
चेन्नई/तेनकाशी- तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों में एक बार फिर दलित विरोधी हिंसा ने सियासी हलचल तेज कर दी है। तेनकाशी और तिरुनेलवेली जिलों में पिछले 48 घंटों के भीतर हुए दो अलग-अलग हमलों में सात अनुसूचित जाति (एससी) के लोग हंसिए से बुरी तरह घायल हो गए। इस घटना ने दो-तीन माह पहले पेरुमपट्टू गाँव में हुई उस दरिंदगी की याद ताजा कर दी है, जहाँ दो निर्दोष दलितों की हत्या कर दी गई थी। पीएमके नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. अनबुमणि रामदोस ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार की विफलता है और चेतावनी दी है कि अब ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होने देनी चाहिए वरना तनावग्रस्त दक्षिणी जिलों में सामाजिक अशांति बढ़ने की आशंका है।
तेनकाशी जिले के अलंगुलम के पास स्थित नेथुर गाँव की मठकोविल स्ट्रीट पर शुक्रवार शाम करीब 5:30 से 6:00 बजे के बीच नौ बदमाश मास्क पहनकर तीन दोपहिया वाहनों पर सवार होकर पहुँचे। बदमाशों के वाहनों पर नंबर प्लेट नहीं लगी थी। बिना किसी उकसावे के उन्होंने हंसिए निकाल लिए और सड़क पर खड़े लोगों पर अंधाधुंध हमला कर दिया। इस सड़क पर अधिकतर निवासी अनुसूचित जाति (एससी-ईसाई) समुदाय से हैं।
हमले में नेथुर गाँव के छह लोग और आयिकुडी शहर के एक व्यक्ति घायल हो गए। एक घायल का स्थानीय अस्पताल में इलाज किया गया, जबकि पाँच अन्य को गंभीर हालत में पहले अलंगुलम सरकारी अस्पताल और फिर तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार, घायलों में से दो की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।
वहीं, तिरुनेलवेली जिले के अंबासमुद्रम के पास मन्नारकोविल गाँव में भी इसी तरह का एक हमला हुआ। यहाँ एक सशस्त्र गिरोह ने मणिकंदन नाम के एक अनुसूचित जाति के युवक पर हंसिए से हमला कर दिया। मणिकंदन को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने अभी तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
उल्लेखनीय है कि 2 मार्च को तिरुनेलवेली जिले के नांगुनेरी के पास पेरुमपट्टू गाँव में नशे में धुत 9 लोगों के एक गिरोह ने अमानवीय हिंसा को अंजाम दिया था। गिरोह ने दो निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी थी, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उस समय भी इस घटना ने पूरे राज्य में तूल पकड़ लिया था और दक्षिणी जिलों में लंबे समय तक तनाव बना रहा था।
डॉ. अनबुमणि रामदोस ने एक आधिकारिक बयान में कहा, "तेनकाशी जिले के नेथुर गाँव और तिरुनेलवेली जिले के अंबासमुद्रम के पास मन्नारकोविल गाँव में सशस्त्र गिरोह द्वारा अनुसूचित जाति के लोगों पर अलग-अलग हमलों में सात लोग गंभीर रूप से घायल होने की खबरें बेहद चौंकाने वाली हैं। तनाव से भरे इन दक्षिणी जिलों में सरकार की ओर से इस प्रकार की हिंसा को रोकने में विफलता निंदनीय है।"
डॉ. अनबुमणि रामदोस ने कहा, "दो-तीन माह पहले पेरुमपट्टू में जो हुआ, उसके बाद ही सरकार को सबक लेना चाहिए था। लेकिन आज फिर वही स्थिति पैदा हो रही है। सरकार को अब ऐसी हिंसा की पुनरावृत्ति को रोकना ही होगा।"
उन्होंने आगे कहा, "सरकार को किसी भी सामाजिक अशांति को पनपने नहीं देना चाहिए। दक्षिणी जिलों में मामूली विवाद भी बड़ी त्रासदी का रूप ले सकता है। राज्य सरकार और जिला प्रशासन तत्काल प्रभाव से हमले वाले गाँवों में सामान्य स्थिति बहाल करें।"
डॉ. रामदोस के अलावा, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI(M)) ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है। पार्टी के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने आरोप लगाया कि पिछले पाँच महीनों में तेनकाशी जिले में दलित समुदाय के खिलाफ आठ घटनाएं हो चुकी हैं। उन्होंने कहा, "यह अत्यंत चौंकाने वाला है कि तेनकाशी में दलित युवकों पर इतना क्रूर और जानलेवा हमला किया गया। पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि अपनी पारंपरिक मध्यस्थता से मामले को दबाने की कोशिश की है।"
वहीं, आंबेडकरवादी संगठनों ने तुरंत गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यदि दोषियों को जल्द से जल्द सजा नहीं दी गई, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन करेंगे।
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