“तुम्हें फेलोशिप जाति के कारण मिली…”: केरल की इस यूनिवर्सिटी में दलित शोध छात्रा का सम्मान के लिए एक साल से संघर्ष, नेहा बोरा साथ देंगी!

अनघा ने पर्यावरण विज्ञान विभाग के संकाय सदस्यों डॉ. अरुण बाबू और डॉ. जैनी वर्गीस पर जातिगत दुर्व्यवहार और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि उन्होंने अगस्त 2025 में विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार, रिसर्च डायरेक्टर, उच्च शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री और विश्वविद्यालय की SC/ST सेल को शिकायतें दी थीं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
पर्यावरण विज्ञान विभाग में शोधार्थी अनघा पिछले दो वर्षों के दौरान कथित जातिगत उत्पीडन की घटनाओं को लेकर कार्रवाई की मांग कर रही हैं। AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी अनघा के संघर्ष के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है।
पर्यावरण विज्ञान विभाग में शोधार्थी अनघा पिछले दो वर्षों के दौरान कथित जातिगत उत्पीडन की घटनाओं को लेकर कार्रवाई की मांग कर रही हैं। AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी अनघा के संघर्ष के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है।
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मलप्पुरम: केरल की थुंचथ एझुथाचन मलयालम यूनिवर्सिटी (Thunchath Ezhuthachan Malayalam University) में जातिगत भेदभाव, अकादमिक उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों को लेकर दलित शोधार्थी अनघा शशि बीते एक साल से संघर्ष कर रही हैं और अब उनके समर्थन में चल रहा आंदोलन तेज होता जा रहा है। छात्र और दलित संगठनों के गठबंधन द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन में अब और संगठनों के शामिल होने की संभावना है। प्रदर्शन आयोजकों के अनुसार, CJP भी जल्द आंदोलन में शामिल होगी।

कोलेनचेरी की रहने वाली अनघा विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग में शोधार्थी हैं। वह पिछले दो वर्षों के दौरान कथित तौर पर हुई घटनाओं को लेकर कार्रवाई की मांग कर रही हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि जिन शिक्षकों पर उन्होंने आरोप लगाए हैं, उनके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाए और आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए। अनघा का कहना है कि जब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

अनघा के समर्थन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), अंबेडकराइट डेमोक्रेटिक फ्रंट (ADF), केरल स्टूडेंट्स यूनियन (KSU), मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF), स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन (SIO), केरल दलित फेडरेशन (KDF) और फ्रेटरनिटी मूवमेंट समेत कई छात्र एवं दलित संगठनों ने एकजुटता जताई है।

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अनघा ने पर्यावरण विज्ञान विभाग के संकाय सदस्यों डॉ. अरुण बाबू और डॉ. जैनी वर्गीस पर जातिगत दुर्व्यवहार और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि उन्होंने अगस्त 2025 में विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार, रिसर्च डायरेक्टर, उच्च शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री और विश्वविद्यालय की SC/ST सेल को शिकायतें दी थीं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

शोधार्थी का आरोप है कि वर्ष 2024 में विश्वविद्यालय में शोध के लिए दाखिला लेने के बाद उन्हें उनके अकादमिक कार्य से संबंधित नहीं होने वाले कई काम सौंपे गए। इनमें प्रयोगशाला की सफाई, उपकरणों और सामग्री की धूल साफ करना तथा उन्हें व्यवस्थित करना शामिल था। उनका यह भी आरोप है कि उनसे MSc और MA की कक्षाओं की सफाई कराई गई और कक्षा में जाति आधारित अपमानजनक टिप्पणियां की गईं।

अनघा के अनुसार, उन्हें यह तक कहा गया कि उन्हें शोध फेलोशिप योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी जाति के कारण मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि दो वर्षों तक उनकी डॉक्टोरल कमेटी की बैठक नहीं बुलाई गई। शिकायतें उठाने के बाद उन्हें मानसिक रूप से अस्थिर साबित करने की कोशिश की गई और उनकी फेलोशिप कम करने की धमकी भी दी गई।

अनघा ने एक अन्य छात्र से जुड़े रैगिंग के मामले में भी विश्वविद्यालय प्रशासन पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, संबंधित छात्र SFI का नेता है और उसकी शिकायत पर विश्वविद्यालय ने अपेक्षित कार्रवाई नहीं की।

हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन पहले ही इन आरोपों पर अपना पक्ष रख चुका है। विश्वविद्यालय के अनुसार, उसकी SC/ST सेल ने जातिगत भेदभाव की शिकायत की जांच की थी और अपनी रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई सबूत नहीं पाया था। अनघा इस दावे को खारिज करते हुए कहतीं हैं कि जांच रिपोर्ट उन्हें कभी दिखाई ही नहीं गई और विश्वविद्यालय प्रशासन जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।

अब विश्वविद्यालय ने अनघा की शिकायत की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित करने की घोषणा की है। इसी बीच रविवार रात कुलपति, रजिस्ट्रार और विधायकों पीके नवाज़ तथा कुरुक्कोली मोईदीन के साथ हुई बैठक भी आंदोलन समाप्त कराने में सफल नहीं रही। अनघा और प्रदर्शनकारियों ने बैठक के बाद आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया।

अनघा ने बैठक को आंदोलन को शांत करने की कोशिश बताया। उनका आरोप है कि विधायक प्रदर्शनकारियों से सीधे बातचीत करने के लिए तैयार नहीं थे। उन्होंने कहा कि उनकी मांग केवल मौजूदा विवाद का समाधान नहीं, बल्कि ऐसा स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है जिससे भविष्य में किसी अन्य दलित छात्र को इस तरह के कथित भेदभाव और उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।

अनघा ने अपने परिवार को कथित तौर पर धमकाए जाने का भी आरोप लगाया है। उनका दावा है कि आरोपित शिक्षकों के समर्थक लोगों ने उनके माता-पिता से संपर्क किया और शिकायतें वापस लेने के लिए धमकाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के एक शिक्षक ने उनके गृह क्षेत्र में CPM के एरिया कमेटी सचिव से संपर्क कर उन पर शिकायतें वापस लेने का दबाव बनाने की कोशिश की।

सोमवार को आंदोलन और तेज हो गया जब फ्रेटरनिटी मूवमेंट ने आरोपित संकाय सदस्यों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर विश्वविद्यालय तक मार्च निकाला। विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के पास प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस ने लाठीचार्ज किया। घटना के सिलसिले में कुछ छात्रों को हिरासत में भी लिया गया।

प्रदर्शन परिषद के संयोजक और AISA के राज्य समन्वयक अरशद अजीज ने कहा कि जब तक आरोपित शिक्षकों के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आरोपितों को बचाने के लिए कथित तौर पर तैयार किए गए ‘जाली’ दस्तावेजों की भी जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी अनघा के संघर्ष के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है। नेहा बोरा हाल ही में CJP के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में भी सक्रिय रही थीं। वह इस सप्ताह मलप्पुरम पहुंचकर प्रदर्शन में शामिल हो सकती हैं। प्रदर्शन के आयोजकों का कहना है कि CJP भी जल्द आंदोलन का हिस्सा बनेगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच, अनघा के आरोपों और प्रदर्शनकारी संगठनों की मांगों के बीच अब यह मामला राज्य में दलित छात्रों के अधिकार, विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव के आरोप और संस्थागत जवाबदेही से जुड़े बड़े सवाल के रूप में सामने आया है।

पर्यावरण विज्ञान विभाग में शोधार्थी अनघा पिछले दो वर्षों के दौरान कथित जातिगत उत्पीडन की घटनाओं को लेकर कार्रवाई की मांग कर रही हैं। AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी अनघा के संघर्ष के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है।
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पर्यावरण विज्ञान विभाग में शोधार्थी अनघा पिछले दो वर्षों के दौरान कथित जातिगत उत्पीडन की घटनाओं को लेकर कार्रवाई की मांग कर रही हैं। AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी अनघा के संघर्ष के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है।
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