‘वेश्या’ कहा, कान से खून बहाया… CJP प्रोटेस्ट में छात्राओं के साथ पुलिस की बदसलूकी के चौंकाने वाले आरोप!

महिला आयोग अब तक खामोश क्यों?
एक छात्रा ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसे ‘वेश्या’ कहकर गाली दी, थाने के अंदर कपड़े उतारने और पीटने की धमकी दी, एक अन्य लडकी को इतनी बुरी तरह पीटा कि उसके कान से खून बहने लगा।
एक छात्रा ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसे ‘वेश्या’ कहकर गाली दी, थाने के अंदर कपड़े उतारने और पीटने की धमकी दी, एक अन्य लडकी को इतनी बुरी तरह पीटा कि उसके कान से खून बहने लगा। सोशल मीडिया
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दिल्ली- जंतर मंतर से संसद की ओर 20 जुलाई को हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर प्रदर्शनकारियों ने महिलाओं और छात्राओं के साथ बदसलूकी के गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लाठीचार्ज, आंसू गैस और बल प्रयोग के दौरान लड़कियों को भी निशाना बनाया गया। कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं जिनमें पुरुष पुलिसकर्मी महिलाओं को थप्पड़ मारते, बाल खींचते और कपड़े फाड़ते दिख रहे हैं।

एक छात्रा ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसे ‘वेश्या’ कहकर गाली दी, थाने के अंदर कपड़े उतारने और पीटने की धमकी दी, एक अन्य लडकी को इतनी बुरी तरह पीटा कि उसके कान से खून बहने लगा। कई अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी बताया कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने छाती पर पैर रखकर कपड़े फाड़े, सिर पर लाठियाँ मारीं और गाली-गलौज की। एक वीडियो में अतिरिक्त डीसीपी (उत्तर-पूर्व) संदीप लांबा एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते दिख रहे हैं। वायरल होने के बाद उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाकर उनकी मूल तैनाती पर वापस भेज दिया गया। CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि यही अधिकारी सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो के बाल भी खींच चुके हैं।

बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने इस घटना का जिक्र किया। उन्होंने अदालत से कहा कि सार्वजनिक वीडियो में एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा एक महिला को बिना किसी उकसावे के थप्पड़ मारते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने अदालत से अधिकारी को जवाबदेह ठहराने की मांग की। इस मामले में हाईकोर्ट ने पुलिस से जवाब मांगा है और घटना से जुड़े सीसीटीवी व अन्य वीडियो सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं में प्रदर्शनकारियों ने दावा किया है कि महिलाओं के साथ छेड़छाड़ हुई, निजी अंगों पर हमला किया गया, नाम प्लेट के बिना सादे कपड़ों वाले लोग लाठियाँ लेकर आए और कुछ लाठियों में कीलें लगी थीं। याचिकाकर्ताओं ने 110 से ज्यादा वीडियो पेश करने की बात कही है। पुलिस का पक्ष है कि प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की, कई पुलिसकर्मी घायल हुए और स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए बल का इस्तेमाल जरूरी था।

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने 12 वर्षीय लड़की के सिर पर चोट के आरोप पर संज्ञान लिया और जांच के आदेश दिए। लेकिन दिल्ली महिला आयोग (जिसका अध्यक्ष पद लंबे समय से खाली है) और राष्ट्रीय महिला आयोग इन घटनाओं पर अब तक खामोश दिख रहे हैं। प्रदर्शनकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का सवाल है जब थाने के अंदर धमकी, कपड़े फाड़ने और महिलाओं पर शारीरिक हिंसा के आरोप लग रहे हैं तो ये आयोग कहाँ हैं? क्या वे सिर्फ चुनिंदा मामलों में बोलते हैं या छात्रों-छात्राओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर भी संज्ञान लेंगे?

CJP और प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन था और पुलिस ने अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया। दिल्ली पुलिस इन आरोपों से इनकार करती रही है। मामले की जांच और अदालती कार्यवाही आगे बढ़ रही है। महिलाओं और छात्राओं के साथ हुई कथित बदसलूकी पर आयोगों की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है।

एक छात्रा ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसे ‘वेश्या’ कहकर गाली दी, थाने के अंदर कपड़े उतारने और पीटने की धमकी दी, एक अन्य लडकी को इतनी बुरी तरह पीटा कि उसके कान से खून बहने लगा।
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एक छात्रा ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसे ‘वेश्या’ कहकर गाली दी, थाने के अंदर कपड़े उतारने और पीटने की धमकी दी, एक अन्य लडकी को इतनी बुरी तरह पीटा कि उसके कान से खून बहने लगा।
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