
भोपाल। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के घिरौली कोल ब्लॉक में बड़े पैमाने पर हो रही पेड़ों की कटाई को लेकर शुरू हुई राजनीतिक हलचल अब कई सवालों के घेरे में है। पर्यावरणीय नुकसान और वन क्षेत्र पर बढ़ते खतरे को गंभीर बताते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने दिसंबर 2025 में एक 12 सदस्यीय तथ्य-अन्वेषण (फैक्ट फाइंडिंग) समिति बनाई थी। समिति ने 11 दिसंबर 2025 तक सिंगरौली जाकर ग्राउंड रिपोर्ट कर रिपोर्ट बनाने की घोषणा की थी। लेकिन 20 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और न ही कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान सामने आया। अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इस मुद्दे को भूल गई? और यदि नहीं, तो जांच समिति ने मौके पर जाकर क्या पाया?
कांग्रेस का आरोप है कि सिंगरौली के धिरोली कोल ब्लॉक में “अनियंत्रित और असामान्य गति” से जंगल साफ किए जा रहे हैं। भारी मशीनों से पेड़ों को उखाड़ा जा रहा है, जिससे न सिर्फ वन क्षेत्र नष्ट हो रहा है बल्कि स्थानीय आबादी, आदिवासी समुदायों, जलस्रोतों और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। पार्टी ने दावा किया था कि यह केवल कोयला खनन का मुद्दा नहीं, बल्कि पर्यावरण और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है।
AICC द्वारा गठित इस जांच समिति का नेतृत्व प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी कर रहे थे। समिति में प्रदेश कांग्रेस के लगभग सभी प्रमुख चेहरे शामिल किए गए, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि पार्टी इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से ले रही है।
जीतू पटवारी
उमंग सिंघार
मीनाक्षी नटराजन
अजय सिंह
कमलेश्वर पटेल
हेमंत कटारे
राजेंद्र कुमार सिंह
हिना कावरे
विक्रांत भूरिया
ओंकार मरकाम
जयवर्धन सिंह
बाला बच्चन
कांग्रेस ने कहा था कि यह टीम ग्राउंड रिपोर्ट तैयार कर पार्टी नेतृत्व को सौंपेगी और उसे सार्वजनिक भी किया जाएगा।
घोषणा के मुताबिक, कांग्रेस की 12 सदस्यीय जांच टीम सिंगरौली पहुंची भी। लेकिन जब टीम बासी बेरदहा होते हुए घिरौली गांव जाने लगी, तो पुलिस ने उन्हें घिरौली गांव के पास ही रोक दिया।
करीब 200 से अधिक कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता सड़क पर बैठकर धरने पर बैठ गए। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी हुई और आरोप लगाया गया कि सरकार सच्चाई सामने आने से डर रही है, इसलिए जांच टीम को रोका जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने कहा था कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है और पर्यावरणीय अपराध को छिपाने की कोशिश हैं। बाद में दल सुरक्षा के बीच प्रभावित इलाकों में गया भी, और सोशलमीडिया पर नेताओं ने वीडियो पोस्ट आदि भी जारी किए। लेकिन अब 20 दिन गुजरने के बाद रिपोर्ट की क्या फाइंडिंग थी यह सार्वजनिक ही नही किया गया।
1. पर्यावरण पर सीधा हमला
पार्टी का कहना है कि हजारों पेड़ एक साथ काटे जा रहे हैं, जिससे सिंगरौली जैसे पहले से ही प्रदूषण-ग्रस्त इलाके का पारिस्थितिकी संतुलन पूरी तरह बिगड़ रहा है।
2. स्थानीय समुदायों से बिना परामर्श
कांग्रेस का आरोप है कि ग्रामीणों और आदिवासी समुदायों को विश्वास में लिए बिना खनन और कटाई की अनुमति दी गई। जबकि यह इलाका उनकी आजीविका, जंगल, पानी और जमीन से सीधा जुड़ा हुआ है।
3. वन एवं पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन
पार्टी का दावा है कि सार्वजनिक सुनवाई, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA), पुनर्वनीकरण और मुआवजा योजना
जैसी प्रक्रियाओं का या तो पालन नहीं किया गया, या केवल कागजों में किया गया।
4. सरकार पर जल्दबाज़ी में अनुमति देने का आरोप
कांग्रेस नेताओं ने कहा था कि पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में इतनी तेज़ी से जंगल साफ करना बेहद संदिग्ध है, और इसके पीछे बड़े कॉर्पोरेट हित हो सकते हैं।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। जिस मुद्दे पर कांग्रेस ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया, जिस पर जांच समिति बनाई, और जिसे पर्यावरण व जनहित का बड़ा सवाल बताया, उसी पर अब पार्टी की चुप्पी है। क्या जांच समिति ने रिपोर्ट तैयार कर ली है, लेकिन उसे सार्वजनिक करने की बजाय दबाया जा रहा है? क्या राजनीतिक दबाव या रणनीति के चलते मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया?
या फिर कांग्रेस के भीतर ही इस मुद्दे पर एकराय नहीं बन पाई?
इन सवालों का जवाब न आना, खुद कांग्रेस की मंशा पर सवाल खड़े करता है। आखिर इतने बड़े मामले की फैक्ट फाइंडिग रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की?
बीते 15 दिसंबर 2025 को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट कर बताया था कि सिंगरौली से जुड़ी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट पार्टी को सौंप दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंगरौली ज़िले में अडानी समूह को दिए गए सुलियारी और धिरौली खनन ब्लॉकों में बिना आवश्यक अनुमतियों के बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जा रही है, साथ ही भारी पुलिस बल की मौजूदगी में वर्षों से बसे लोगों को बिना उचित प्रक्रिया, राहत और पुनर्वास के विस्थापित किया जा रहा है।
जीतू पटवारी ने लिखा कि इन कथित अनियमितताओं की सच्चाई सामने लाने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के नेतृत्व में फैक्ट फाइंडिंग समिति बनाई गई थी। उन्होंने बताया कि समिति के सभी सदस्यों ने दिल्ली में हरीश चौधरी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, हालांकि इसके निष्कर्ष अब तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
15 दिसंबर को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय में सिंगरौली खनन परियोजना को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बाद कांग्रेस इस मुद्दे पर अचानक खामोश हो गई। उस दिन पार्टी ने केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार पर आदिवासियों, पर्यावरण और स्थानीय आबादी के अधिकारों की अनदेखी कर अडानी समूह को खनन की खुली छूट देने का आरोप लगाया और इसे संस्थागत लूट करार दिया, लेकिन इसके बाद न तो फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट सार्वजनिक की गई और न ही पार्टी ने इस विषय पर आगे कोई संवाद किया।
प्रेस वार्ता में प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया, मीनाक्षी नटराजन, कमलेश्वर पटेल और बाला बच्चन सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे, लेकिन इसके बाद कांग्रेस ने इस पूरे मामले पर बोलना लगभग बंद कर दिया!
द मूकनायक से बातचीत में समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के सवाल पर कांग्रेस संगठन प्रभारी महासचिव डॉ. संजय कामले ने कहा कि सिंगरौली के धिरोली कोल ब्लॉक में पेड़ों की कटाई को लेकर गठित कांग्रेस की तथ्य-अन्वेषण समिति की फाइंडिंग्स फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई हैं। डॉ. कामले ने कहा कि बहुत जल्द ही यह रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।
द मूकनायक से बातचीत में कांग्रेस विधायक एवं पूर्व मंत्री ओमकार मरकाम ने कहा कि सिंगरौली मामले को लेकर गठित तथ्य-अन्वेषण समिति ने अपनी रिपोर्ट अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) को सौंप दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति की भूमिका रिपोर्ट तैयार कर सौंपने तक थी और यह काम पूरा किया जा चुका है।
ओमकार मरकाम ने कहा कि अब रिपोर्ट को कब और किस रूप में सार्वजनिक किया जाएगा, या आगे उस पर क्या कार्रवाई होगी, यह निर्णय AICC स्तर पर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में आगे की जानकारी पार्टी नेतृत्व की ओर से ही दी जाएगी।
कांग्रेस नेताओं ने अब अडानी के धिरोली कोल ब्लॉक से जुड़े मुद्दे पर सोशल मीडिया में भी चुप्पी साध ली है। जो मामला कुछ दिन पहले तक कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक और पर्यावरणीय सवाल बना हुआ था, उस पर अब पार्टी के प्रमुख नेता भी खामोश नजर आ रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी पेड़ों की कटाई और धिरोली कोल ब्लॉक को लेकर न तो कोई नया बयान दिया है और न ही सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट साझा की है। यह चुप्पी तब और सवाल खड़े करती है, जब यही मुद्दा हाल तक कांग्रेस द्वारा सरकार को घेरने का मुख्य हथियार बताया जा रहा था।
राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार विश्वपाल सिंह भदौरिया का कहना है कि सिंगरौली जैसे संवेदनशील इलाके में बड़े पैमाने पर हो रही पेड़ों की कटाई को लेकर आमजन में भारी रोष है। यह मुद्दा केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय लोगों की आजीविका और भविष्य भी जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा- यदि कांग्रेस की जांच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक होती है, तो यह सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि कांग्रेस इस मुद्दे को कितनी गंभीरता और निरंतरता से आगे बढ़ाती है। फिलहाल फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट का सार्वजनिक न होना कई सवाल खड़े करता है और पूरे मामले की पारदर्शिता पर संदेह को और गहरा कर रहा
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