
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के छठे दिन सदन में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से जुड़े फैसलों की घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सरसों पर भी भावांतर योजना लागू करने का निर्णय लिया है, ताकि बाजार में कीमत कम होने की स्थिति में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके और उन्हें आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार मूंग की तुलना में उड़द के उत्पादन को बढ़ावा देना चाहती है, इसलिए किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए बोनस देने का फैसला किया गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि सरकार किसानों को ऊर्जा दाता बनाने के संकल्प के साथ काम कर रही है और कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई नीतियां तैयार की जा रही हैं।
इंडिया-यूएस ट्रेड एग्रीमेंट के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन
सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले विधानसभा परिसर के बाहर कांग्रेस विधायकों ने इंडिया-यूएस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ विधायक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुखौटे पहनकर पहुंचे और किसानों के हितों के खिलाफ कथित समझौते का विरोध जताया। विपक्ष का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का सीधा असर भारतीय किसानों की आय और बाजार प्रतिस्पर्धा पर पड़ेगा, इसलिए सरकार को इस पर स्पष्ट नीति रखनी चाहिए।
लाड़ली बहना योजना पर सवाल, सदन में हंगामा
सदन में सबसे ज्यादा हंगामा लाड़ली बहना योजना के नए पंजीयन को लेकर हुआ। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने सरकार से पूछा कि नई पात्र महिलाओं के लिए पंजीयन कब से शुरू होगा, क्योंकि सरकार इस विषय पर कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बता रही है। इस पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि मंत्री द्वारा सही जवाब दिया जा रहा है, लेकिन पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी बहनों से क्या कह रहे हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने जवाब देते हुए कहा कि 60 वर्ष की आयु पूरी करने वाली महिलाओं को पात्रता के आधार पर अन्य योजनाओं का लाभ दिया जाता है और फिलहाल नए पंजीयन की कोई निश्चित तिथि बताना संभव नहीं है। मुख्यमंत्री ने भी मंत्री के जवाब का समर्थन करते हुए कहा कि विपक्ष पहले इस योजना को चुनावी बताता था, जबकि ढाई साल बाद भी यह निरंतर जारी है और सरकार अपने घोषणा पत्र में किए वादे, पांच वर्षों में ₹3000 सहायता को पूरा करेगी।
मेडिकल छात्रा की मौत का मामला: जांच पर उठे सवाल
भोपाल स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की एक आदिवासी छात्रा की संदिग्ध मौत का मुद्दा भी सदन में जोर-शोर से उठा। कांग्रेस विधायक सेना महेश पटेल ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि घटना संदिग्ध है और इसकी सीबीआई जांच कराई जानी चाहिए।
जवाब में राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि छात्रा की मौत जहर सेवन से हुई और शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था और मोबाइल जांच में ऐसे संदेश मिले जिनसे संकेत मिलता है कि वह पढ़ाई को लेकर तनाव में थी। घटनास्थल से फिनायल की बोतल भी बरामद हुई है, जिसे जांच के लिए जब्त कर लिया गया है। मंत्री ने कहा कि पोस्टमॉर्टम पर माता-पिता के हस्ताक्षर मौजूद हैं और मामले की जांच के लिए तीन महिला अधिकारियों की एसआईटी गठित की गई है। हालांकि विपक्ष ने इसे अपर्याप्त बताते हुए स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग दोहराई।
कानून-व्यवस्था और एआई समिट विवाद पर तीखी बहस
बजट चर्चा के दौरान प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर भी सदन में माहौल गरमा गया। कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है और भोपाल व इंदौर में कांग्रेस कार्यालयों पर हमले हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि इन घटनाओं में भाजपा कार्यकर्ताओं की भूमिका रही है।
इस पर भाजपा विधायक शैलेन्द्र जैन ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एआई समिट के दौरान कांग्रेस से जुड़े लोग ही आपत्तिजनक गतिविधियों में शामिल थे। इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। बहस के दौरान शेखावत की एक टिप्पणी को सभापति ने आपत्तिजनक मानते हुए कार्यवाही से विलोपित करने के निर्देश दिए।
संसदीय कार्य मंत्री का हस्तक्षेप, चर्चा शांत कराने की कोशिश
लगातार बढ़ते हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री ने हस्तक्षेप कर सभी सदस्यों से बजट पर सार्थक चर्चा करने की अपील की और आश्वस्त किया कि वित्त मंत्री सभी पक्षों की बात सुनेंगे। उनके हस्तक्षेप के बाद कुछ देर के लिए सदन का माहौल शांत हुआ, हालांकि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे।
समग्र रूप से, बजट सत्र का छठा दिन किसानों की नीतियों, महिला कल्याण योजनाओं, कानून-व्यवस्था और छात्रा मौत प्रकरण जैसे कई संवेदनशील मुद्दों के कारण राजनीतिक रूप से बेहद सक्रिय रहा।
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