
भोपाल। मध्य प्रदेश कैडर की 2011 बैच की आईएएस अधिकारी नेहा मारव्या सिंह एक साल में चौथी बार तबादले के बाद एमपी आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन के ग्रुप में अपना दर्द लिखकर नाराजगी जताई है। 5 सितंबर की तबादला सूची में अपना नाम देखकर उन्होंने कहा कि मौजूदा पद पर ज्वाइन किए महज 50 दिन में ही उन्हें हटा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अधीनस्थ कर्मचारियों ने उनके खिलाफ ‘बगावत’ आयोजित की, मेज पर हाथ थपथपाकर तबादला करवाने की धमकी दी और शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई उन पर नहीं बल्कि उनका ही स्थानांतरण कर दिया गया।
नेहा मारव्या सिंह ने लिखा, “ 5 सितंबर की स्थानांतरण सूची में एक बार फिर मेरा नाम देखकर मैं बहुत विचलित हूं। मात्र 50 दिनों में ही मेरा स्थानांतरण कर दिया गया है। पिछले एक वर्ष में यह चौथी बार है जब मेरा नाम स्थानांतरण सूची में आया है। मुझे पता है कि एमपी आईएएस अधिकारी संघ केवल जन्मदिन की शुभकामनाएं देने या बधाई देने तक सीमित नहीं है। मैं यहां अपना क्षोभ दर्ज कराना चाहती हूं, इस आशा के साथ कि इसका कोई समाधान निकलेगा।”
उन्होंने कहा कि आईएएस अधिकारी होने के नाते राज्य सरकार उन्हें जहां चाहे वहां कर्तव्य निभाने के लिए कह सकती है और उन्होंने हमेशा आदेशों का सम्मानपूर्वक पालन किया है। लेकिन इस बार वे बहुत हतोत्साहित महसूस कर रही हैं। उन्होंने लिखा कि उनका स्थानांतरण इसलिए हुआ क्योंकि जिन अधीनस्थों का प्रतिष्ठापन उनके अधीन नहीं बल्कि विभाग के अधीन है, उन्होंने उनके विरुद्ध विद्रोह आयोजित किया। वे मेज थपथपाकर उन्हें स्थानांतरित करवाने की धमकी दे रहे थे। उन्होंने अनुशासनहीनता, फाइलें रोकने और दुर्व्यवहार की शिकायत उचित माध्यम से की थी, उम्मीद थी कि कार्रवाई होगी। उल्टे उनका तबादला हो गया।
नेहा ने सवाल किया, “क्या संदेश जाएगा? क्या एक आईएएस अधिकारी इतना कमजोर होता है कि उसके अधीनस्थ बगावत आयोजित करके उसे तबादला करवा सकते हैं? मैंने ऐसा क्या किया कि एक महीने के अंदर अधीनस्थ बगावत कर दें? मुझे छोड़िए, मुझे नहीं लगता कोई आईएएस अधिकारी ऐसा कुछ कर सकता है कि ज्वाइन करने के एक महीने के अंदर अधीनस्थ बगावत कर दें। अधिकारी को काम समझने में ही एक महीना लग जाता है। लेकिन अधीनस्थों की इस बगावत के चलते हुए तबादले से मेरा अपमान हुआ है।”
उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल 2-3 महीने के ही रह जाते हैं। जब तक वे चार्ज समझ पाती हैं, हटा दी जाती हैं। अधीनस्थ उन्हें आसान निशाना समझने लगे हैं कि अगर उनके मुताबिक काम नहीं किया तो तबादला करवा देंगे। वर्षों से चुप रहकर और धैर्य रखकर काम न मिलने की स्थिति झेली, उम्मीद थी स्थिति सुधरेगी लेकिन अब अधीनस्थ धमकाने लगे हैं। उन्होंने लिखा, “हमेशा षड्यंत्रकारी जीतते हैं और मैं हार जाती हूं। सिस्टम ने मुझे फेल कर दिया है। आज मैं हूं, कल कोई और आईएएस अधिकारी निशाना बनेगा।”
5 सितंबर के सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार नेहा मारव्या सिंह को संचालक, आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाएं और मैपसेट (MAPCET) के प्रबंध संचालक पद से हटाकर प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम बनाया गया है। उन्हें मध्य प्रदेश शासन के अपर सचिव के समकक्ष पद भी दिया गया है। इससे पहले उनके पास कई अतिरिक्त प्रभार थे। यह उनका एक साल में चौथा तबादला है। इससे पहले जनवरी 2025 में डिंडौरी कलेक्टर पद से हटाकर उन्हें घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजाति विभाग का संचालक बनाया गया था, फिर आदिवासी कल्याण विभाग में अपर सचिव और आईटीडीपी संचालक का पद मिला।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार 14 अगस्त को विभागीय बैठक में अतिरिक्त निदेशक स्तर की महिला अधिकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप लगे थे, जिसके बाद विभाग के कर्मचारियों ने पेन-डाउन किया और मुख्य सचिव को शिकायत दी गई थी। सरकार ने तबादला किया है। फिलहाल आईएएस एसोसिएशन या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। नेहा मारव्या सिंह का यह संदेश प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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