की कोशिश की गई।
अपने पत्र में वेंकटस्वामी ने अपना परिचय देते हुए कहा है कि वह हैदराबाद के जुबली हिल्स विधानसभा क्षेत्र के रहमत नगर बस्ती से आने वाले एक गरीब दलित (माला) परिवार के पहली पीढ़ी के छात्र नेता हैं। उनका दावा है कि संयुक्त आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के इतिहास में पहली बार किसी दलित को NSUI के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर नेतृत्व करने का अवसर मिला।
उन्होंने यह भी दावा किया कि देशभर में NSUI के प्रदेश अध्यक्षों में वह एकमात्र दलित प्रदेश अध्यक्ष हैं। वेंकटस्वामी के मुताबिक, NSUI के साथ 14 वर्षों की उनकी सेवा और राजनीतिक-संगठनात्मक कार्य को देखते हुए AICC अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क और TPCC अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने उन्हें यह जिम्मेदारी दी।
वेंकटस्वामी ने पत्र में आरोप लगाया कि पद संभालने के पहले दिन से ही उन्हें दलित होने के कारण निशाना बनाया गया। उन्होंने किसी का नाम सीधे पत्र में नहीं लिखा है, लेकिन माना जा रहा है कि आरोपों में तेलंगाना NSUI के पूर्व प्रदेश नेता और वर्तमान कांग्रेस MLC बामूरी/बालमूरी वेंकट की ओर संकेत किया है।
वेंकटस्वामी का दावा है कि इस नेता ने उनकी कमेटी और उनके नेतृत्व के साथ लगातार भेदभाव किया। उनका आरोप है कि पिछले करीब दो वर्षों में उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से कमजोर करने के प्रयास किए गए तथा कई तरह की कथित साजिशों और अड़चनों का सामना करना पड़ा।
बालमूरी वेंकट पूर्व में तेलंगाना NSUI के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और 2024 में कांग्रेस ने उन्हें विधान परिषद के लिए उम्मीदवार बनाया था। वेंकटस्वामी ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि उनके खिलाफ कथित अभियान की शुरुआत गांधी भवन में उनके पद से हटाने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन से हुई।
उनका दावा है कि कुछ ‘अग्रकुल’ छात्र नेताओं को उनके खिलाफ उकसाया गया और कुछ दलित नेताओं को भी उनके विरोध में खड़ा किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ मीडिया और सोशल मीडिया में कथित तौर पर नकारात्मक खबरें और सामग्री प्रचारित कराई गई।उन्होंने लिखा कि यह सब केवल उन्हें पद से हटाने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे NSUI में एक खास समूह का वर्चस्व बनाए रखने की कोशिश थी।
वेंकटस्वामी के पत्र का एक महत्वपूर्ण आरोप संगठनात्मक अधिकारों को लेकर है। उनका कहना है कि उन्हें राज्य और जिला स्तर पर NSUI की कमेटियां गठित करने से रोका गया।
उनके अनुसार, उन्होंने कई बार कमेटियों की सूची तैयार कर प्रस्तुत की, लेकिन उन्हें मंजूरी नहीं मिली और मामला लगातार टलता रहा।
वेंकटस्वामी का दावा है कि जब उन्होंने आखिरकार आगे बढ़कर कमेटी का गठन किया तो उसी को आधार बनाकर अब उनकी पूरी कार्यकाल अवधि समाप्त होने से पहले कमेटी को भंग करने और उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने की कोशिश की जा रही है।
पत्र में वेंकटस्वामी ने अपने व्यक्तिगत विवाद को व्यापक जातिगत सवाल से जोड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कोई दलित व्यक्ति राजनीति, शिक्षा, कारोबार या किसी अन्य क्षेत्र में ऊंची जातियों के लोगों के बराबर आगे बढ़ता है तो उसके खिलाफ ईर्ष्या और द्वेष के कारण उसे दबाने की कोशिश की जाती है।
उन्होंने लिखा कि उन्हें अब समझ में आ रहा है कि रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे लोगों को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। वेंकटस्वामी का कहना है कि आज एक दलित NSUI प्रदेश अध्यक्ष को ‘अक्षम’ साबित करके कमजोर करना केवल एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं है, बल्कि इससे आने वाली पीढ़ियों में दलित नेताओं के राजनीतिक अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
वेंकटस्वामी ने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि वह इन आरोपों को केवल अपना पद बचाने के लिए सामने नहीं ला रहे हैं।
उनका कहना है कि कांग्रेस ने दलितों को कई राजनीतिक अवसर दिए हैं, लेकिन पार्टी के भीतर मौजूद कुछ लोगों के कारण दलित नेताओं को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि आज भी अलग-अलग क्षेत्रों में दलित युवाओं को इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने अपने संघर्ष को बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के उस विचार से जोड़ा कि अधिकार किसी से मांगने मात्र से नहीं मिलते, बल्कि उन्हें संघर्ष के माध्यम से हासिल करना पड़ता है। वेंकटस्वामी ने अपने पत्र में कहा है कि वह अपनी व्यक्तिगत परेशानी को हजारों पहली पीढ़ी के NSUI नेताओं के राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं।
उनके अनुसार, यदि एक दलित प्रदेश अध्यक्ष को उसके पूरे कार्यकाल के दौरान स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर नहीं मिलता और उसे जातिगत कारणों से कमजोर किया जाता है, तो इसका असर उन दलित युवाओं पर भी पड़ेगा जो छात्र राजनीति के जरिए मुख्यधारा की राजनीति में आने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने दलित, पिछड़े और कमजोर वर्गों के नेताओं से इस मामले को गंभीरता से देखने की अपील की है।
वेंकटस्वामी के आरोपों का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि आरोप किसी विपक्षी दल के नेता ने नहीं, बल्कि कांग्रेस से जुड़े मौजूदा NSUI प्रदेश अध्यक्ष ने अपनी ही संगठनात्मक व्यवस्था को लेकर लगाए हैं।
कांग्रेस लंबे समय से सामाजिक न्याय, जातिगत जनगणना और रोहित वेमुला जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाती रही है। ऐसे में कांग्रेस के छात्र संगठन के एक मौजूदा दलित प्रदेश अध्यक्ष द्वारा संगठन के भीतर जातिगत भेदभाव के आरोप लगाया जाना पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण आंतरिक सवाल खड़ा करता है।
हालांकि, वेंकटस्वामी के आरोप उनके पक्ष का विवरण हैं और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस पत्र से नहीं होती। बालमूरी वेंकट की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है। उनका पक्ष मिलने पर रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा।
वेंकटस्वामी ने पत्र के अंत में उन सभी नेताओं और समर्थकों का आभार जताया जिन्होंने उनके राजनीतिक सफर में सहयोग किया और कहा कि वह बाबा साहेब आंबेडकर की विचारधारा से प्रेरणा लेकर आगे भी संघर्ष जारी रखेंगे।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।
यहां सब्सक्राइब करें