
भीलवाड़ा- भीलवाड़ा के भाकलिया गांव के सरकारी स्कूल में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान दलित समुदाय के सदस्यों को कथित तौर पर कुर्सी से उठाने, जातिसूचक गालियां देने और धमकाने के मामले में पुलिस ने नामजद पांच आरोपियों में से चार को गिरफ्तार कर लिया है। एक आरोपी नारायण जाट की गिरफ्तारी अभी बाकी है। मामला बागोर थाना में दर्ज FIR संख्या 131/2026 के तहत चल रहा है और जांच डिप्टी एसपी राहुल जोशी कर रहे हैं।
इस बीच, पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद गांव में उनका सामाजिक बहिष्कार कर उन्हें अलग-थलग किया जा रहा है। समुदाय का दावा है कि आरोपियों और उनके समर्थकों की ओर से पीड़ित परिवारों पर संभावित हमले का खतरा भी बना हुआ है। इसी को लेकर मंगलवार को डॉ. अंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी, जिला भीलवाड़ा के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध रैली निकाली और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पीड़ित परिवारों की सुरक्षा सहित आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की।
15 अगस्त को भाकलिया गांव के राजकीय विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान दो दलित समुदाय के सदस्यों रामेश्वरलाल बैरवा और गोपीलाल बैरवा के साथ कथित जातिगत दुर्व्यवहार का मामला सामने आया था।
पीड़ितों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने बालू वैष्णव, हीरालाल शर्मा, नारायण जाट और प्रकाश जाट समेत पांच लोगों को नामजद किया था। एक अन्य नामजद आरोपी नारायण की गिरफ्तारी अभी बाकी है।
समुदाय के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों को बुधवार शाम करीब 4 बजे अदालत में पेश किया जाना है। शेष आरोपी की गिरफ्तारी के लिए भी समुदाय पुलिस पर कार्रवाई तेज करने का दबाव बना रहा है। मामले की जांच कर रहे डिप्टी एसपी राहुल जोशी के नेतृत्व में पुलिस ने कार्रवाई आगे बढ़ाई है।
घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग करने वाले युवा बद्रीलाल बैरवा ने द मूकनायक को बताया कि पुलिस ने पीड़ितों के बयान दर्ज कर लिए हैं। पुलिस टीम घटनास्थल पर जाकर जांच भी कर चुकी है और उसके सहित दो गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं।घटना की मोबाइल पर रिकॉर्डिंग करने के डिजिटल साक्ष्य भी पुलिस को दिए गये हैं , बद्रीलाल के मुताबिक, समुदाय अब शेष आरोपी की गिरफ्तारी पर जोर दे रहा है।
इस मामले में द मूकनायक ने घटना की सबसे पहले रिपोर्ट 16 अगस्त को प्रकाशित की थी। रिपोर्ट सामने आने के बाद दलित और बहुजन समुदाय के लोगों की ओर से पीड़ित परिवारों को व्यापक समर्थन मिला।
बद्रीलाल बैरवा के अनुसार, खबर प्रकाशित होने के बाद रविवार शाम समुदाय की बैठक हुई। करीब दो घंटे चली बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि मामले को केवल गांव का आपसी विवाद मानकर छोड़ दिया जाए या कानूनी कार्रवाई की जाए।
बैठक में कुछ बुजुर्गों की राय थी कि गांव के स्तर पर ही विवाद को सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए। लेकिन समुदाय के अधिकांश सदस्यों ने कहा कि वर्षों से चले आ रहे कथित जातिगत अपमान और भेदभाव को देखते हुए इस बार चुप रहना उचित नहीं होगा। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का फैसला लिया गया और रविवार देर रात FIR दर्ज हुई।
FIR दर्ज होने और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। मंगलवार को डॉ. अंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी, जिला भीलवाड़ा के बैनर तले समुदाय ने विरोध रैली निकाली। रैली में बड़ी संख्या में समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मामले में सभी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी, पीड़ित परिवारों की सुरक्षा और कथित सामाजिक बहिष्कार को समाप्त कराने की मांग की।
ज्ञापन में पीड़ित परिवारों के सामाजिक बहिष्कार का आरोप लगाते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई। समुदाय ने आरोप लगाया कि घटना के बाद पीड़ित परिवारों को गांव में अलग-थलग किया जा रहा है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि आरोपियों और उनके समर्थकों की ओर से पीड़ित परिवारों पर संभावित जानलेवा हमले की आशंका है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें हैं:
FIR संख्या 131/2026 में नामजद सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जाए।
भाकलिया गांव में पीड़ित परिवारों को तत्काल उचित पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
पीड़ित परिवारों के कथित सामाजिक बहिष्कार को समाप्त कराने के लिए प्रशासन आवश्यक कदम उठाए।
मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
यदि आरोपियों के खिलाफ जल्द सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को सुरक्षा नहीं दी जाती है, तो समुदाय लोकतांत्रिक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि ऐसी स्थिति पैदा होने पर इसकी जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की होगी। डॉ. अंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी के जिलाध्यक्ष सोहनलाल रेगर ने कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ पीड़ित परिवारों की सुरक्षा भी प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
समुदाय का कहना है कि केवल FIR दर्ज करना और आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। गांव में पीड़ित परिवारों के साथ सामान्य सामाजिक व्यवहार सुनिश्चित करना और किसी भी तरह के दबाव या धमकी को रोकना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
15 अगस्त के कार्यक्रम में दो दलित सदस्यों के कुर्सी पर बैठने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सामाजिक बराबरी, सम्मान और सुरक्षा का सवाल बन गया है।
दलित समुदाय का आरोप है कि गांव में जातिगत ऊंच-नीच और छुआछूत की मानसिकता लंबे समय से मौजूद है। उनका कहना है कि यदि ऐसे मामलों में चुप्पी साध ली जाए तो भेदभाव की यह व्यवस्था बनी रहती है।
इस मामले में पुलिस जांच आगे बढ़ रही है। पीड़ितों और गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं तथा घटनास्थल का निरीक्षण भी किया गया है। उपलब्ध वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद मामले की वास्तविक परिस्थितियां और आरोपों की पुष्टि स्पष्ट होगी।
फिलहाल चार नामजद आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं, जबकि एक आरोपी की गिरफ्तारी बाकी है। वहीं, समुदाय की अगली प्राथमिकता पीड़ित परिवारों की सुरक्षा और कथित सामाजिक बहिष्कार को समाप्त कराना है।
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