
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर जून माह में सीजेपी प्रदर्शन के दौरान चाइल्ड एक्टिविस्ट और कंटेट क्रिएटर निशु आजाद के पिता संजय कुमार पर हमले के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज ने सोमवार को दिल्ली की अदालत में जमानत अर्जी की सुनवाई के दौरान कहा कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें राजनीतिक कारणों से गिरफ्तार किया। भारद्वाज ने कहा कि उसने हमला नहीं किया बल्कि शिकायतकर्ता ने उसपर हमला किया था और उसने अपना बचाव किया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललर के सामने इन-कैमरा सुनवाई हुई।
अधिवक्ता उमेश शर्मा ने कहा कि शिकायतकर्ता के हमले का वीडियो है, जिसमें भारद्वाज गिरते दिखते हैं, लेकिन पुलिस उस वीडियो पर कार्रवाई नहीं कर रही, “पुलिस को वो वीडियो नजर नहीं आ रहा।” शर्मा ने बताया कि 27 जून को पूछताछ का नोटिस मिला, 29 जून को वे पेश हुए और छोड़ दिए गए; राजनीतिक घटनाक्रम के बाद 4 सितंबर को गिरफ्तारी हुई और उसके बाद POCSO की नई FIR दर्ज हुई।
शिकायतकर्ता पक्ष की अधिवक्ता स्वाति खन्ना ने कहा कि भारद्वाज ने निशु को जातिवादी गालियाँ दीं और एक पॉडकास्ट वीडियो में हमले की बात खुद मानी। गौरतलब है कि पॉडकास्ट वायरल होने के बाद निशु ने राहुल गांधी और भीम आर्मी चीफ से मदद की गुहार लगाई। इसके बाद सीजेपी, यूथ कांग्रेस और चन्द्रशेखर आज़ाद निशु के समर्थन में आये और दिल्ली पुलिस से मिले, कारवाई का दबाव बढ़ने के बाद मामले में SC/ST एक्ट जोड़ा गया।
खन्ना ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज हो चुकी है। दिल्ली पुलिस ने अदालत से कहा कि पहली शिकायत में जातिवादी गाली का जिक्र नहीं था, बाद के बयान में आया इसलिए SC/ST एक्ट जोड़ा गया। तर्क सुनकर अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया। भारद्वाज फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
गिरफ्तारी इस क्रम में हुई: जून में जंतर-मंतर वाली मारपीट पर संसद मार्ग थाने में पहले भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2) और 126(2) में मामला दर्ज हुआ, पुलिस ने नोटिस देकर पूछताछ की और छोड़ दिया; पॉडकास्ट में भारद्वाज के हमले वाले दावे वायरल होने, निशु परिवार व सीजेपी के संसद मार्ग थाने पर धरने और SC/ST व POCSO धाराएँ जुड़ने के बाद 4 सितंबर को दिल्ली पुलिस ने उन्हें उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया।
आपको बता दें, सोशल मीडिया पर हिंदुत्ववादी और विवादित बयानों के लिए पहचाने जाने वाले स्वतंत्र भारद्वाज ने नेहा सिंह राठौर के कार्यक्रम ‘द कैजुअल टॉक्स’ में मुस्लिम समुदाय को लेकर अपनी नफरत, भारत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र, पाकिस्तान और विभाजन, किसान आंदोलन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा से अपने संबंध, आरक्षण सुधार मोर्चा और अपने खिलाफ लगे मारपीट के आरोपों पर विस्तार से बात की थी।
कार्यक्रम में नेहा सिंह राठौर ने उससे दलित कंटेंट क्रिएटर निशु आज़ाद द्वारा लगाए गए आरोप के बारे में पूछा कि उन्होंने उसके पिता के साथ मारपीट की थी। जवाब में भारद्वाज ने खुद कहा कि उसने लड़की के पिता को मारा था। मारपीट की बात स्वीकार करते हुए भारद्वाज ने कहा, " हम जेल भी नहीं गये, रातभर घूम रहे थे।" जानलेवा हमले जैसे गंभीर अपराध के बावजूद बचने के पीछे की वजह भारद्वाज ने कथित रूप से दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा को दी एवं चिराग पासवान और प्रधानमंत्री मोदी का भी सपोर्ट होने का दावा किया। इस पॉडकास्ट के वायरल होने के बाद चिराग पासवान अपने नाम के दुरुपयोग पर अलग शिकायत पहले ही दर्ज करा चुके हैं।
उसने बताया कि विवाद की शुरुआत तब हुई जब उस व्यक्ति की तरफ कैमरा उनकी ओर किया गया। उसके अनुसार कैमरा नीचे करने को कहा और इसके बाद धक्का-मुक्की हुई।
भारद्वाज ने दावा किया कि इस दौरान उसका पैर डस्टबिन से फिसल गया और बाद में उन्हें पता चला कि जिस व्यक्ति को उसने मारा था, वह उसी लड़की का पिता था। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उसे पहले पता होता कि वह लड़की का पिता है तो वे उसे नहीं मारते। बातचीत के इसी हिस्से में भारद्वाज ने लड़की और अन्य लोगों को लेकर ऐसे बयान दिए जिनमें उन्होंने भविष्य में हिंसा की संभावना की बात कही। उन्होंने कहा कि संबंधित लोग उनके “टारगेट” पर हैं और “मौके” की तलाश की बात कही।
दूसरी तरफ, स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के अगले दिन निशु आज़ाद ने आरोप लगाया कि अज्ञात लोगों ने उनके घर पर पथराव किया। उन्होंने क्लिप सोशल मीडिया पर साझा की और कहा कि “मैं पुलिस अधिकारियों से सम्मानपूर्वक अनुरोध करता हूँ कि वे मुझे ज़रूरी सुरक्षा प्रदान करें, क्योंकि मुझे अपनी सुरक्षा को लेकर वास्तविक चिंता है।” घटना के बाद निशु आज़ाद और उसके परिवार पर सोसायटी वालों का भी घर खाली करने को लेकर दबाव बनाया गया और निशु ने यह भी बताया कि उसका बैंक खाता भी फ्रीज़ किया गया है।
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