“महिलाएं अपना अपमान कभी नहीं भूलतीं”: मोदी के राष्ट्र संबोधन पर 14 वर्षीय जलवायु कार्यकर्ता लिसीप्रिया ने मणिपुर की याद दिलाई!

लिसीप्रिया बोलीं, “मणिपुर की महिलाएं आपके अपमान, चुप्पी, राजनीति और विभाजन की नीति को कभी नहीं भूलेंगी”
लिसीप्रिया ने कहा हम 2023 से ही युद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। और अंतरराष्ट्रीय समुदाय तथा भारत, मणिपुर संकट को सुलझाने में असफल रहे हैं। 200 से अधिक लोग मारे गए हैं, और 60,000 से अधिक लोगों ने अपने घर खो दिए हैं। अब मणिपुर न्याय का हकदार है।
लिसीप्रिया ने कहा हम 2023 से ही युद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। और अंतरराष्ट्रीय समुदाय तथा भारत, मणिपुर संकट को सुलझाने में असफल रहे हैं। 200 से अधिक लोग मारे गए हैं, और 60,000 से अधिक लोगों ने अपने घर खो दिए हैं। अब मणिपुर न्याय का हकदार है।आसिफ निसार/ द मूकनायक
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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम संबोधन में महिलाओं के आरक्षण विधेयक पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि “महिलाएं बहुत कुछ भूल सकती हैं, लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलतीं।” उन्होंने विपक्षी दलों- कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और द्रमुक पर आरोप लगाया कि उन्होंने महिलाओं के सपनों को कुचल दिया और संसद में बिल की हार पर तालियां बजाकर खुशी मनाई। प्रधानमंत्री ने देश की माताओं और बहनों से माफी मांगते हुए कहा कि सरकार की पूरी कोशिशों के बावजूद संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पास नहीं हो सका।

इस संबोधन पर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। 14 वर्षीय मणिपुरी जलवायु कार्यकर्ता लिसीप्रिया कांगुजाम ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के बयान का जवाब देते हुए लिखा कि "मणिपुर की महिलाएं आपके अपमान, आपकी चुप्पी, आपकी राजनीति, आपकी मूर्खता और विभाजन की नीति को कभी नहीं भूलेंगी। #ManipurViolence" .

उनकी यह टिप्पणी मोदी के ‘महिलाओं का अपमान कभी नहीं भूलती’ वाले बयान पर सीधा जवाब थी, जिसमें उन्होंने मणिपुर हिंसा में महिलाओं के खिलाफ हुई घटनाओं और केंद्र सरकार की कथित चुप्पी का संदर्भ दिया। एक अन्य पोस्ट में वे कहती हैं, " हम 2023 से ही युद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। और अंतरराष्ट्रीय समुदाय तथा भारत, मणिपुर संकट को सुलझाने में असफल रहे हैं। 200 से अधिक लोग मारे गए हैं, और 60,000 से अधिक लोगों ने अपने घर खो दिए हैं। अब मणिपुर न्याय का हकदार है।"

सोशल मीडिया पर आम लोगों और कार्यकर्ताओं की टिप्पणियों में भी प्रधानमंत्री के बयान को मणिपुर, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसी जगहों पर महिलाओं के खिलाफ अपराधों में भाजपा सरकार की ‘चुप्पी’ से जोड़कर आलोचना की जा रही है। कई कमेंट्स में पूछा गया कि जब मणिपुर में महिलाओं को नंगा घुमाया गया था तो प्रधानमंत्री कहां थे। कार्यकर्ताओं ने कहा कि महिलाओं के सम्मान की बात करने वाले बयान तब खोखले लगते हैं जब वास्तविक घटनाओं पर सरकार की प्रतिक्रिया नजर नहीं आती।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़ा संशोधन भारतवर्ष की नारी को नई उड़ान देने का महायज्ञ था। लेकिन कांग्रेस, TMC, समाजवादी पार्टी और DMK जैसे दलों ने इसकी भ्रूणहत्या कर दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

बुद्धिजीवी वर्ग और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इस संबोधन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अपमान का जिक्र करते हुए खुद सरकारी मंच से राजनीतिक हमला करना मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन है। कई टिप्पणियों में मणिपुर हिंसा, महिलाओं के खिलाफ अन्य घटनाओं और भाजपा की कथित विभाजनकारी नीतियों का जिक्र करते हुए कहा गया कि महिलाएं वास्तविक मुद्दों पर भी अपनी आवाज नहीं भूलेंगी।

इस संबोधन के बाद विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे “राष्ट्र के नाम संबोधन नहीं, बल्कि कांग्रेस-विरोधी संबोधन” बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) का उल्लंघन करते हुए सरकारी मंच का दुरुपयोग किया और विपक्ष पर हमला बोला। खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी जी ने अपने संबोधन में कांग्रेस का नाम 59 बार लिया, जबकि महिलाओं का जिक्र मुश्किल से कुछ बार ही किया। कांग्रेस ने इसे चुनावी भाषण करार दिया और चुनाव आयोग से शिकायत करने की बात कही।

तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी प्रधानमंत्री के संबोधन को चुनावी राज्यों में MCC का उल्लंघन बताया। पूर्व राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनाव चल रहे हैं, ऐसे में राष्ट्र के नाम संबोधन देकर भाजपा ने सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया। उन्होंने चुनौती दी कि अगर महिलाएं विपक्ष को सबक सिखाने वाली हैं तो प्रधानमंत्री लोकसभा भंग कर नए चुनाव कराएं।

फ्रंटलाइन की एडिटर वैशना रॉय ने अपने पोस्ट में लिखा, " इंदिरा गांधी को 12 जून, 1975 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 'उत्तर प्रदेश राज्य बनाम राज नारायण' मामले में अयोग्य घोषित कर दिया था। कोर्ट ने उनके 1971 के रायबरेली लोकसभा चुनाव की जीत को इस आधार पर रद्द कर दिया कि उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किया था। DD और AIR सरकारी संसाधन हैं।"

लिसीप्रिया ने कहा हम 2023 से ही युद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। और अंतरराष्ट्रीय समुदाय तथा भारत, मणिपुर संकट को सुलझाने में असफल रहे हैं। 200 से अधिक लोग मारे गए हैं, और 60,000 से अधिक लोगों ने अपने घर खो दिए हैं। अब मणिपुर न्याय का हकदार है।
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पोस्ट में गिनाई वो बातें जहां भाजपा ने महिलाओं को निराश किया

सीपीआई(एम्) सांसद जॉन ब्रिटास ने एक लम्बे पोस्ट में प्रधान मंत्री से कहा कि उन्हें महिलाओं से माफ़ी मांगनी चाहिए:

• 2023 में पास हुए महिला आरक्षण बिल को इतने लंबे समय तक 'कोल्ड स्टोरेज' में बंद रखने के लिए। इतनी लंबी देरी के बाद, पूरे देश की जनता को एक बार फिर धोखा देने की कोशिश में, जान-बूझकर उस कानून को परिसीमन और जनगणना से जोड़ने के लिए।

• सिर्फ़ वोट पक्के करने के लिए महिलाओं को महज़ 'वोट की गुलाम' बनाने की कोशिश करने के लिए। RSS के महिला-विरोधी रवैये को छिपाने के लिए, जो BJP का नेतृत्व करता है और महिलाओं को अपनी प्राथमिक सदस्यता भी नहीं देता।

• देश की प्रथम नागरिक, महिला राष्ट्रपति के साथ 'अछूत' जैसा बर्ताव करने और नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान उन्हें दूर रखने के लिए।

• मणिपुर में सड़कों पर महिलाओं का शिकार करने और उन्हें नग्न अवस्था में घुमाने के लिए।

• एक फ़ासीवादी-शैली वाली पितृसत्ता के साथ साठगांठ करने के लिए जो पूरे देश में महिलाओं को 'दूसरे दर्जे का नागरिक' मानती है और उनकी गरिमा व आत्म-सम्मान को तार-तार कर देती है।

• 'मनुस्मृति' की उस दकियानूसी राजनीति को लागू करने की कोशिश करने के लिए, जो यह घोषणा करती है कि "न स्त्री स्वातंत्र्यमर्हति" (अर्थात, स्त्री स्वतंत्रता की हकदार नहीं है)।

इन्हीं सभी कारणों से PM को देश की महिलाओं से माफ़ी माँगनी चाहिए न कि अपने ही शैतानी खेल के नाकाम होने से हुई शर्मिंदगी को छिपाने के लिए।"

ट्राइबल आर्मी के फाउंडर हंसराज मीणा ने लिखा, " मोदी जी का कल राष्ट्र के नाम संबोधन हुआ। 29 मिनट का लंबा चौड़ा भाषण हुआ। लेकिन प्रधानमंत्री ने एक भी बार मणिपुर का नाम नहीं लिया, जहां पिछले 3 साल से हिंसा और उपद्रव जारी हैं।"

लिसीप्रिया ने कहा हम 2023 से ही युद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। और अंतरराष्ट्रीय समुदाय तथा भारत, मणिपुर संकट को सुलझाने में असफल रहे हैं। 200 से अधिक लोग मारे गए हैं, और 60,000 से अधिक लोगों ने अपने घर खो दिए हैं। अब मणिपुर न्याय का हकदार है।
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