
चेन्नई- तमिलनाडु सरकार ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाते हुए उन क्षेत्रों की पहचान करने और वहां विशेष SC/ST पुलिस स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया पर कार्रवाई शुरू कर दी है, जहां अस्पृश्यता से जुड़े अत्याचारों की घटनाएं अधिक होती हैं। यह कार्रवाई राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के निर्देश के बाद शुरू हुई है। वतर्मान में देश के 5 राज्यों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामलों की त्वरित व प्रभावी जांच के लिए कुल 145 विशेष पुलिस स्टेशन (Special Police Stations) हैं। सबसे आगे मध्य प्रदेश है जहाँ 51 विशेष पुलिस स्टेशन संचालित हैं।
मामला चेंगलपट्टू जिले के सुन्नाम्बेडु निवासी तथा नीलम कल्चरल सेंटर से जुड़े एस. वेंकटेशन द्वारा भेजी गई एक याचिका से जुड़ा है। वेंकटेशन ने 13 जून 2025 को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भेजी अपनी शिकायत में मांग की थी कि राज्य सरकार उन क्षेत्रों को आधिकारिक रूप से "अस्पृश्यता अत्याचार-प्रवण क्षेत्र" (Areas Prone to Untouchability Atrocities) के रूप में चिन्हित करे, जहां इस प्रकार की घटनाएं अधिक होती हैं। साथ ही उन्होंने ऐसे इलाकों में तत्काल विशेष SC/ST पुलिस स्टेशन स्थापित करने की मांग भी की थी।
द मूकनायक से बातचीत में वेंकटेशन कहते हैं कि तमिलनाडु में जातिगत अत्याचारों की स्थिति सामाजिक, कानूनी और राजनीतिक तीनों स्तरों पर काफी जटिल और चिंताजनक है। हालांकि राज्य अपनी प्रगतिशील राजनीति और द्रविड़ आंदोलनों के लिए जाना जाता है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर जातिगत भेदभाव और हिंसा आज भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।
इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने 23 जून को पत्र संख्या APCR/OL/TN/2025/304819 के माध्यम से तमिलनाडु सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भेजे।
इसके बाद तमिलनाडु गृह विभाग ने 7 जुलाई 2026 को पत्र संख्या 12738/Police.15/2026-1 जारी किया। यह पत्र उप सचिव (गृह विभाग) एम. श्रीनन द्वारा जारी किया गया और इसे पुलिस महानिदेशक (Director General of Police), चेन्नई तथा पुलिस महानिरीक्षक (Inspector General of Police), सोशल जस्टिस एंड ह्यूमन राइट्स विंग को संबोधित किया गया।
पत्र में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से प्राप्त शिकायत की प्रति संलग्न करते हुए संबंधित अधिकारियों से इस मामले में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। गृह विभाग ने निर्देश दिया है कि शिकायत पर की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण सीधे राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, चेन्नई को भेजा जाए। साथ ही उसकी प्रतिलिपि शिकायतकर्ता एस. वेंकटेशन तथा राज्य सरकार को भी उपलब्ध कराई जाए।
पत्र में इस मामले को 'अत्यंत आवश्यक' श्रेणी में रखते हुए विशेष प्राथमिकता के साथ कार्रवाई करने और आयोग को शीघ्र उपयुक्त उत्तर भेजने का भी निर्देश दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि वेंकटेशन की याचिका का मुख्य आग्रह यह था कि जिन इलाकों में अस्पृश्यता और जातिगत अत्याचारों की घटनाएं लगातार सामने आती हैं, उन्हें अलग श्रेणी में चिह्नित किया जाए तथा वहां अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से जुड़े मामलों की प्रभावी जांच और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए विशेष SC/ST पुलिस स्टेशन स्थापित किए जाएं।
संसद में प्रस्तुत गृह मंत्रालय और NCRB के आँकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में लगातार वृद्धि देखी गई है। जहाँ 2020 में लगभग 1,274 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2022-2023 तक यह संख्या बढ़कर 1,700 से 1,800 के पार पहुँच गई।
राष्ट्रीय स्तर की तुलना में तमिलनाडु में अदालत में जातिगत अपराधों के मामलों में सजा मिलने की दर काफी कम (लगभग 8% से 13%) रही है, जबकि लंबित मामलों का प्रतिशत 80% से अधिक रहता है।
ऑनर किलिंग : इंटर-कास्ट (विशेषकर गैर-दलित महिला और दलित पुरुष) विवाह या प्रेम-संबंधों के खिलाफ हिंसा तमिलनाडु में एक बड़ा मुद्दा है। तिरुनलवेली, मदुरै, तंजावुर और कृष्णगिरि जैसे जिलों में ऐसी घटनाएँ बार-बार सामने आती हैं।
सामाजिक बहिष्कार और अस्पृश्यता : राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी "दो-कप प्रणाली" (चाय की दुकानों पर दलितों और गैर-दलितों के लिए अलग कप), श्मशान घाटों तक पहुँच पर रोक, मंदिर प्रवेश पर प्रतिबंध और दलित सरपंचों को प्रशासनिक काम न करने देने जैसी सामाजिक बाधाएँ मौजूद हैं।
अमानवीय उत्पीड़न: पानी की टंकियों में गंदगी मिलाना (जैसे वेन्गईवायल मामला), सार्वजनिक पेयजल स्रोतों को दूषित करना और बस्तियों का सामाजिक बहिष्कार करना जातिगत वर्चस्व दिखाने के अमानवीय तरीकों के रूप में उभरा है।
स्कूली/शैक्षणिक स्तर पर जातिगत तनाव: राज्य के दक्षिणी जिलों (जैसे तिरुनलवेली और थूथुकुडी) में छात्रों के बीच हाथ में अलग-अलग रंगों के जातिगत धागे (Caste Bands) बांधने और स्कूलों के भीतर हिंसक झड़पों की खबरें भी चिंता का विषय बनी हैं।
तमिलनाडु पुलिस विभाग के तहत Social Justice and Human Rights (SJ&HR) विंग सक्रिय है, जो संवेदनशील और जातिगत तनाव वाले संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर उन पर निगरानी रखती है।
तमिलनाडु में हाल के वर्षों में अनुसूचित जाति (SC/ST) समुदाय के खिलाफ हुए अत्याचारों और ऑनर किलिंग के प्रमुख मामलों में तिरुनलवेली का कविन सेल्वागणेश मामला (जुलाई 2025) शामिल है, जहाँ 27 वर्षीय दलित सॉफ्टवेयर इंजीनियर की उच्च जाति की युवती से प्रेम-संबंध के कारण सरेराह हत्या कर दी गई।
चेन्नई के पल्लीकरनई का प्रवीन हत्याकांड (फरवरी 2024), जिसमें एक 26 वर्षीय दलित युवक को उसकी अंतरजातीय पत्नी के भाई और साथियों ने मौत के घाट उतार दिया था।
तंजावुर का ऐश्वर्या हत्याकांड (जनवरी 2024), जहाँ 19 वर्षीय युवती की उसके अपने ही परिवार वालों ने दलित युवक नवीन से विवाह करने पर ऑनर किलिंग कर दी।
कृष्णगिरि का उथंगराई कांड (2023), जिसमें एक पिता (दंडपानी) ने दलित युवती अनुसूया से अंतरजातीय विवाह करने पर अपने ही बेटे सबाश की निर्मम हत्या कर दी थी।
पुदुक्कोट्टई का वेन्गईवायल मामला (2023), जहाँ दलित बस्ती को पेयजल देने वाली पानी की टंकी में मानव मल मिलाकर पूरे समुदाय को प्रताड़ित करने का अमानवीय और गंभीर जातिगत अपराध सामने आया था।
केंद्रीय गृह मंत्रालय और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार देश के 5 राज्यों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामलों की त्वरित व प्रभावी जांच के लिए कुल 145 विशेष पुलिस स्टेशन (Special Police Stations) स्थापित किए गए हैं। इन विशेष थानों के नेटवर्क में सबसे आगे मध्य प्रदेश है जहाँ 51 विशेष पुलिस स्टेशन संचालित हैं, इसके बाद बिहार में 40, छत्तीसगढ़ में 27, झारखंड में 24 तथा केरल में 3 विशेष पुलिस स्टेशन कार्यरत हैं।
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