
भोपाल। खोजी पत्रकारिता का असर एक बार फिर मध्य प्रदेश विधानसभा में देखने को मिला। ‘द मूकनायक’ की ग्राउंड रिपोर्ट में उजागर किए गए अशोकनगर जिले के ईसागढ़ स्थित आनंदपुर धाम ट्रस्ट से जुड़े मामलों ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में गंभीर हलचल पैदा कर दी है। विधानसभा के बजट सत्र के नौवें दिन यह मामला आधिकारिक रूप से सदन में उठा, जब अशोकनगर के विधायक इंजीनियर हरिबाबू राय ने इस संबंध में प्रश्न लगाया। इसके जवाब में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने सदन को विस्तृत जानकारी दी और स्वीकार किया कि ट्रस्ट द्वारा कुछ सरकारी जमीन पर अतिक्रमण दर्ज है।
यह वही मामला है जिसे ‘द मूकनायक’ ने ग्राउंड रिपोर्ट के माध्यम से प्रमुखता से उठाया था। रिपोर्ट में आनंदपुर धाम परिसर के भीतर कथित अनैतिक और अवैध गतिविधियों, जमीन के विस्तार और स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों को सामने लाया गया था। खबरों के लगातार प्रकाशन के बाद कांग्रेस नेताओं ने भी इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठाया। कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसके बाद मामला प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया।
5200 एकड़ से अधिक भूमि ट्रस्ट के नाम, 10 एकड़ सरकारी जमीन पर अतिक्रमण दर्ज
विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने बताया कि अशोकनगर जिले में संचालित आनंदपुर ट्रस्ट के नाम पर कुल मिलाकर 5200 एकड़ से अधिक भूमि दर्ज है। मंत्री ने स्वीकार किया कि कुछ सरकारी जमीन पर ट्रस्ट द्वारा कब्जा किया गया है।
सरकारी जवाब के अनुसार, अशोकनगर के ग्राम बांसाखेड़ी में 0.618 हेक्टेयर तथा वन विभाग के आनंदपुर वन खंड, ईसागढ़ क्षेत्र की 3.52 हेक्टेयर भूमि पर ट्रस्ट का कब्जा पाया गया है। कुल मिलाकर लगभग 10 एकड़ सरकारी भूमि पर अतिक्रमण दर्ज किया गया है। यह जानकारी स्वयं सरकार की ओर से सदन में लिखित उत्तर के रूप में दी गई, जिसने मामले को और गंभीर बना दिया है।
सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, तहसील ईसागढ़ के 11 स्थानों आनंदपुर, नैथाई, दयालपुर, जमडेरा, शांतपुर, कुलवार, सकर्य, गोपालपुर, ईसागढ़, बहेरिया और आकलोन में लगभग 4811 एकड़ (करीब 1948 हेक्टेयर) भूमि आनंदपुर ट्रस्ट के नाम दर्ज है। इसके अतिरिक्त अशोकनगर तहसील के बांसाखेड़ी, पवारगढ़ और कस्बा अशोकनगर में 157.77 हेक्टेयर जमीन ट्रस्ट के नाम पर दर्ज है। इनमें आनंदपुर, दयालपुर, शांतपुर, गोपालपुर और जमडेरा में सबसे अधिक भूमि स्थित है।
अनुसूचित जनजाति की जमीन खरीद पर भी सवाल
कांग्रेस विधायक हरिबाबू राय ने सरकार से यह भी पूछा कि ट्रस्ट ने अनुसूचित जनजाति के लोगों से कितनी जमीन खरीदी है और क्या इस प्रक्रिया में नियमानुसार अनुमति ली गई थी। इस संबंध में भी सरकार की ओर से लिखित जवाब प्रस्तुत किया गया। हालांकि, विपक्षी सदस्यों ने संकेत दिया कि जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया की गहन जांच आवश्यक है, विशेषकर तब जब मामला आदिवासी जमीन से जुड़ा हो, जहां कानूनन विशेष प्रावधान लागू होते हैं।
आदिवासी क्षेत्रों में जमीन खरीद-बिक्री के लिए कड़े कानूनी प्रावधान हैं और बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति ऐसे हस्तांतरण अवैध माने जा सकते हैं। ऐसे में ट्रस्ट के पास बड़ी मात्रा में भूमि दर्ज होने से प्रशासनिक प्रक्रिया और वैधानिकता पर सवाल उठने लगे हैं।
पूर्व में विवादों में रहा ट्रस्ट
आनंदपुर ट्रस्ट इससे पहले भी विवादों में रह चुका है। करीब एक माह पूर्व ट्रस्ट से जुड़े कुछ व्यक्तियों पर यौन शोषण के आरोप सामने आए थे, जिसके बाद मामला सुर्खियों में आया। इसके पहले सरकारी और आदिवासियों की जमीन पर कब्जे की बात भी स्थानीय स्तर पर उठी थी। ‘द मूकनायक’ की ग्राउंड स्टोरी ने इन दोनों पहलुओं जमीन और कथित अनियमितताओं को विस्तार से सामने रखा था। लगातार खबरों के प्रकाशन के बाद राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ी और अंततः मामला विधानसभा तक पहुंचा।
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