
भोपाल। मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले के ईसागढ़ क्षेत्र में स्थित आनंदपुर धाम एक बार फिर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। इस बार मामला धाम परिसर के भीतर बने कथित तहखानों को लेकर सामने आया है। खबरों के अनुसार आनंदपुर धाम के अंदर कुल सात तहखाने मौजूद हैं, जिनकी जानकारी न तो स्थानीय प्रशासन को है और न ही शासन के किसी आधिकारिक रिकॉर्ड में इनके निर्माण का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। इन तहखानों को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि इन्हें किसकी अनुमति से और किस उद्देश्य से बनाया गया।
सूत्रों के अनुसार, ये तहखाने लंबे समय से धाम परिसर के भीतर मौजूद बताए जा रहे हैं, लेकिन न तो इनके नक्शे सार्वजनिक हैं और न ही किसी विभाग से इनके निर्माण की वैधानिक स्वीकृति सामने आई है। आरोप है कि इतने बड़े धार्मिक परिसर में इस तरह की भूमिगत संरचनाओं का होना और प्रशासन को इसकी जानकारी तक न होना, कई गंभीर आशंकाओं को जन्म देता है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि धाम की गतिविधियों को लेकर पहले से चल रहे विवादों के बीच इन तहखानों की मौजूदगी मामले को और संदिग्ध बनाती है।
आनंदपुर धाम इससे पहले भी द मूकनायक की पड़ताल और अन्य शिकायतों के चलते सुर्खियों में रहा है। पूर्व में धाम से जुड़े कुछ महात्माओं पर महिलाओं और युवकों के यौन शोषण, सेविकाओं को प्रताड़ित करने और दलित-आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जे जैसे आरोप सामने आ चुके हैं। इन मामलों को लेकर पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठते रहे हैं। अब तहखानों से जुड़ा यह नया दावा उन पुराने आरोपों की पृष्ठभूमि में और अधिक गंभीर माना जा रहा है।
तहखानों के मुद्दे पर द मूकनायक से बातचीत में अनुसूचित जाति कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने कहा कि आनंदपुर धाम में बताए जा रहे तहखानों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि इन तहखानों का निर्माण किसकी अनुमति से किया गया और इनमें किस प्रकार की गतिविधियां संचालित होती रही हैं। अहिरवार के अनुसार, यदि किसी धार्मिक संस्थान के भीतर नियमों को दरकिनार कर इस तरह के निर्माण किए गए हैं, तो यह कानून का गंभीर उल्लंघन है।
अहिरवार ने यह भी कहा कि आनंदपुर धाम में बड़ी संख्या में साधु-साध्वी, सेविकाएं और श्रद्धालु रहते हैं। ऐसे में अगर परिसर के भीतर ऐसी संरचनाएं मौजूद हैं, जिनकी जानकारी शासन और प्रशासन तक को नहीं है, तो यह सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिहाज से भी चिंता का विषय है। उन्होंने मांग की कि तहखानों की जांच के साथ-साथ यह भी देखा जाए कि क्या इनका इस्तेमाल किसी अवैध गतिविधि के लिए तो नहीं किया जा रहा था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि धाम का क्षेत्रफल काफी बड़ा है और आम लोगों की पहुंच कई हिस्सों तक सीमित रहती है। इसी कारण परिसर के भीतर क्या निर्माण हो रहा है, इसकी जानकारी बाहर तक नहीं पहुंच पाती। उनका आरोप है कि प्रशासन ने भी समय-समय पर धाम की गतिविधियों की गंभीरता से जांच नहीं की, जिससे अब इस तरह के सवाल सामने आ रहे हैं।
द मूकनायक से बातचीत में एक युवक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आनंदपुर धाम परिसर में आम श्रद्धालुओं को हर जगह आने-जाने की अनुमति नहीं होती। उसके अनुसार धाम के भीतर केवल कुछ विशेष लोगों को ही अलग-अलग हिस्सों में प्रवेश की इजाजत दी जाती है। युवक ने कहा कि धाम की दुनिया पूरी तरह अलग है और जैसे ही कोई व्यक्ति धाम परिसर से बाहर निकलता है, तस्वीर बिल्कुल बदल जाती है। अंदर का माहौल किसी छोटे शहर की तरह लगता है, जहां हर गतिविधि पर सख्त निगरानी रहती है।
युवक ने यह भी बताया कि धाम के भीतर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी है। इतने सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं कि किसी एक स्थान पर “परिंदा भी पर न मार सके।” आम क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों के जरिए लगातार निगरानी की जाती है, लेकिन धाम के अंदर वास्तव में कितना और क्या मौजूद है, इसकी जानकारी आम भक्तों को नहीं होती। उसने कहा कि धाम परिसर में हमेशा किसी न किसी तरह का निर्माण कार्य चलता रहता है, जिससे यह पता ही नहीं चलता कि क्या नया बनाया गया और क्या नहीं। निर्माण में इस्तेमाल होने वाली जेसीबी मशीनें, ट्रक और अन्य संसाधन धाम के अपने बताए जाते हैं, इसी कारण बाहर के लोग निर्माण स्थलों तक नहीं पहुंच पाते और यह रहस्य बना रहता है कि भीतर वास्तव में क्या निर्माण हुआ है।
जानकारी के अनुसार आनंदपुर धाम परिसर के भीतर विशेष निर्माण कार्यों के लिए हरियाणा, पंजाब सहित अन्य राज्यों से लोगों को पहले बुलाया गया है। बताया जा रहा है कि ये लोग निर्माण स्थल के पास ही रहकर लंबे समय तक काम करते हैं और कार्य पूरा होने के बाद ही वहां से जाते हैं। इस प्रक्रिया में बाहरी निगरानी या स्थानीय स्तर पर किसी तरह की जानकारी साझा नहीं की जाती।
ऐसे हालात में यह आशंका और गहरी होती है कि धाम परिसर के भीतर अलग-अलग प्रकार के निर्माण कार्य किए गए हैं, जिनकी पूरी जानकारी प्रशासन या संबंधित विभागों तक नहीं पहुंच पाई। आरोप है कि निर्माण कार्यों को आंतरिक संसाधनों और सीमित लोगों के जरिए अंजाम दिया गया, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि कहां, क्या और किस उद्देश्य से निर्माण किया गया है।
इन आरोपों के बीच आनंदपुर धाम ट्रस्ट या उससे जुड़े महात्माओं की ओर से तहखानों को लेकर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। प्रशासनिक स्तर पर भी अब तक यह साफ नहीं किया गया है कि इन तहखानों की जानकारी उन्हें पहले से थी या नहीं, और यदि नहीं थी तो इस पर आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
आनंदपुर धाम को लेकर लगातार सामने आ रहे विवादों और अब तहखानों के दावे ने एक बार फिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच ही यह साफ कर सकती है कि यदि तहखानों का निर्माण किया गया तो किस उद्देश्य से किया गया और क्या इसके पीछे किसी तरह की अनियमितता या अवैध गतिविधि छिपी हुई है?
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि आनंदपुर धाम से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कुछ आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं। कांग्रेस का दावा है कि धाम से जुड़े लोगों के साथ मिलकर काले धन को सफेद किया जा रहा है और बदले में धाम में चल रहे अवैध कार्यों को प्रशासनिक संरक्षण दिया जा रहा है।
इस संबंध में कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने आरोप लगाया था कि आईएएस अधिकारी विवेक अग्रवाल और अविनाश लवानिया सहित कुछ अन्य अधिकारी भी इस पूरे मामले से जुड़े हुए हैं और आनंदपुर धाम को संरक्षण दे रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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