14 साल की दलित कंटेंट क्रिएटर का बैंक खाता फ्रीज: निशु ने कहा- ‘फोन पर गालियां और धमकियां मिलती हैं, आमने-सामने क्या होगा?’

एक पोस्ट में निशु ने स्वतंत्र भारद्वाज के पिता की नौकरी का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उनके पिता बिहार के निगरानी विभाग में दरोगा के पद पर तैनात हैं। निशु ने सवाल उठाया कि क्या इसी वजह से स्वतंत्र भारद्वाज को लंबे समय तक कानून का डर नहीं रहा।
निशु कहती हैं, "जब ये लोग फोन पर मैसेज करके मेरे साथ इस तरह की अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर सकते हैं, तो अगर मेरा इन लोगों से आमना सामना हो जाए, तो मेरी सुरक्षा को लेकर मुझे कितना डर और चिंता हो सकती है।"
निशु कहती हैं, "जब ये लोग फोन पर मैसेज करके मेरे साथ इस तरह की अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर सकते हैं, तो अगर मेरा इन लोगों से आमना सामना हो जाए, तो मेरी सुरक्षा को लेकर मुझे कितना डर और चिंता हो सकती है।"
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गाजियाबाद- 14 वर्षीय दलित कंटेंट क्रिएटर निशु आजाद और उनके परिवार पर कथित ऑनलाइन धमकियों और सामाजिक दबाव का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब निशु के पिता संजय कुमार ने आरोप लगाया है कि उनके और परिवार के अन्य सदस्यों के मोबाइल नंबरों पर लगातार अश्लील गालियां, अभद्र भाषा और धमकी भरे संदेश भेजे जा रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी नाबालिग बेटी और परिवार के अन्य सदस्यों को भी निशाना बनाया जा रहा है।

परिवार का आरोप है कि मामला केवल सोशल मीडिया ट्रोलिंग तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, धमकियों के साथ-साथ परिवार पर आर्थिक दबाव बनाने की भी कोशिश की गई है। निशु ने दावा किया है कि उनके पिता के बैंक खाते की जांच की मांग करने वाले कुछ लोगों ने बाद में साइबर क्राइम में शिकायत की, जिसके बाद वह SBI खाता फ्रीज हो गया, जिसमें लोग परिवार की आर्थिक मदद के लिए राशि भेज रहे थे।

द मूकनायक से बातचीत और सोशल मीडिया पर किए गए अपने पोस्ट में परिवार ने इन घटनाओं को एक साथ जोड़ते हुए सवाल उठाया है कि क्या ऑनलाइन धमकी, आर्थिक दबाव और उनके घर को लेकर विवाद अब एक बड़े उत्पीड़न का रूप ले चुका है।

‘मेरे और पूरे परिवार के नंबरों पर लगातार धमकियां’

निशु के पिता संजय कुमार ने अपने एक बयान में कहा कि परिवार के मोबाइल नंबरों पर लगातार अश्लील और धमकी भरे संदेश भेजे जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी नाबालिग बेटी के साथ-साथ परिवार के दूसरे सदस्यों को भी निशाना बनाया जा रहा है। संजय कुमार के अनुसार, उनके पास कथित धमकियों से संबंधित मोबाइल नंबरों, संदेशों, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के स्क्रीनशॉट सुरक्षित हैं।

उन्होंने दिल्ली पुलिस से मामले का तत्काल संज्ञान लेने, संबंधित लोगों की पहचान करने और कानून के तहत कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

परिवार का कहना है कि इन संदेशों की प्रकृति ऐसी है कि इसे महज सोशल मीडिया विवाद या ऑनलाइन बहस मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

निशु का कहना है कि उन्हें लगातार गालियां और धमकियां मिल रही हैं, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग उनके आरोपों को झूठा बता रहे हैं।

द मूकनायक से बातचीत में निशु ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति फोन और मैसेज के जरिए उनके साथ इतनी अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर सकता है, तो ऐसी स्थिति में आमने-सामने आने पर उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है।

उनका कहना है कि उन्हें सबसे ज्यादा चिंता अपने छोटे भाई-बहनों और परिवार की सुरक्षा की है।निशु पहले भी कह चुकी हैं कि वह खुद धमकियों से डरने वाली नहीं हैं, लेकिन अपने परिवार को लेकर लगातार चिंतित रहती हैं।

'SBI खाता फ्रीज करवा दिया गया’

निशु ने अब अपने परिवार पर कथित आर्थिक दबाव का भी आरोप लगाया है।

उनके अनुसार, कुछ लोग लगातार उनके पिता के बैंक खाते की जांच की मांग कर रहे थे। इसके बाद, निशु का दावा है कि उन्हीं में से कुछ लोगों ने साइबर क्राइम में शिकायत की और शिकायत के बाद उसका वही SBI खाता फ्रीज हो गया, जिसमें लोग परिवार की आर्थिक सहायता के लिए पैसे भेज रहे थे।

निशु ने इसे परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान करने की कोशिश बताया।

हालांकि, बैंक खाते को किस शिकायत या किस कानूनी प्रक्रिया के तहत फ्रीज किया गया, इस संबंध में संबंधित बैंक अथवा साइबर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक दस्तावेज या स्पष्टीकरण इस रिपोर्ट के समय उपलब्ध नहीं है।

निशु ने अपने घर पर कथित पथराव के आरोप को लेकर भी एक बार फिर पुलिस और सोसाइटी प्रबंधन से CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की है।

उनका कहना है कि पिछले कुछ दिनों में उनके घर के ऊपर कंकड़-पत्थर फेंके गए थे। उन्होंने दावा किया कि इसकी सूचना उन्होंने 112 पर कॉल करके दी और शालीमार गार्डन थाने में लिखित शिकायत भी दी।

निशु के मुताबिक, अगले दिन पुलिस टीम उनके घर पहुंची और सोसाइटी में लगे CCTV कैमरों की फुटेज की जांच की।

लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने परिवार को वह फुटेज नहीं दिखाई और न ही सोसाइटी के लोगों के सामने यह स्पष्ट किया कि कैमरों में क्या रिकॉर्ड हुआ।

निशु का कहना है कि इसी वजह से कुछ लोग उन पर पथराव का झूठा आरोप लगाने और पूरी घटना को “चाल” के तौर पर पेश करने का आरोप लगा रहे हैं। उनका सवाल है: अगर यह वास्तव में परिवार की बनाई हुई कोई कहानी थी, तो CCTV फुटेज की दोबारा जांच क्यों नहीं की जाती?

निशु कहती हैं, "जब ये लोग फोन पर मैसेज करके मेरे साथ इस तरह की अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर सकते हैं, तो अगर मेरा इन लोगों से आमना सामना हो जाए, तो मेरी सुरक्षा को लेकर मुझे कितना डर और चिंता हो सकती है।"
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स्वतंत्र भारद्वाज के पिता को लेकर भी निशु ने उठाए सवाल

एक पोस्ट में निशु ने स्वतंत्र भारद्वाज के पिता की नौकरी का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उनके पिता बिहार के निगरानी विभाग में दरोगा के पद पर तैनात हैं।

निशु ने सवाल उठाया कि क्या इसी वजह से स्वतंत्र भारद्वाज को लंबे समय तक कानून का डर नहीं रहा। उसने आरोप लगाया कि शायद उन्हें यह भरोसा था कि उनके पिता की सरकारी सेवा और प्रभाव के कारण वह मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकल जाएंगे।

निशु ने यह भी कहा, " पिछले 2–3 दिनों से हमारी सोसायटी के अंदर मीडिया आ रही है और कुछ निवासी इंटरव्यू के दौरान मेरे घर और फ्लोर की जानकारी साझा कर रहे हैं। इसके बाद मीडिया मेरे घर के सामने कैमरे लगा रही है। इस लगातार मीडिया कवरेज और निवासियों के रवैये के कारण मैं अपनी ही सोसायटी में सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हूँ। हैरानी की बात है कि अब न किसी को कोई समस्या है, न ही उनके बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई चिंता।"

निशु के परिवार का कहना है कि घटनाओं की कड़ी अब केवल जंतर-मंतर पर संजय कुमार पर हुए कथित हमले तक सीमित नहीं रही।

परिवार के अनुसार, इसके बाद ऑनलाइन धमकियां आईं, नाबालिग निशु को रेप थ्रेट मिले, घर पर कथित पथराव हुआ, बैंक खाते के फ्रीज होने की स्थिति पैदा हुई और अब किराये के घर से निकलने का दबाव बनाया जा रहा है।

दूसरी ओर, सोसाइटी के निवासी पथराव के आरोप को खारिज कर रहे हैं और निशु के सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर अपनी आपत्ति जता रहे हैं। इस पूरे विवाद में अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ डिजिटल उत्पीड़न, आर्थिक दबाव, आवासीय असुरक्षा और एक नाबालिग लड़की की सुरक्षा के सवाल भी जुड़ गए हैं।

निशु कहती हैं, "जब ये लोग फोन पर मैसेज करके मेरे साथ इस तरह की अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर सकते हैं, तो अगर मेरा इन लोगों से आमना सामना हो जाए, तो मेरी सुरक्षा को लेकर मुझे कितना डर और चिंता हो सकती है।"
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निशु कहती हैं, "जब ये लोग फोन पर मैसेज करके मेरे साथ इस तरह की अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर सकते हैं, तो अगर मेरा इन लोगों से आमना सामना हो जाए, तो मेरी सुरक्षा को लेकर मुझे कितना डर और चिंता हो सकती है।"
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निशु कहती हैं, "जब ये लोग फोन पर मैसेज करके मेरे साथ इस तरह की अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर सकते हैं, तो अगर मेरा इन लोगों से आमना सामना हो जाए, तो मेरी सुरक्षा को लेकर मुझे कितना डर और चिंता हो सकती है।"
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निशु कहती हैं, "जब ये लोग फोन पर मैसेज करके मेरे साथ इस तरह की अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर सकते हैं, तो अगर मेरा इन लोगों से आमना सामना हो जाए, तो मेरी सुरक्षा को लेकर मुझे कितना डर और चिंता हो सकती है।"
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