
भागलपुर- विशेष केंद्रीयकारा भागलपुर में बंद दो अलग-अलग कैदियों के परिवारों ने 16 अगस्त को जिला अधिकारी के समक्ष गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। दोनों परिवारों का आरोप है कि जेल प्रशासन उनके परिजनों के साथ मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न कर रहा है। कैदियों को लंबे समय से सेल (एकांत कारावास) में रखा गया है, मुलाकात और फोन की सुविधा बंद कर दी गई है। एक कैदी कई दिनों से अनशन पर हैं। परिवारों का कहना है कि दोनों कैदियों ने जेल में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ पत्राचार किया था, जिसके बाद ही उनके साथ दुर्व्यवहार शुरू हुआ। दोनों परिवारों ने निष्पक्ष जाँच, सुरक्षा सुनिश्चित करने और मुलाकात की अनुमति देने की माँग की है।
बेगूसराय जिले के पाली निवासी सौम्या ने अपने पति ऋषिकेश कुमार बिहारी पासवान उर्फ राकेश के संबंध में शिकायत दी है। सौम्या ने लिखा है कि उनके पति को ग्रामीण राजनीति और जमीनी विवाद के कारण अनेक मुकदमों में फँसाया गया। विपक्षी पक्ष प्रभावशाली होने के कारण उन्हें खगड़िया जेल से भागलपुर केंद्रीय कारा में स्थानांतरित किया गया।
राकेश ने भी जेल में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ पत्नी के माध्यम से कई बार पत्राचार किया था। परिवार का आरोप है कि इसी कारण उन्हें लगभग 15 दिनों से सेल में रखा गया है। उनकी तबीयत खराब चल रही थी। सौम्या दवा लेकर जाती थीं और पहले बातचीत तथा मुलाकात की सुविधा मिलती थी। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से यह सुविधा बंद कर दी गई है।
द मूकनायक ने सौम्या से इस बारे में विस्तृत बात की। सौम्या ने बताया कि उनके पति दवाई बेचने का काम करते थे, किसी मामले में 2 साल पहले जेल भेज गये, उन्हें खगड़िया जेल से भागलपुर केंद्रीय कारा में स्थानांतरित किये एक साल हो चुका है जिसके बाद से परिवार की मुसीबतें बढ़ गयी हैं। सौम्या कहती हैं " मुझे अपने गाँव से पहले बेगुसराय जाना पड़ता है और वहां से ट्रेन से भागलपुर पहुंचने में 3-4 घंटे लग जाते हैं, छोटे छोटे तीन बच्चों को परिजनों के पास छोड़कर किसी तरह पहुंचती हूँ लेकिन मुलाकात का समय लेने के बाद भी मिलने नहीं देते। कुछ सुप्रीम कोर्ट के कागज़ और जरूरी दस्तावेज उन्हें देने थे लेकिन मिलने नहीं दिया तो गेट पर प्रहरी को सौंप दिया लेकिन वो भी मेरे पति तक पहुंचाया नहीं गया।"
सौम्या कहती हैं उनके पति को स्वास्थ्य से जुडी कई तकलीफें हैं लेकिन उन्हें बराबर दवाई और इलाज नही मिल रहा है। पहले सप्ताह में दो दिन सरकारी फोन से घर बात करने की सुविधा मिलती थी, अब वह भी बंद है। पिछली मुलाकात के दौरान राकेश ने अपनी परेशानियों के बारे में बताया था। वे 11 अगस्त से अनशन पर हैं, लेकिन जेल प्रशासन द्वारा अभी तक कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई है। सौम्या ने कहा कि परिवार चिंतित और भयभीत है कि कहीं उनके पति के साथ कोई अनहोनी न हो जाए। सौम्या का यह भी कहना है कि दलित समुदाय से होने के कारण उनके पति के साथ दूसरों की तुलना में ज़्यादा बुरा बर्ताव किया जा रहा है, खाने पीने की पैकेट की चीज़ों को भी उन्हें नहीं देने दिया जाता और इन्हें ले जाने के लिए खुलेआम रिश्वत की मांग की जाती है।
उन्होंने भी जिला अधिकारी से माँग की है कि मामले की निष्पक्ष और तत्काल जाँच करवाई जाए, पति की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, मुलाकात की अनुमति दी जाए तथा यदि दुर्व्यवहार या मारपीट हुई है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही खगड़िया में चल रहे मुकदमों की सुनवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएँ।
वैशाली जिले के रहिमापुर निवासी गोलू झा ने अपने भाई निशांत झा के संबंध में शिकायत दी है। गोलू झा ने बताया कि उनके भाई को राजनीतिक विवाद के कारण अनेक मुकदमों में फँसाया गया। विपक्षी पक्ष अत्यंत प्रभावशाली और शक्तिशाली होने के कारण प्रशासनिक दृष्टि से उन्हें वैशाली जेल से भागलपुर केंद्रीय कारा में स्थानांतरित कर दिया गया।
निशांत झा ने केंद्रीय कारा भागलपुर में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने भाई के माध्यम से कई बार पत्राचार किया था। परिवार का आरोप है कि मात्र इसी कारण से जेल प्रशासन ने उन्हें जेल के अंदर सेल में बहुत दिनों से बंद रखा हुआ है। उनकी तबीयत भी खराब चल रही थी। गोलू झा दवा लेकर जाते थे और जेल प्रशासन पहले मुलाकात तथा बातचीत की सुविधा देता था। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से यह सुविधा पूरी तरह बंद कर दी गई है। उन्हें मुलाकात की अनुमति नहीं मिल रही है।
गोलू झा ने शिकायत की कि उन्हें जानकारी मिली है कि उनके भाई के साथ जेल प्रशासन द्वारा गंभीर रूप से दुर्व्यवहार तथा मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया जा रहा है। पूरा परिवार इस स्थिति से अत्यंत परेशान और भयभीत है। उन्होंने जिला अधिकारी से माँग की है कि मामले की निष्पक्ष और तत्काल जाँच करवाई जाए, निशांत झा की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, साक्षात् मुलाकात की अनुमति दी जाए तथा यदि दुर्व्यवहार या मारपीट के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही हाजीपुर में चल रहे उनके मुकदमों की सुचारू सुनवाई हेतु उन्हें नियमित रूप से न्यायालय में उपस्थित कराने के निर्देश दिए जाएँ।
दोनों शिकायतों में एक समान पैटर्न दिखता है। दोनों कैदियों को प्रभावशाली विपक्षी पक्ष के कारण दूसरे जिले की जेल से भागलपुर केंद्रीय कारा में स्थानांतरित किया गया। दोनों ने जेल में भ्रष्टाचार के खिलाफ पत्राचार किया और उसके बाद सेल में डाल दिए गए। मुलाकात और फोन सुविधा बंद कर दी गई। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ बताई गई हैं। एक कैदी अनशन पर हैं। दोनों परिवारों ने सुरक्षा, मुलाकात और निष्पक्ष जाँच की माँग की है।
द मूकनायक ने भागलपुर जेल अधीक्षक और भागलपुर जिला पुलिस अधीक्षक को दोनों कैदियों के परिवारों द्वारा लगाए गए आरोपों और जेल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष जानने के लिए ईमेल भेजा है। जवाब मिलने पर खबर अपडेट की जाएगी।
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