
नई दिल्ली- दिल्ली के मोती नगर स्थित एक कैफे में काम करने वाली अनुसूचित जाति की महिला ने एक सेवारत महिला पुलिस कांस्टेबल और कैफे संचालक के खिलाफ वेतन रोकने, जातिगत भेदभाव, प्रताड़ना और धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता शीतल सिंह ने 13 सितंबर को मोती नगर थाने के SHO को दी अपनी लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि करीब एक महीने काम करने के बाद उसका ₹22,000 का वेतन रोक लिया गया और वेतन मांगने पर उसके खिलाफ चोरी की शिकायत दर्ज कराई गई।
शिकायत के अनुसार, शीतल सिंह को मोती नगर स्थित 'विधि कैफे' में रसोइया (कुक) के रूप में ₹22,000 प्रतिमाह के वेतन पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने शिकायत में कहा है कि वह 14 अगस्त से 8 सितंबर तक कैफे में काम करती रहीं। बकाया वेतन मांगने के लिए उसने 9 सितंबर को कैफे संचालक विजय सिंह को लीगल नोटिस भेजा जिसके बाद विजय सिंह ने अपने 11 सितंबर के जवाब में उनके पूर्णकालिक काम करने और ₹22,000 मासिक वेतन की बात स्वीकार की है।
शीतल ने द मूकनायक को बताया कि वह बहुत ज़्यादा डर के साये में जी रही हैं। "मैंने 181 महिला हेल्पलाइन और स्थानीय पुलिस से संपर्क किया, लेकिन कोई FIR दर्ज नहीं की जा रही है। इसकी वजह यह है कि एक आरोपी दिव्या, दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल हैं और मामले को दबाने के लिए अपनी वर्दी का इस्तेमाल कर रही हैं।" शीतल कहती हैं, "काम छोड़ने के बाद मेरे ₹22,000 का वेतन न देना पड़े, इसलिए एम्प्लॉयर ने "तेल के पैकेट, दाल और कॉफ़ी पाउच" की चोरी की झूठी कहानी गढ़ी, ताकि एक अकेली महिला कर्मचारी को डराया-धमकाया जा सके और चुप कराया जा सके।"
कैफे की रसोई में ग्राहकों के लिए इस्तेमाल होने वाले पाम ऑयल, बासी या फफूंद लगी ब्रेड और एक्सपायरी सामान को लेकर शीतल ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे ग्राहकों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक बताते हुए इसका विरोध किया, जिसके बाद कैफे संचालक ने उसे धमकाते हुए कहा "तू अपना काम कर, हमें पैसे कमाने हैं, इन चीजाें से ही मार्जिन और बचत होती है।"
शीतल का आरोप है कि कुछ दिन बाद कैफे संचालक ने गूगल रिव्यू डालने के बहाने उनका निजी मोबाइल फोन लिया। मोती नगर थाने में दी शिकायत में कहा गया है कि फोन में उनका नाम और पृष्ठभूमि देखने के बाद उनसे पूछा गया कि क्या वह SC समुदाय से हैं। इसके बाद, उनके साथ व्यवहार बदल गया और हेल्परों को हटाकर कैफे की सफाई, झाड़ू-पोछा और देर रात तक जूठे बर्तन साफ करने का अतिरिक्त काम उन पर डाल दिया गया।
शीतल ने कहा कि उन्होंने अत्यधिक काम और मानसिक प्रताड़ना का विरोध किया तो उनका ₹22,000 का वेतन रोक दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि कैफे संचालक ने उनके वेतन से ₹1,750 रैपिडो के खर्च के नाम पर काटने का दावा किया, जिसे वह अवैध कटौती बताती हैं।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, 8 सितंबर को काम बंद करने के बाद जब उन्होंने अपना बकाया वेतन मांगा, तो भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद, उनके अनुसार, 9 सितंबर को कैफे संचालक ने मोती नगर थाने में उनके खिलाफ दाल, तेल और कॉफी पाउच चोरी करने की शिकायत दी। शीतल ने इसे वेतन मांगने के बाद बनाया गया झूठा आरोप बताया है।
शीतल ने कैफे संचालक द्वारा उन्हें 2 सितंबर को ₹11,000 नकद देने की बात को भी झूठा बताया। उनका कहना है कि यदि भुगतान किया गया था तो उसका CCTV फुटेज या उनके हस्ताक्षर वाली भुगतान रसीद उपलब्ध होनी चाहिए।
शिकायत में दूसरी आरोपी के तौर पर कांस्टेबल दिव्या का नाम दिया गया है, जो वर्तमान में राजेंद्र प्लेस थाने में तैनात है। शीतल ने आरोप लगाया है कि दिव्या कैफे व्यवसाय में साझेदार हैं और बकाया वेतन मांगने पर उन्होंने अपने पुलिस पद और वर्दी का रौब दिखाया।
शीतल का दावा है कि उन्हें थाने जाने या पैसे मांगने पर गंभीर झूठे मुकदमों में जेल भेजने की धमकी दी गई। शीतल ने कहा है कि इन कथित धमकियों के कारण वह भय और मानसिक तनाव में हैं।
शीतल ने अपनी शिकायत में पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच, अपनी सुरक्षा और आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने कैफे संचालक द्वारा दी गई कथित चोरी की शिकायत को भी रद्द करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने अपना ₹22,000 बकाया वेतन दिलाने की मांग की है।
शीतल ने इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय, दिल्ली को शिकायत की।
इधर शीतल के द्वारा लगाये आरोपों का कैफे संचालक ने खंडन किया है। शीतल के नोटिस के जवाब में विजय सिंह ने विस्तृत जवाब दिया जिसमे उनके द्वारा लगाये सभी आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि कांस्टेबल दिव्या का कैफे से कोई सबध नहीं है - वो ना तो कैफे की पार्टनर है ना ही को-ओनर ही हैं। विजय ने कहा कि शीतल ने अपनी नौकरी के दौरान कैफ़े के अंदर चोरी की जो यहां के CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गईं।
संचालक का आरोप है कि दिव्या ने रेस्तरां के अंदर तेल के पैकेट, दाल के पैकेट और कॉफ़ी पाउच की चोरी की जिसपर उसके खिलाफ़ 9 सितंबर को मोती नगर पुलिस स्टेशन, दिल्ली में पुलिस शिकायत दर्ज कराई गई। विजय का यह भी कहना है कि उन्होंने 2 सितंबर को केफे के हेल्पर विनोद कुमार के सामने शीतल को 11 हजार रुपए वेतन भुगतान किया और इसके अलावा 70 रूपये प्रति दिन के हिसाब से 25 दिन तक शीतल के रेपिडो चार्जस 1750 रूपये का भुगतान भी किया। कैफे संचालक का कहना है कि महिला कुक के 8 दिन का वेतन ही उनपर निकलता है और रेपिडो चार्जस काटकर शेष राशि वे प्राप्त करने की हकदार हैं। अन्य सभी आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया गया।
मामले में पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। इस मामले में पुलिस का पक्ष जानने के लिए द मूकनायक ने मोती नगर थाने से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन अधिकारियों से बात नहीं हो सकी।
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