
भोपाल। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के ईसागढ़ क्षेत्र में स्थित आनंदपुर धाम अब आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि आरोपों का अड्डा बनता जा रहा है। धाम से जुड़े कुछ महात्माओं पर यौन शोषण, आर्थिक लूट और दलित–आदिवासियों की जमीन हड़पने के संगठित षड्यंत्र के सनसनीखेज आरोप सामने आए हैं। इससे पहले द मूकनायक ने आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जे और संदिग्ध खरीद-फरोख्त की ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित की थी। अब ताजा इन्वेस्टिगेशन में खुलासा हुआ है कि इसी आश्रम से जुड़े लोगों पर महिलाओं के यौन शोषण, धमकी और दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं, जो पूरे मामले को और भी खौफनाक बना देते हैं।
द मूकनायक को मिले शिकायत संबंधी दस्तावेजों और वीडियो, आडियो क्लिप के आधार पर यह खुलासा हुआ है कि आनंदपुर धाम में रहने वाले कुछ लोगों, विशेषकर आश्रम में काम करने वाले युवकों और महिलाओं के साथ लंबे समय से शोषण हो रहा है। इन आरोपों के घेरे में मुख्य रूप से सुनील महात्मा, प्रेमी महात्मा, सोनू महात्मा सहित अन्य लोग बताए जा रहे हैं।
द मूकनायक प्रतिनिधि के पास एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसमें आश्रम के पास गाँव का रहने वाला एक युवक अपने नाम और गांव की जानकारी देकर सीधे-सीधे आनंदपुर धाम के प्रमुख महात्माओं पर यौन शोषण का आरोप लगा रहा है। पीड़ित युवक का कहना है कि महात्मा जबरन उसके साथ यौन संबंध बनाते हैं और मना करने पर उसे काम से निकालने, परिवार को परेशान करने और जान से मारने की धमकी दी जाती है।
वीडियो में युवक कहता है कि वह महात्माओं की डिमांड से पूरी तरह टूट चुका है। इसी डर और प्रताड़ना के कारण उसने अपने साथ हो रहे यौन अत्याचार का वीडियो तक बना लिया, ताकि उसके पास सबूत रहे। युवक का आरोप है कि उसने यह वीडियो अन्य महात्माओं को शिकायत के तौर पर भेजा था, लेकिन उल्टा उसी को प्रताड़ित किया गया और जबरन कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए गए। यह वीडियो बीते साल 2025 का बताया जा रहा है।
पीड़ित युवक वीडियो में साफ तौर पर आरोप लगाता है कि अवधेश भगत, फौजी भगत और अन्य लोगों ने उसका यौन शोषण किया। जब उसने इसकी शिकायत प्रीतम भगत, सोनू महात्मा और सुरेंद्र महात्मा से की तो इन लोगों ने उसके मोबाइल से वीडियो डिलीट करवा दिया और उसे धमकाया।
युवक वीडियो में यह तक कहता है कि अगर उसके साथ हो रहा अत्याचार बंद नहीं हुआ तो वह आत्महत्या कर लेगा। यह बयान न सिर्फ आश्रम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। एक वीडियो और सामने आया है जिसमें धाम के प्रमुख महात्मा एक युवक के साथ आपत्तिजनक स्थिति में हैं।
दूसरा वीडियो आनंदपुर धाम में रहने वाली दो सेविकाओं का है। इन दोनों ने आरोप लगाया है कि धाम के कुछ महात्मा उनसे लड़कियां सौंपने की बात कहते हैं और यह भी कहते हैं कि वे जो चाहें उनके साथ कर सकते हैं, कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
सेविकाओं का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत ईसागढ़ थाने में भी की थी। इसके प्रमाण उनके पास मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि शिकायत के बाद उन्हें ही डराया-धमकाया गया और चुप रहने का दबाव बनाया गया।
यह पहला मौका नहीं है जब आनंदपुर धाम विवादों में घिरा हो। इससे पहले द मूकनायक की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया था कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ महात्माओं पर आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा करने और अनैतिक तरीके से खरीद-फरोख्त करने के आरोप हैं। कई आदिवासी परिवारों ने बताया था कि उनसे सस्ती कीमत पर या दबाव बनाकर जमीन ली गई, और कुछ मामलों में तो सीधा कब्जा कर लिया गया।
अब जब यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं, तो यह साफ हो रहा है कि मामला केवल जमीन तक सीमित नहीं, बल्कि आश्रम के भीतर रहने वालों की सुरक्षा और सम्मान से भी जुड़ा है।
आनंदपुर धाम को लोग आत्मशांति और आध्यात्म से जुड़ने की जगह मानते हैं। दूर-दूर से लोग यहां आते हैं, सेवा करते हैं और साधना करते हैं। लेकिन सामने आए वीडियो और दस्तावेज यह इशारा करते हैं कि इसी धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल का इस्तेमाल कुछ लोग अपनी ताकत और रसूख के लिए कर रहे हैं।
पीड़ितों का कहना है कि उन्हें यह कहकर चुप कराया जाता है कि महात्माओं के खिलाफ बोलना पाप है और इससे उनका और उनके परिवार का अहित हो जाएगा। डर और आस्था के इसी माहौल में शोषण को अंजाम दिया जा रहा है।
11 जनवरी 2025 को आनंदपुर धाम से जुड़ी गंभीर शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी गई थी। शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया कि धाम के कुछ प्रमुख महात्मा वहां रह रही सेविकाओं और भगत-भक्तों को मानसिक, शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। पत्र में यह भी लिखा गया कि विरोध करने पर लोगों को डराया जाता है और धमकियां दी जाती हैं। इसके साथ ही ट्रस्ट में आर्थिक अनियमितता और गौ-वंश की संदिग्ध मौतों के आरोप भी लगाए गए थे।
जब इस शिकायत की जानकारी आनंदपुर धाम ट्रस्ट के अधिकारियों को मिली तो उन्होंने 27 जनवरी 2025 को अशोकनगर पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर शिकायत को साजिश बताया। ट्रस्ट ने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर ट्रस्ट और महात्माओं को बदनाम करने के लिए झूठी शिकायतें कर रहे हैं। पत्र में यह भी लिखा गया कि अगर महात्मा विशुद्ध दयानंद, विशुद्ध ज्ञानानंद या उनसे जुड़े लोग ट्रस्ट के खिलाफ कोई शिकायत करें तो उसे झूठा माना जाए।
इसके बाद पीड़ितों ने अशोकनगर पुलिस अधीक्षक को एक और पत्र फरवरी 2025 को भेजा, जिसमें मांग की गई कि आनंदपुर धाम में चल रहे कथित अनैतिक कार्यों की जांच अशोकनगर और गुना जिले के अधिकारियों से न कराकर किसी दूसरे जिले या उच्च स्तर के अधिकारी से कराई जाए। पीड़ितों का कहना था कि उन्हें स्थानीय पुलिस और प्रशासन पर भरोसा नहीं है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि धाम के प्रमुख महात्मा राजनीतिक रूप से बहुत मजबूत हैं और उनकी जिले के अधिकारियों से अच्छी पकड़ है, इसी वजह से उनकी शिकायतों को दबाया जा रहा है। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे उन्हें न्याय की उम्मीद कम होती जा रही है।
बीते साल 11 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आनंदपुर धाम में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। इस कार्यक्रम से पहले सुरक्षा कारणों से आश्रम में रहने वाले यूपी और हरियाणा सहित दूसरे राज्यों से आए भगतों और महात्माओं का पुलिस वेरिफिकेशन कराया गया था। इस जांच में सामने आया कि धाम में रह रहे कुछ लोग आपराधिक प्रवृत्ति के हैं और उनके खिलाफ पहले से आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज हैं। हमारी पड़ताल में यह जानकारी आधिकारिक और अनौपचारिक स्रोतों से निकलकर सामने आई है।
इसके अलावा जब द मूकनायक की टीम ने ईसागढ़ थाने में दर्ज अपराधों का ब्योरा खंगाला तो पता चला कि पिछले कुछ वर्षों में 14 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई हैं। इन मामलों में मारपीट, जान से मारने की धमकी, गाली-गलौज और डराने-धमकाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। इन सभी मामलों में आरोपी या तो सीधे आनंदपुर धाम ट्रस्ट से जुड़े बताए गए हैं या धाम में रहने वाले लोग हैं।
हालांकि स्थानीय लोगों और कुछ पीड़ितों का कहना है कि यह सिर्फ वही मामले हैं जो थाने तक पहुंचे। कई घटनाएं ऐसी भी हैं, जो धाम के भीतर ही दबा दी जाती हैं। आरोप है कि विवाद या अपराध होने पर पीड़ित को बाहर जाने या पुलिस में शिकायत करने से रोका जाता है और अंदर ही किसी तरह समझौता करवा दिया जाता है।
इन तथ्यों से साफ है कि आनंदपुर धाम सिर्फ आध्यात्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके भीतर कानून-व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। जब प्रधानमंत्री के दौरे से पहले हुए वेरिफिकेशन में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की मौजूदगी सामने आई और थाने में दर्ज मामलों की संख्या भी बढ़ती दिखी, तो यह पूरे प्रशासन और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
द मूकनायक ने सभी आरोपों पर आनंदपुर धाम के महात्मा सुनील से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में कोई बातचीत नही कर सकते।
सेविकाओं द्वारा ईसागढ़ थाने में की गई शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होना पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े करता है। अगर समय रहते इन शिकायतों पर जांच होती, तो शायद हालात यहां तक नहीं पहुंचते। अब जब वीडियो और दस्तावेज सार्वजनिक हो चुके हैं, तो यह प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी बनती है कि निष्पक्ष जांच कराई जाए। पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
आनंदपुर धाम, जो कि मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले के ईसागढ़ तहसील के आनंदपुर गांव में स्थित है, लगभग 315 हेक्टेयर (लगभग 780 एकड़) क्षेत्र में फैला हुआ है। इस विशाल परिसर में मुख्य आश्रम, पांचों गुरुओं के मंदिर, तालाबों से जुड़े धार्मिक स्थल, आधुनिक गौशाला और खेती–किसानी के कार्य शामिल हैं। धाम के आसपास और भी कृषि योग्य भूमि और ट्रस्ट के अन्य परिसर हैं, और पूरे इस विस्तृत क्षेत्र में साधु–संतों तथा अनुयायियों के रहने, पूजा-अनुष्ठान और सांसारिक कार्यों के लिए अलग-अलग भाग बने हुए हैं। यहाँ करीब 1500 साधु-साध्वी और श्रद्धालु नियमित रूप से रहते और कार्य करते हैं।
नोट: यह खबर द मूकनायक के पास उपलब्ध वीडियो, ऑडियो और शिकायत संबंधी दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई है। पीड़िताओं की पहचान गोपनीय रखी गई है। हालांकि, वीडियो और ऑडियो सामग्री की स्वतंत्र रूप से पुष्टि द मूकनायक नहीं करता।
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