द मूकनायक इम्पैक्ट: भीलवाड़ा में दलितों को कुर्सी से उतारने और जातिसूचक गाली देने के आरोप में FIR, 5 नामजद

16 अगस्त को प्रकाशित द मूकनायक की रिपोर्ट के बाद भाकलिया के दलित समुदाय ने दो घंटे की बैठक कर मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने का निर्णय लिया।
FIR दर्ज होने के बाद मामले की जांच पुलिस के जिम्मे है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच, उपलब्ध वीडियो/ऑडियो रिकॉर्डिंग, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर होगी।
15 अगस्त को भाकलिया गांव के राजकीय विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह कार्यक्रम में पहली बार दलित समुदाय के दो सदस्यों को अतिथि के तौर पर मंच पर आमंत्रित कर कुर्सियों पर बैठाया गया था। कुछ लोगों ने उनके कुर्सी पर बैठने का विरोध किया और उनके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज करते हुए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया।द मूकनायक
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भीलवाड़ा- राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के मांडल क्षेत्र के भाकलिया गांव में 15 अगस्त को सरकारी स्कूल में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान दलित समुदाय के सदस्यों के साथ कथित जातिगत भेदभाव और अपमान के मामले में आखिरकार पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। दलित अधिकार कार्यकर्ता और लेखक भंवर मेघवंशी ने सोशल मीडिया पर स्वाधीनता समारोह के दौरान हुए इस शर्मनाक घटना की विडियो शेयर की थी। विडियो दलित समुदाय के जागरूक युवा बद्रीलाल बैरवा ने हिम्मत करके बनाई थी और गाँव में जातिवादी मानसिकता को उजागर किया था।

द मूकनायक द्वारा इस मामले की पूरी विस्तृत रिपोर्ट बनाकर रविवार को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद दलित समुदाय ने बैठक कर पुलिस शिकायत दर्ज कराने का फैसला लिया। शिकायत रामेश्वरलाल बैरवा और गोपीलाल बैरवा की ओर से बागोर थाने में दी गई। FIR में बालू वैष्णव, हीरालाल शर्मा, नारायण जाट, नारायण और प्रकाश जाट को नामजद किया गया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 189(2) और 351(2) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं 3(1)(r), 3(1)(s) और 3(2)(va) के तहत मामला दर्ज किया गया है। FIR की जांच मांडल वृत के पुलिस उपाधीक्षक राहुल जोशी को सौंपी गई है।

क्या थी 15 अगस्त की घटना?

15 अगस्त को भाकलिया गांव के राजकीय विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में पहली बार दलित समुदाय के दो सदस्यों रामेश्वरलाल बैरवा और गोपीलाल बैरवा को अतिथि के तौर पर मंच पर आमंत्रित कर कुर्सियों पर बैठाया गया था। शिकायत के मुताबिक, इसी दौरान कुछ लोगों ने उनके कुर्सी पर बैठने का विरोध किया और उनके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज करते हुए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनसे कहा गया कि वे नीचे बैठें, उनकी “औकात” क्या है और यदि वे कुर्सियों पर बैठेंगे तो दूसरे लोग कहां बैठेंगे। आरोप है कि इसके बाद उन्हें डराकर कुर्सियों से नीचे उतार दिया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने उनके परिवार की दो महिलाओं के आंगनबाड़ी में कार्यरत होने का हवाला देते हुए आंगनबाड़ी बंद करवाने और उन्हें नहीं छोड़ने की धमकी दी। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, घटना स्कूल के बच्चों, शिक्षकों और ग्रामीणों के सामने हुई और इसका ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग भी उनके पास मौजूद है, जिसे जांच के दौरान पुलिस को देने की बात कही गई है।

घटना के बाद शुरुआत में पुलिस में शिकायत नहीं दी गई थी। बद्रीलाल बैरवा ने द मूकनायक को बताया कि रविवार शाम समुदाय की करीब दो घंटे तक बैठक हुई।

उनके मुताबिक, बैठक में कुछ बुजुर्गों की राय थी कि यह गांव का आपसी मामला है और पुलिस में शिकायत करने से विवाद और बढ़ सकता है। लेकिन समुदाय के अधिकांश सदस्यों ने माना कि यह कोई पहली घटना नहीं है और वर्षों से कथित तौर पर इसी तरह के अपमान और भेदभाव का सामना करना पड़ता रहा है। इसके अलावा घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी जातिगत अपमान करने वाले आरोपियों ने दलित समुदाय से माफ़ी भी नहीं मांगी ना ही उन्हें अपने किए पर शर्मिंदगी होने का कुछ अहसास था जिसके कारण दलित समुदाय ने सर्व सम्मति से बराबरी, सम्मान और सामाजिक न्याय के हित में पुलिस शिकायत दर्ज कराने का फैसला लिया।

बद्रीलाल बैरवा ने द मूकनायक का धन्यवाद करते हुए कहा कि खबर प्रकाशित होने के बाद सोशल मीडिया पर बहुजन समुदाय की ओर से उन्हें व्यापक समर्थन मिला। उनके मुताबिक, इस समर्थन ने भी समुदाय को अपनी आवाज उठाने का हौसला दिया।

समुदाय की बैठक में सामने आया कि मामले को केवल गांव के स्तर पर सुलझाने के बजाय कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाए। शिकायतकर्ताओं ने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में कार्रवाई और अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की है। FIR के अनुसार, पुलिस को लिखित सूचना 17 अगस्त को रात 12:12 बजे प्राप्त हुई। इसके बाद मामला दर्ज कर जांच के लिए पुलिस उपाधीक्षक राहुल जोशी को जिम्मेदारी दी गई।

सदियों पुरानी जातिगत ऊंच-नीच की मानसिकता का सवाल

भाकलिया की यह घटना केवल एक स्वतंत्रता दिवस समारोह में हुए विवाद तक सीमित नहीं है। स्थानीय दलित समुदाय का आरोप है कि गांव में जातिगत ऊंच-नीच और छुआछूत की मानसिकता आज भी सामाजिक व्यवहार में दिखाई देती है।

बद्रीलाल बैरवा ने पहले द मूकनायक को बताया था कि SC/ST समुदाय के लोगों को कथित तौर पर दूसरे समुदायों के घरों में अलग बैठाया जाता है और कई जगहों पर उनके लिए अलग कप और गिलास रखे जाते हैं। उनका दावा था कि उन्हें अपने इस्तेमाल किए गए बर्तन खुद धोकर रखने पड़ते हैं। उनका कहना था कि गांव में शिक्षा के कारण नई पीढ़ी में जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन सामाजिक बराबरी की मानसिकता अभी पूरी तरह स्थापित नहीं हुई है।

दलित समुदाय के युवाओं का कहना है कि सार्वजनिक और विशेष रूप से सरकारी संस्थान में किसी व्यक्ति की जाति के आधार पर उसके बैठने या सम्मान में अंतर नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर समुदाय ने अब पुलिस कार्रवाई का रास्ता चुना है।

शुरुआत में कुछ बुजुर्ग इसे गांव का आपसी मामला मानकर पुलिस तक न ले जाने के पक्ष में थे, लेकिन बहुसंख्यक सदस्यों ने वर्षों से चले आ रहे कथित अपमान और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया। इसके बाद रामेश्वरलाल बैरवा और गोपीलाल बैरवा ने पुलिस को लिखित शिकायत दी और FIR दर्ज हुई। समुदाय के युवा बद्रीलाल बैरवा ने कहा कि द मूकनायक की खबर के बाद सोशल मीडिया पर बहुजन समुदाय से मिले समर्थन ने भी उन्हें आगे बढ़ने का साहस दिया।

मेघवंशी ने द मूकनायक से बातचीत में कहा, " 15 अगस्त के समारोह में कुर्सी पर बैठने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब दलित समुदाय के सम्मान, बराबरी और संवैधानिक अधिकारों के सवाल में बदल गया है। मीडिया का सपोर्ट मिलने से ग्रामीणों में भी हौसला बढ़ा और पहली बार दलित समुदाय ने अपने सम्मान के लिए कानूनी कारवाई का फैसला किया।"

मेघवंशी आगे कहते हैं कि इस घटना का दूरगामी परिणाम सामने आएगा, आसपास के लोगों में भी जागरूकता बढ़ेगी और वंचित समुदाय अपने अधिकारों और सम्मान के प्रति सचेत होगा। मेघवंशी ने यह भी कहा बद्रीलाल बैरवा जैसे जागरूक युवा ने पूरे प्रकरण की विडियोग्राफी की जिसके कारण दलित समुदाय के पास ठोस सबूत हैं कि किस तरह सार्वजनिक स्थान पर जातिवादी लोगों ने उनका अपमान किया है। दलित और बहुजन सगंठन मिलकर आने वाले समय में बद्रीलाल जैसे युवाओं का अभिनंदन करेगी ताकि ऐसे मामलों में बहुजन समाज अपने सम्मान और अधिकार के लिए आवाज़ उठाए।

FIR दर्ज होने के बाद मामले की जांच पुलिस के जिम्मे है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच, उपलब्ध वीडियो/ऑडियो रिकॉर्डिंग, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर होगी।

FIR दर्ज होने के बाद मामले की जांच पुलिस के जिम्मे है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच, उपलब्ध वीडियो/ऑडियो रिकॉर्डिंग, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर होगी।
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FIR दर्ज होने के बाद मामले की जांच पुलिस के जिम्मे है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच, उपलब्ध वीडियो/ऑडियो रिकॉर्डिंग, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर होगी।
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