TN: 3 साल पहले बाइक चोरी की शिकायत पर जेल भेजा तो दलित महिला पत्रकार बन गई जातिवादी नफरत का निशाना, पुलिस की बेरुखी

गर्भवती भाभी समेत पूरे परिवार की पिटाई, परिवार का आरोप है कि वीडियो सबूत के बावजूद पुलिस जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रही।
23 जून को पीड़ितों ने अरकंदनल्लुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी पर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) एक्ट, महिला उत्पीड़न निषेध कानून और बीएनएस की धाराएं लगाईं। लेकिन दो हफ्ते बाद भी मुख्य आरोपी फरार हैं। पुलिस ने केवल चौथे आरोपी को गिरफ्तार किया है।
23 जून को पीड़ितों ने अरकंदनल्लुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी पर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) एक्ट, महिला उत्पीड़न निषेध कानून और बीएनएस की धाराएं लगाईं। लेकिन दो हफ्ते बाद भी मुख्य आरोपी फरार हैं। पुलिस ने केवल चौथे आरोपी को गिरफ्तार किया है।एआई निर्मित सांकेतिक चित्र
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विल्लुपुरम - तमिलनाडू के विल्लुपुरम जिले में वी सिथामुर गांव में तीन साल पहले चोरी की शिकायत करने वाली एक 27 वर्षीय दलित महिला पत्रकार अब उसी शिकायत की ‘सजा’ भुगत रही हैं। प्रभावशाली जाति के दो भाइयों को जेल भेजने के बाद से वह लगातार जातिवादी नफरत का निशाना बनी हुई हैं। 22 जून को उनके भाई और पूरे परिवार पर घातक हमला किया गया, जिसमें गर्भवती भाभी को चप्पलों से पीटा गया। दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपी फरार हैं और तमिलनाडु पुलिस की बेरुखी साफ दिख रही है।

क्या है पूरा मामला?

जनवरी 2023 में पत्रकार के घर से दो बाइक चोरी हो गईं। उसने शिकायत दर्ज कराई और दो स्थानीय युवको रघु और अंबु के नाम लिए। पुलिस जांच में दोनों भाई बाइक चोरी के आदतन अपराधी निकले। उनके पास से 15 बाइकें और दो ट्रैक्टर बरामद हुए। पत्रकार की बाइक हालांकि नहीं मिलीं। दोनों भाई गिरफ्तार हुए और बाद में जमानत पर छूटे।

तब से दोनों भाई महिला रिपोर्टर से नाराज थे। उन्होंने उसे धमकी दी कि “प्रभावशाली जाति के लोगों के खिलाफ शिकायत करने की कीमत चुकानी पड़ेगी।”

22 जून को पत्रकार के घर के बाहर एक दुकान के सामने अंबु और एक इंश्योरेंस एजेंट के बीच झगड़ा हो रहा था। महिला के भाई संजू (31) ने उन्हें शांतिपूर्वक दुकान से दूर जाने को कहा। अंबु चला गया, लेकिन थोड़ी देर बाद रघु और अन्य साथियों के साथ लौट आया।

गिरोह ने संजू पर जातिवादी गालियां बरसानी शुरू कर दीं और मारपीट कर दी। शोर सुनकर घर से संजू की गर्भवती पत्नी, भाई की पत्नी और मां (58) बाहर आईं। आरोपी पुरुषों ने महिलाओं को भी जातिवादी गालियां दीं और हमला बोल दिया। रघु ने गर्भवती महिला पर चप्पल से तीन बार वार किया और उसे धक्का दिया। मां की साड़ी फट गई।

आरोपियों ने परिवार को खुलेआम धमकी दी “ पत्रकार जब भी काम पर निकलेगी तो उसे भी निशाना बनाएंगे।” पूरा घटनाक्रम घर पर लगे सीसीटीवी में कैद है।

23 जून को पीड़ितों ने अरकंदनल्लुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी पर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) एक्ट, महिला उत्पीड़न निषेध कानून और बीएनएस की धाराएं लगाईं। लेकिन दो हफ्ते बाद भी रघु, अंबु और एक अन्य मुख्य आरोपी फरार हैं। पुलिस ने केवल चौथे आरोपी कुमार को गिरफ्तार किया है।

पुलिस का दावा है कि आरोपी बेंगलुरु में हैं, लेकिन “सटीक लोकेशन” नहीं मिल रही। परिवार और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वीडियो सबूत के बावजूद पुलिस जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रही।

परिवार को कानूनी मदद दे रही मानवाधिकार कार्यकर्ता वी ललिता ने TNIE को बताया कि अरकंदनल्लुर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले कई गांवों (वडकरैथलनूर, वसंत कृष्णपुरम, वीरापांडी पुलिक्कल, कडकनूर आदि) में पिछले दशक में दलितों के खिलाफ सामूहिक हिंसा, हत्या जैसे मामले हुए, लेकिन किसी में भी दोषसिद्धि नहीं हुई। ललिता कहती हैं, “SC/ST PoA Act के तहत तुरंत गिरफ्तारी जरूरी है। ‘ट्रेस नहीं हो रहा’ जैसे बहाने पुलिस की मिलीभगत की ओर इशारा करते हैं। दलितों के मामलों में यह थाना लगातार नाकाम साबित हो रहा है।”

पीड़ित महिला पत्रकार का कहना है, “मेरी भाभी दूसरी तिमाही में गर्भवती हैं और बहुत दर्द झेल रही हैं। हम सब डरे हुए हैं, लेकिन मैं डरकर काम छोड़ने वाली नहीं हूं।”

23 जून को पीड़ितों ने अरकंदनल्लुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी पर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) एक्ट, महिला उत्पीड़न निषेध कानून और बीएनएस की धाराएं लगाईं। लेकिन दो हफ्ते बाद भी मुख्य आरोपी फरार हैं। पुलिस ने केवल चौथे आरोपी को गिरफ्तार किया है।
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23 जून को पीड़ितों ने अरकंदनल्लुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी पर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) एक्ट, महिला उत्पीड़न निषेध कानून और बीएनएस की धाराएं लगाईं। लेकिन दो हफ्ते बाद भी मुख्य आरोपी फरार हैं। पुलिस ने केवल चौथे आरोपी को गिरफ्तार किया है।
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23 जून को पीड़ितों ने अरकंदनल्लुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी पर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) एक्ट, महिला उत्पीड़न निषेध कानून और बीएनएस की धाराएं लगाईं। लेकिन दो हफ्ते बाद भी मुख्य आरोपी फरार हैं। पुलिस ने केवल चौथे आरोपी को गिरफ्तार किया है।
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23 जून को पीड़ितों ने अरकंदनल्लुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी पर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) एक्ट, महिला उत्पीड़न निषेध कानून और बीएनएस की धाराएं लगाईं। लेकिन दो हफ्ते बाद भी मुख्य आरोपी फरार हैं। पुलिस ने केवल चौथे आरोपी को गिरफ्तार किया है।
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