
उदयपुर- गोगुन्दा विधानसभा क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे दलित पत्रकार लक्ष्मीलाल उर्फ लखन सालवी पर कथित तौर पर बुधवार 19 अगस्त को जातिवादी गालियां देते हुए नुकीले हथियार से जानलेवा हमला किया गया। हमलावरों में स्थानीय पत्रकार गोपाल लोढ़ा और उनके भाई कैलाश लोढ़ा शामिल हैं। घायल पत्रकार को सीएचसी में इलाज के दौरान भी दोनों ने दोबारा हमला किया।
मामले में गोगुन्दा थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम की कई धाराओं में एफआईआर संख्या 0364 दर्ज की गई है।
द मूकनायक ने लखन सालवी से बात की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। लखन ने बताया कि 19 अगस्त को उन्हें जसवंतगढ़ के नारायण पालीवाल का फोन आया और बताया गया कि जसवंतगढ़ के लोग अपनी समस्या लेकर एसडीएम गोगुन्दा को ज्ञापन देने आए हैं। कवरेज के लिए लखन एसडीएम कार्यालय पहुंचे। एसडीएम के चैंबर में ज्ञापन का फोटो और वीडियो लेने के बाद वे नीचे आए। तहसीलदार कार्यालय के सामने ग्रामीणों का बाइट ले रहे थे, तभी कथित पत्रकार गोपाल लोढ़ा उनके कैमरे के सामने अपना मोबाइल लाकर बाधा डालने लगे।
लखन ने आरोप लगाया कि उनके टोकने पर गोपाल ने जातिगत गालियां निकालनी शुरू कर दीं और मारपीट शुरू कर दी। लखन उनकी आड़ से हटने की कोशिश कर रहे थे, तभी आसपास के लोग लखन को वहां से हटाकर तहसील कार्यालय के बरामदे में ले गए। लेकिन गोपाल नहीं माना। उन्होंने किसी तीखे नुकीले हथियार से लखन के सिर और मुंह पर वार किए। गुप्तांग पर वार करने की कोशिश भी की, लेकिन लखन ने उनका हाथ पकड़ लिया। आंखों पर वार करने की कोशिश भी की गई। लोगों ने बीच-बचाव कर लखन को छुड़ाया। सिर से खून बहने लगा।
लोग उन्हें सामने स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले गए। वहां डॉक्टर और स्टाफ इलाज कर रहे थे, तभी पीछे से गोपाल लोढ़ा और उनके भाई कैलाश लोढ़ा पहुंचे और दोबारा हमला कर दिया। दोनों वहां से भाग निकले।
लखन सालवी ने बताया कि पिछले कुछ समय से गोपाल लोढ़ा उनके प्रति बिना किसी वजह के द्वेष रखते आ रहे हैं। प्रेस कवरेज के दौरान भी उन्होंने लखन के काम में अड़चन पैदा करने की कोशिश की। मौजूद सभी कैमरामैन इसके गवाह हैं। टोकने पर वे उग्र होकर मारपीट पर उतर आए। अस्पताल में आकर भी उन्होंने हमला किया।
लखन ने कहा, “गोपाल लोढ़ा आए दिन मुझे जातिगत गालियां निकालता है। 19 अगस्त को उसने न केवल जातिगत गालियां निकालीं बल्कि नुकीले हथियार से जानलेवा हमला भी किया। इसमें कैलाश लोढ़ा ने भी सहयोग किया।”
घटना की शिकायत पर 19 अगस्त शाम गोगुन्दा थाने में एफआईआर दर्ज की गई। पीड़ित का मेडिकल करवाया गया। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 115(2), 126(2) और 3(5), अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम, 1989 (संशोधन 2015) की धारा 3(1)(i), 3(1)(r), 3(1)(s), 3(2) और 3(2)(va) के अंतर्गत धाराओं में दर्ज की गयी हैं।
लखन सालवी ने गुरुवार को डिप्टी ऑफिस जाकर अपना बयान दर्ज करवाया। उन्होंने बताया कि उनकी रिपोर्ट दर्ज होने के बाद गोपाल लोढ़ा पक्ष ने क्रॉस एफआईआर भी दर्ज करवाई है।
लखन सालवी गोगुन्दा क्षेत्र में लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे हैं। वे बताते हैं कि गोपाल लोढ़ा नियमित रूप से उन्हें जाति के आधार पर गालियां निकालते रहे हैं। इस घटना में कई प्रत्यक्षदर्शी मौजूद थे, जिन्होंने बीच-बचाव भी किया। दलित पत्रकारों पर हो रहे हमलों और जातिवादी हिंसा के मामलों में यह एक और गंभीर घटना है। पुलिस से मामले की निष्पक्ष और तेज जांच की मांग की जा रही है। इस मामले की जांच पुलिस उपाधीक्षक छगन पुरोहित कर रहे हैं।
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