
दिल्ली- दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में 20 फरवरी को एक छोटी-सी बात पर बड़ा विवाद हो गया, जो जल्द ही नस्लीय अपमान और गालियों में बदल गया। अरुणाचल प्रदेश की तीन युवतियों (जिनमें से एक UPSC की तैयारी कर रही हैं) ने अपने किराए के फ्लैट में एयर कंडीशनर इंस्टॉल करवाया था। ड्रिलिंग के दौरान नीचे वाले फ्लोर पर धूल-मिट्टी गिरने से पड़ोसी दंपति हर्ष सिंह और उनकी पत्नी रूबी जैन के साथ झगड़ा शुरू हुआ। यह झगड़ा जल्द ही नस्लीय हमले में बदल गया। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद नस्लवाद और उत्तर पूर्वी निवासियों के साथ होने वाले भेदभाव को लेकर लोगों में गहरा आक्रोश फ़ैल रहा है, लोग आरोपी दम्पत्ति के विरुद्ध सख्त कारवाई की मांग कर रहे हैं वहीं मेघालय के मुख्यमंत्री ने भी इस घटना को लेकर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए दिल्ली सरकार से त्वरित एक्शन की मांग की।
पीड़िताओं ने आरोप लगाया है कि पड़ोसी हर्ष सिंह और उनकी पत्नी रूबी जैन ने उन्हें "मोमोज बेचने वाली", "मसाज पार्लर चलाने वाली", "धंधेवाली" जैसी नस्लीय और अपमानजनक टिप्पणियां कीं, साथ ही उत्तर-पूर्वी लोगों को निशाना बनाते हुए "नॉर्थईस्ट वाले गटर-छाप हैं" जैसी बातें कहीं। वीडियो में महिला आरोपी को यह कहते सुना जा सकता है कि "500 रुपये में मसाज पार्लर में काम करने वाली धंधेवाली"। युवतियों ने कहा कि यह सिर्फ व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि पूरे उत्तर-पूर्वी समुदाय की गरिमा पर हमला था।
यूपीएससी की तैयारी कर रही छात्रा ने बताया कि वह दो साल से दिल्ली में रह रही है, "यह एक छोटी सी घटना थी, लेकिन इन्होने बड़ा बवाल खड़ा कर दिया। हमारे खिलाफ इस्तेमाल की गई अपमानजनक भाषा और जिस तरह से उन्होंने हमारा वर्णन किया, उसके कारण हमने एफआईआर दर्ज कराई है"।
वायरल वीडियो में आरोपी महिला को युवतियों से अपमानजनक और रेसिस्ट टिप्पणियां करते सुना जा सकता है। आरोपी महिला ने अपने पति को "कस्टम ऑफिसर का बेटा" और "पॉलिटिशियन का बेटा" बताते हुए श्रेष्ठता दिखाने की कोशिश की। आरोपी महिला ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघते हुए एक पीडिता को यह तक भी कहा कि उसका पति जवान है या बूढा ये चेक करने के लिए वह उनके बेडरूम का इस्तेमाल कर सकती है। एक पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद था और स्थिति शांत करने की कोशिश कर रहा था।
ड्रिलिंग के दौरान नीचे वाले फ्लोर पर धूल-मिट्टी गिरने से पड़ोसी दंपति हर्ष सिंह और उनकी पत्नी रूबी जैन के साथ झगड़ा शुरू हुआ। यह झगड़ा जल्द ही नस्लीय हमले में बदल गया।
छात्रा का कहना है कि " हम लोग देखने में अलग दिखते हैं, हम हिंदी भी धारा प्रवाह नहीं बोलते इसलिए लोगों को लगता है हम भारतीय ही नही हैं, शायद चाइना से आये हैं और इसलिए हम जैसे लोगों के साथ बुरा सलूक और गाली गलौज करते हैं और इन्हें लगता है पुलिस इनका साथ देगी"।
पीड़िताओं को एडवोकेट लियी नोशी द्वारा निःशुल्क कानूनी सहायता दी जा रही है और उन्होंने अदालत का रुख किया है। नोशी का कहना है कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी में पूर्वोत्तर भारत के लोगों द्वारा झेले जा रहे नस्लीय भेदभाव का एक हिस्सा है। उन्होंने कहा, " हम किसी भी तौर पर कम भारतीय नहीं हैं लेकिन पता नहीं क्यों नोर्थ ईस्ट के निवासियों को देश का नागरिक समझा ही नहीं जाता, देखिये किस तरह की गन्दी गालियाँ इन कम उम्र की लडकियों को दी गयी है, उनका पूरा इमेज खराब करने का प्रयास किया जो कदापि माफ़ी योग्य नहीं है, नोशी ने नस्लीय भेदभाव को कानूनी रूप से अधिक मान्यता देने और पीड़ितों की सुरक्षा के लिए विशिष्ट कानून बनाने की मांग की है, बताया जा रहा है कि दोनों पीड़िताएं इस घटना से हुए आघात के बाद घर लौटने का मन बना रही हैं।
मालवीय नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत के आधार पर आरोपी दंपति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 79 (महिला की लज्जा भंग करने वाले शब्द/कार्य), 351(2) (आपराधिक धमकी), 3(5) (साझा इरादा) और 196 (धर्म, नस्ल, जन्म स्थान आदि के आधार पर शत्रुता बढ़ाना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। धारा 196 संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है। पुलिस ने बताया कि कोई शारीरिक चोट नहीं आई, लेकिन पीड़िताओं ने मानसिक उत्पीड़न और अपमान की शिकायत की है। अभी तक आरोपी दंपति की गिरफ्तारी नहीं हुई है और जांच जारी है। पीड़िताओं ने आरोपी से औपचारिक माफी की मांग की है।
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने मालवीय नगर में हुई नस्लीय घटना की कड़ी निंदा की। इस व्यवहार को "दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य" बताते हुए संगमा ने कहा कि इस तरह की भाषा और आचरण भारत जैसे विविधतापूर्ण राष्ट्र में एकता की भावना को कमजोर करते हैं। उन्होंने पीड़ितों को समर्थन का आश्वासन दिया और कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मामले को उच्च स्तर तक ले जाया जा सकता है।
संगमा ने नागरिकों और समुदाय के नेताओं से भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने और जागरूकता अभियानों के माध्यम से ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा में काम करने की अपील की। उन्होंने एकता और आपसी सम्मान की आवश्यकता पर जोर देते हुए पूर्वोत्तर और पूरे देश के लोगों से नस्लीय पूर्वाग्रह के खिलाफ एकजुट होने का आग्रह किया।
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