साहिल वाकोडे केस: आठवले बोले- परिवार के खिलाफ सोशल मीडिया मुहिम असंवेदनशील; जांच एजेंसियों को अपना काम करने दें

परिवार का आरोप है कि पुलिस जांच गंभीरता से नहीं हो रही। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई या एसआईटी जांच, सेवानिवृत्त जज की निगरानी, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और गवाह संरक्षण की मांग की है।
साहिल के माता-पिता रविंद्र और सोनाली वाकोडे ने बीते दिनों रामदास आठवले से मुलाकात की.
साहिल के माता-पिता रविंद्र और सोनाली वाकोडे ने बीते दिनों रामदास आठवले से मुलाकात की.
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मुंबई-आईआईटी बॉम्बे के द्वितीय वर्ष बीटेक छात्र साहिल रविंद्र वाकोडे की 18 सितंबर को होस्टल रूम में संदिग्ध आत्महत्या के मामले में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री तथा आरपीआई अध्यक्ष रामदास आठवले ने परिवार के पक्ष में मजबूत रुख अपनाया है। उन्होंने शोकाकुल परिवार के खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रही मुहिम को गलत और असंवेदनशील करार दिया है तथा निष्पक्ष जांच की अपील की है।

आठवले ने अपने बयान में कहा कि साहिल के माता-पिता रविंद्र और सोनाली वाकोडे कुछ दिन पहले उनके निवास ‘संविधान निवास’ पर मिले थे। उन्होंने अपना जवान बेटा खोया है। इतने बड़े दुख के बावजूद उन्होंने किसी पर कोई फैसला नहीं सुनाया। वे पूरी तरह कानून के रास्ते से लड़ रहे हैं। उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है और स्वतंत्र सीबीआई/एसआईटी जांच के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उनकी केवल एक ही मांग है कि सच्चाई सामने आए।

आठवले ने आगे कहा, “दुर्भाग्य से कुछ लोग इस मामले को गलत ढंग से पेश कर रहे हैं और जांच पूरी होने से पहले ही सोशल मीडिया पर खुद फैसला सुना रहे हैं। जिन माता-पिता ने अपना बेटा खोया है, वे अपने बच्चे को सबसे बेहतर जानते हैं। इसीलिए वे सच्चाई के लिए लड़ रहे हैं। एक शोकाकुल परिवार के खिलाफ सोशल मीडिया पर मुहिम चलाना गलत है और असंवेदनशील भी है। सोशल मीडिया पर चुनिंदा वीडियो से ट्रायल न हो, सच्चाई निष्पक्ष जांच से सामने आए।”

उन्होंने अत्याचार निवारण कानून (एससी/एसटी एक्ट) को दलित-आदिवासी समाज की सुरक्षा की ढाल बताया और कहा कि जहां शिकायत झूठी साबित हो, वहां कानून अपना काम करे, लेकिन एक घटना के बहाने पूरे कानून पर सवाल उठाना पीड़ितों के साथ अन्याय है। आठवले ने सभी से आग्रह किया कि जांच एजेंसियों और न्यायालय को अपना काम करने दें। उन्होंने न्यायपालिका पर पूरा विश्वास जताया और कहा कि वे तथा आरपीआई साहिल के माता-पिता के साथ मजबूती से खड़े हैं। न्याय मिलने तक यह लड़ाई जारी रहेगी।

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साहिल वाकोडे यवतमाल के रहने वाले थे और आईआईटी बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में द्वितीय वर्ष के छात्र थे। 18 सितंबर को मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान उन्हें मोबाइल फोन के साथ पकड़े जाने का आरोप लगा। संस्थान के शुरुआती बयान के अनुसार उन्होंने प्रश्नपत्र को चैट जीपीटी पर अपलोड कर जवाब मांगे थे। परीक्षा के कुछ घंटों बाद शाम को उन्हें होस्टल रूम में फांसी लगाकर मृत अवस्था में पाया गया। कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।

परिवार का आरोप है कि साहिल को जातीय आधार पर अपमान और मानसिक यातना झेलनी पड़ी। पिता रविंद्र वाकोडे ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला (जो उस परीक्षा के इनविजिलेटर भी थे) पिछले करीब तीन महीनों से जातिवादी टिप्पणियां करते रहे और निदेशक शिरीष केदारे के निर्देश पर उन्हें परेशान किया गया। परिवार का कहना है कि परीक्षा हॉल से बाहर निकालकर उन्हें डांटा-फटकारा गया और नियमों के मुताबिक नया आंसरशीट न देकर उन्हें परीक्षा जारी रखने से रोका गया। साहिल ने लिखित माफी भी मांगी थी और दोबारा मौका मांगा था।

पवई पुलिस थाने में 19 सितंबर को रविंद्र वाकोडे की शिकायत पर आत्महत्या के लिए उकसाने (अब भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धारा) और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई। प्रोफेसर डूल्ला समेत अन्य अधिकारियों का नाम लिया गया। जांच मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच को सौंपी गई। एसीपी रैंक के अधिकारी जांच कर रहे हैं।

क्राइम ब्रांच ने अब तक परिवार, छात्र, होस्टल स्टाफ, फैकल्टी सहित 40 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए हैं। साहिल के मोबाइल, लैपटॉप आदि फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए। सीसीटीवी फुटेज की जांच चल रही है, जिसमें परीक्षा हॉल से निकलने के बाद उनके होस्टल तक के मूवमेंट को रिकॉर्ड किया जा रहा है। प्रोफेसर डूल्ला को प्रशासनिक डीन पद से हटाया गया और छुट्टी पर भेजा गया। संस्थान ने 10 सदस्यीय आंतरिक समिति भी गठित की।

परिवार का आरोप है कि पुलिस जांच गंभीरता से नहीं हो रही। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई या एसआईटी जांच, सेवानिवृत्त जज की निगरानी, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और गवाह संरक्षण की मांग की है। विशेष अत्याचार न्यायालय में भी आवेदन दिया गया है। आईआईटी बॉम्बे परिसर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। परिवार ने आजाद मैदान पर भूख हड़ताल भी की। कई संगठनों ने न्याय की मांग की। सोशल मीडिया पर चुनिंदा वीडियो और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चल रहा है, जिसकी आलोचना करते हुए आठवले ने कहा कि ट्रायल सोशल मीडिया पर नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच से होना चाहिए।

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