
मयिलाडुतुरै- जिले के थरंगमबाड़ी के पास सात्तनकुडी गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। अनुसूचित जाति के 19 वर्षीय युवक पार्थिबन और पिछड़े वर्ग की 16-17 वर्षीय युवती दिव्यदर्शिनी की लाशें मंगलवार सुबह एक बाग में स्थित छप्पर वाली झोपड़ी में फांसी पर लटकती हुई मिलीं। दोनों एक-दूसरे से प्रेम संबंध में थे, लड़के के परिजनों का आरोप है कि यह जातीय आनर किलिंग है।
पुलिस सूत्रों और स्थानीय सूचनाओं के अनुसार सोमवार शाम को पार्थिबन (मारीमुथु पुत्र, कृषि मजदूर) और दिव्यदर्शिनी (लक्ष्मीकांतन पुत्री, हाल ही में 12वीं पास) के प्रेम संबंध की जानकारी मिलने के बाद दोनों परिवारों में तनाव पैदा हो गया।
जाति-आधारित आक्रोश के चलते युवक पर हमला किया गया, जिसकी शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। अगले दिन सुबह दोनों की लाशें बाग में एक छोटी झोपड़ी में अलग-अलग फांसी पर लटकी मिलीं। पार्थिबन की लाश ऐसी स्थिति में थी कि उसके पैर जमीन को छू रहे थे, जिससे आत्महत्या पर संदेह जताया जा रहा है। परिजन और गांववासी इसे हत्या बताते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं।
तामिलनाडु में जाति-आधारित आनर किलिंग की घटनाएं लगातार हो रही हैं, जो समाज के लिए चिंता का विषय हैं। इस मामले में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। प्रेम संबंध को लेकर सांप्रदायिक हिंसा की आशंका को देखते हुए मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग तुरंत विशेष कानून बनाने, दोषी जातिवादी तत्वों की गिरफ्तारी और जाति घृणा फैलाने वाली संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश पैदा कर दिया है और न्याय की मांग तेज हो गई है।
मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच ने पिछले माह ही एक दलित आईटी इंजीनियर की 'ऑनर किलिंग' से जुड़े बहुचर्चित मामले में सुनवाई के दौरान एक पुलिस उपनिरीक्षक (Sub-Inspector) को जमानत देते हुए समाज में व्याप्त जातिवाद पर करारा प्रहार किया।
अदालत ने खुलकर स्वीकार किया कि जातिवाद सिर्फ आम लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्यायपालिका को भी प्रभावित करता है। कोर्ट ने कहा:
"हर व्यक्ति, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली या विशेषाधिकार प्राप्त क्यों न हो, किसी न किसी रूप में जातिवाद का अनुभव करता है। यहाँ तक कि हम न्यायाधीश भी इससे अछूते नहीं हैं। हमारे आदेशों को जाति के आधार पर प्रेरणाएँ दे दी जाती हैं, भले ही मामलों का निर्णय योग्यता के आधार पर किया जा रहा हो।"
कोर्ट ने ऑनर किलिंग को 'जातिवाद का चरम रूप' बताते हुए कहा कि इसे 'सम्मान' की संज्ञा देना गलत है।
"सम्मान हत्या/ऑनर किलिंग जातिवाद का चरम प्रतिबिंब है। जातिवाद राष्ट्र के लिए अभिशाप है। प्रकृति किसी जाति को नहीं मानती। सूरज सबको रोशनी देता है, बारिश सब पर होती है, हवा सबके लिए है। जब समाज जाति की कृत्रिम बाधाओं को पार करेगा, तभी वह इस सच्चाई को जान पाएगा कि 'ऑनर किलिंग' में कोई 'सम्मान' नहीं होता, बल्कि यह एक शर्मनाक कृत्य है।"
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.
यहां सपोर्ट करें