‘गिरफ्तारी कब होगी?’ पॉडकास्ट वायरल होने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज पर कार्रवाई की मांग तेज, निशु के समर्थन में उतरा विपक्ष | मुस्लिम महिलाओं की AI तस्वीरों पर भी सवाल

निशु और उसके पिता के लिए न्याय मांगने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के सदस्य शुक्रवार सुबह 10 बजे पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुँचेंगे
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग तेज, दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर खड़े हो रहे सवाल।
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग तेज, दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर खड़े हो रहे सवाल।एआई चित्र
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नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान एक 14-वर्षीया दलित कंटेंट क्रिएटर निशु आजाद के पिता संजय कुमार पर कथित हमले को लेकर हिंदुत्ववादी कार्यकर्ता स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वीडियो वायरल होने के बाद मामला अब राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में आ गया है। ‘द कैजुअल टॉक्स’ के पॉडकास्ट वीडियो में भारद्वाज ने संजय कुमार पर हमला करने का दावा करते हुए घटना को लेकर कई बातें कहीं। भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस और भाजपा के बड़े नेताओं तक अपनी पहुंच होने का दम भरते हुए कहा कि जानलेवा हमला करने पर हाफ मर्डर का चार्ज लगना चाहिए लेकिन मैं आराम से घूम रहा था, जेल भी नहीं गया।

इसके बाद निशु आजाद ने सार्वजनिक रूप से विपक्षी नेताओं से मदद की अपील की। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने निशु को समर्थन देने का ऐलान किया, जबकि नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने भी उनके पक्ष में आवाज उठाई। सोशल मीडिया पर छात्र संगठनों, आंदोलन से जुड़े लोगों, कार्यकर्ताओं और अन्य राजनीतिक हस्तियों ने भी मामले में कार्रवाई की मांग की है।

इसी बीच, तथ्य-जांचकर्ता और ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने स्वतंत्र भारद्वाज के सोशल मीडिया पोस्टों को लेकर एक अलग गंभीर सवाल उठाया है। जुबैर ने आरोप लगाया कि भारद्वाज ने मुस्लिम महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक सामग्री के साथ कथित रूप से एआई से तैयार तस्वीरों का इस्तेमाल किया और राष्ट्रीय महिला आयोग तथा दिल्ली पुलिस से इस पर संज्ञान लेने की मांग की।

इधर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स असोसिएशन (आइसा) ने दिल्ली पुलिस की प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, " दिल्ली पुलिस खुद एक अपराधी गिरोह बन गई है! यह अपराधियों को बचाती है और नागरिकों पर हमला करती है। स्वतंत्र भारद्वाज कैमरे पर अपने अपराध का दिखावा करते हैं, फिर भी पुलिस मामले को रफा-दफा कर देती है।" सीपीआई (एम) ने भी प्रकरण में आरोपी के विरुद्ध कड़ी कारवाई की मांग की। पार्टी के हैंडल से किये पोस्ट में कहा गया, " यही वह शख्स है जिसने एक दलित व्यक्ति की हत्या का प्रयास किया, और दावा कर रहा है कि पुलिस हिरासत में रहते हुए दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा को फोन लगाकर अपनी रिहाई और धारा 307 न लगाने के लिए दबाव बनवाया। यह पुलिस जांच में सीधा और गैरकानूनी हस्तक्षेप है। और दूसरी तरफ, जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को नियम-कायदे सिखाए गए, पीटा गया, केस दर्ज करने की धमकियां दी गईं, और एफआईआर तक दर्ज हुई। सवाल यह है — एक संभावित हत्यारे को बचाने वाले कपिल मिश्रा इस्तीफा क्यों नहीं देते? अपराध में मददगार होने के नाते उन्हें भी सह-आरोपी क्यों न बनाया जाए?"

कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े सौरव दास ने भी मामले में कार्रवाई की मांग तेज कर दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि वह अन्य सीजेपी सदस्यों के साथ संसद मार्ग पुलिस थाने जाएंगे और संजय कुमार तथा निशु आजाद के मामले में न्याय की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि संगठन ने शुरुआत से किसी छात्र या प्रदर्शनकारी को अकेले नहीं छोड़ा है।

वीडियो वायरल होने के बाद निशु आजाद ने सोशल मीडिया पर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि वीडियो सामने आने के बाद उन्हें और उनके परिवार को अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता है, लेकिन वह डरने वाली नहीं हैं और अन्याय तथा जातिवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगी। उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए विपक्षी नेताओं से न्याय दिलाने की अपील की।

निशु ने विशेष तौर पर राहुल गांधी को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अब नेता प्रतिपक्ष से उम्मीद है कि वह उन्हें न्याय दिलाएंगे और वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगी।

इसके बाद राहुल गांधी ने निशु के समर्थन में सार्वजनिक बयान दिया। राहुल गांधी ने कहा कि निशु को घबराने की जरूरत नहीं है और वह उनके साथ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निशु को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह अपने समुदाय और छात्रों के अधिकारों की आवाज उठाती हैं। राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी सवाल उठाए और पूछा कि क्या अब कार्रवाई होगी या आरोपी को संरक्षण मिलता रहेगा। उन्होंने अपने संदेश के अंत में कहा कि निशु की लड़ाई अकेली नहीं है और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।

कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम ने भी निशु का सपोर्ट करते हुए कहा, "निशु , आप बिल्कुल घबराइए मत। राहुल गांधी और पूरा समाज आपके साथ मजबूती से खड़ा है। ऐसे नफरती और देशद्रोहियों को सजा जरूर मिलेगी..!"

नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी निशु और उनके पिता के मामले में आवाज उठाई। निशु ने चंद्रशेखर आजाद के समर्थन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें पता था कि उनके नेता और बड़े भाई उनके लिए आवाज उठाएंगे और उनके समर्थन के बाद वह और मजबूत हुई हैं।

चंद्रशेखर आजाद ने अपने संदेश में 23 जून की जंतर-मंतर घटना को लेकर पुलिस के रिकॉर्ड और स्वतंत्र भारद्वाज के पॉडकास्ट में किए गए दावों के बीच अंतर पर सवाल उठाया। इस विवाद का केंद्र यही है कि एक तरफ वायरल पॉडकास्ट में भारद्वाज घटना को गंभीर तरीके से बताते सुनाई देते हैं, जबकि दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में चोट की प्रकृति को अलग बताया है।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लोगों से वीडियो देखने की अपील करते हुए सरकार और कथित राजनीतिक संरक्षण को लेकर सवाल उठाया। केजरीवाल ने पूछा कि क्या देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने ऐसी व्यवस्था के लिए बलिदान दिया था जिसमें खुले तौर पर हिंसा की बात करने वालों को संरक्षण मिलता हो।

वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने भी निशु आजाद का संदेश साझा किया। सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर बहस का एक बड़ा हिस्सा पुलिस के आधिकारिक बयान और वायरल पॉडकास्ट के बीच दिखाई देने वाले अंतर पर केंद्रित है। कुछ लोगों ने पुलिस से मेडिकल रिपोर्ट और जांच से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है, जबकि पुलिस ने कहा है कि वह जांच पूरी कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल करेगी।

जन समर्थन मिलने के बाद निशु ने एक और विडियो पोस्ट किया जिसमें निशु ने अन्याय और जातिवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कही।

सौरव दास ने बताया दिल्ली पुलिस का क्या था रुख

पॉडकास्ट वायरल होने के बाद सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि जंतर-मंतर पर उनके विरोध प्रदर्शन के दौरान निशु के पिता संजय पर स्वतंत्र भारद्वाज के हमले के बाद असल में क्या हुआ। सौरव ने बताया कि संजय का सिर फट गया था। घाव इतना गहरा था कि FIR में 'हत्या की कोशिश' (IPC की धारा 307) का आरोप लगाया जाना ज़रूरी था। पुलिस ने यह धारा जोड़ने से इनकार कर दिया। इस धारा के तहत तुरंत गिरफ़्तारी हो सकती थी क्योंकि यह एक संज्ञेय (cognizable) और गैर-ज़मानती अपराध है। इस गिरफ़्तारी से बचने के लिए, पुलिस ने साफ़ तौर पर यह धारा जोड़ने से मना कर दिया। सौरव बताते हैं, " हमने कहा कि कम से कम 'गंभीर चोट' (धारा 326) वाली धारा तो जोड़ी जाए, जिससे भी तुरंत गिरफ़्तारी हो सकती थी। लेकिन DCP सचिन शर्मा और ACP अजय शर्मा ने साफ़ इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने हमारे मुँह पर कहा कि "जाओ कोर्ट से आदेश ले आओ"! हमें अभी तक मेडिकल एक्सपर्ट की राय नहीं मिली है। भारद्वाज के साथ शामिल गिरोह के अन्य सदस्यों की भी अभी तक पहचान नहीं हो पाई है, जबकि उनमें से कई ने हमले के तुरंत बाद रील्स बनाईं और संजय की नाबालिग बेटी निशु को खुलेआम धमकी दी।अब भारद्वाज खुलेआम डींगें मार रहा है कि दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा पुलिस पर दबाव डाल रहे हैं ताकि उसे पुलिस स्टेशन से छोड़ा जा सके और कोई ऐसी सख़्त धारा न लगाई जाए जिससे उसकी गिरफ़्तारी हो सके!

दिल्ली पुलिस का क्या कहना है?

वायरल वीडियो के बाद दिल्ली पुलिस ने भी अपना पक्ष सार्वजनिक किया। डीसीपी नई दिल्ली के आधिकारिक एक्स खाते से जारी बयान के अनुसार, 23 जून को जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन के दौरान गाजियाबाद निवासी संजय कुमार, उम्र 38 वर्ष, को झगड़े के दौरान एक व्यक्ति द्वारा पहने गए कड़े से सिर में चोट लगी थी।

पुलिस ने कहा कि संजय कुमार का आरएमएल अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और चिकित्सकों ने चोटों को सामान्य प्रकृति का बताया। पुलिस के अनुसार, चोट कड़े से लगी थी और उसे हथियार से लगी चोट नहीं माना गया। पुलिस ने यह भी कहा कि खोपड़ी में दरार होने की बात चिकित्सकीय रिपोर्ट में नहीं है और इसे गलत सूचना बताया।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक संजय कुमार के बयान पर संसद मार्ग थाने में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने कहा कि घटनास्थल से कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया था और जांच के दौरान सूरज कुमार और स्वतंत्र भारद्वाज को नोटिस देकर पूछताछ की गई। पुलिस का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा चुकी है और सक्षम अदालत के समक्ष आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। पुलिस ने मामले में किसी तरह के राजनीतिक हस्तक्षेप या अनुचित प्रभाव के आरोप को भी तथ्यहीन बताया है।

यानी इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग दावे सामने हैं। निशु के परिवार और आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि हमला गंभीर था और पुलिस ने कठोर धाराओं में कार्रवाई नहीं की, जबकि दिल्ली पुलिस का आधिकारिक पक्ष है कि मेडिकल रिपोर्ट में चोट सामान्य प्रकृति की पाई गई और मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई की जा रही है।

मोहम्मद जुबैर ने उठाया मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरों का मुद्दा

इसी विवाद के बीच फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर ने स्वतंत्र भारद्वाज के सोशल मीडिया पोस्टों को लेकर एक अलग मुद्दा सामने रखा। जुबैर ने कुछ पोस्टों को साझा करते हुए आरोप लगाया कि इनमें एआई से तैयार तस्वीरों का इस्तेमाल मुस्लिम महिलाओं को यौन रूप से प्रस्तुत करने और अपमानित करने के लिए किया गया है।

जुबैर ने राष्ट्रीय महिला आयोग और उसकी अध्यक्ष विजया राहतकर को टैग करते हुए सवाल उठाया कि क्या आयोग इन पोस्टों का स्वतः संज्ञान लेगा। उन्होंने पूछा कि क्या किसी समुदाय की महिलाओं को निशाना बनाने वाली ऐसी सामग्री पर आयोग और पुलिस को कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।

जुबैर की पोस्ट में यह भी सवाल उठाया गया कि क्या इस तरह का आचरण तभी कार्रवाई के योग्य माना जाएगा जब निशाना बनाई गई महिलाओं से जुड़ा मामला किसी खास राजनीतिक विमर्श में फिट बैठता हो। यह टिप्पणी उन्होंने भारद्वाज के कथित सोशल मीडिया पोस्टों के संदर्भ में की। उपलब्ध सोशल मीडिया सामग्री में जुबैर ने दिल्ली पुलिस से भी कार्रवाई की मांग की है।

आपको बता दें विवादित पॉडकास्ट की चर्चा केवल संजय कुमार पर कथित हमले तक सीमित नहीं रही। वायरल बातचीत के अन्य हिस्सों को लेकर भी सोशल मीडिया पर आलोचना हुई है। भारद्वाज पर मुस्लिम महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक और अशोभनीय टिप्पणी करने के आरोप लगाए गए हैं।

सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री में वह मुस्लिम महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए दिखाई-सुनाई देते हैं। बातचीत के एक हिस्से में वह दावा करते हैं कि जब वह कुछ इलाकों में जाते हैं तो मुस्लिम महिलाएं उनके पीछे आती हैं।

इस पूरे विवाद में अब दो अलग-अलग मुद्दे समानांतर रूप से सामने आ गए हैं। पहला मुद्दा 23 जून को जंतर-मंतर पर संजय कुमार को लगी चोट और उस मामले में पुलिस की कार्रवाई का है। दूसरा मुद्दा स्वतंत्र भारद्वाज के सोशल मीडिया और पॉडकास्ट में कथित रूप से की गई सामुदायिक तथा महिलाओं से संबंधित आपत्तिजनक टिप्पणियों का है।

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