
चेन्नई- सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत एक बड़ा खुलासा हुआ है। तमिलनाडु सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'कलाईग्नर मगलिर उरिमाई थोगाई' (महिला मासिक सहायता योजना) के लिए पिछले तीन वित्तीय वर्षों में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित विशेष घटक निधि से कुल 13,177.53 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया है।
यह जानकारी चेंगलपट्टू जिले के चूनामपेट निवासी एस. वेंकटेशन द्वारा दायर आरटीआई आवेदन के जवाब में चेन्नई स्थित राजस्व प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन आयुक्तालय ने दी है। वेंकटेशन एससी-एसटी विमोचन मोर्चा के राज्य समन्वयक हैं।
आयुक्तालय के सहायक आयुक्त-7 (जो सूचना अधिकारी भी हैं) ने 21 जुलाई, 2026 को जारी अपने पत्र में योजना के लिए आवंटन और एससी-एसटी कोष से उपयोग की गई राशि का विस्तृत ब्योरा प्रदान किया।
आरटीआई के जवाब के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-2026 के लिए कलाईग्नर मगलिर उरिमाई थोगाई योजना के लिए कुल 18,509 करोड़ रुपये (रु. 1,85,09,05,05,000) आवंटित किए गए हैं। हालांकि, सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इसी वर्ष एससी-एसटी विशेष घटक निधि से 6,191.67 करोड़ रुपये (रु. 6,19,16,73,20,000) इस योजना में लगाए गए हैं।
आयुक्तालय द्वारा दिए गए वर्ष-वार विवरण के अनुसार:
वित्तीय वर्ष 2023-2024 में एससी-एसटी कोष से 2,568.81 करोड़ रुपये (रु. 2,56,88,17,22,264)
वित्तीय वर्ष 2024-2025 में 4,417.04 करोड़ रुपये (रु. 4,41,70,46,37,000)
वित्तीय वर्ष 2025-2026 में 6,191.67 करोड़ रुपये (रु. 6,19,16,73,20,000)
इस प्रकार तीन वर्षों में एससी-एसटी कोष से कुल 13,177.53 करोड़ रुपये (रु. 13,17,75,36,79,64) इस योजना पर खर्च किए गए हैं।
आरटीआई उत्तर में योजना के लिए कुल वार्षिक आवंटन का भी उल्लेख किया गया:
2023-2024: 5,812 करोड़ रुपये
2024-2025: 5,138 करोड़ रुपये
2025-2026: 18,509 करोड़ रुपये
हालांकि, आयुक्तालय ने साफ तौर पर कहा कि इस योजना से लाभान्वित होने वाली एससी/एसटी महिलाओं की संख्या का विवरण उनके कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। यह जानकारी मांगने वाले आवेदक के प्रश्न का उत्तर देने से इनकार कर दिया गया।
वेंकटेशन ने 14 फरवरी, 2026 को यह आरटीआई आवेदन दायर किया था। 19 जून के सरकारी पत्र के संदर्भ के बाद 1 जुलाई को आयुक्तालय में यह पत्र प्राप्त हुआ और अंततः 21 जुलाई को जवाब भेजा गया।
इस खुलासे के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं और सामाजिक न्याय के पैरोकारों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि एससी-एसटी समुदायों के विकास के लिए आरक्षित विशेष निधि को किसी अन्य सामान्य योजना में डायवर्ट करना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। यह संवैधानिक आदेश की अवहेलना है, जिसमें अनुसूचित जातियों और जनजातियों के कल्याण के लिए समर्पित निधि सुनिश्चित करने की बात कही गई है। इस खुलासे ने सरकार की प्रतिबद्धता और वंचित वर्गों के हितों की रक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आपको बता दें जुलाई में महाराष्ट्र सरकार द्वारा सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग के बजट से मुख्यमंत्री वारकरी महामंडल के माध्यम से आषाढ़ी एकादशी वारी के लिए 2.80 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर किए जाने पर वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) ने कड़ा विरोध दर्ज करवाया था। पार्टी का आरोप है कि अनुसूचित जाति समुदाय के कल्याण के लिए निर्धारित बजट का लगातार अन्य योजनाओं के लिए उपयोग किया जा रहा है, जिससे दलित समाज के अधिकारों और विकास संबंधी योजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
इससे पहले भी महाराष्ट्र शासन के सामाजिक न्याय व विशेष सहाय्य विभाग ने 20 मई को एक शासन आदेश जारी कर अनुसूचित जाति (SC) घटक योजना के तहत आवंटित निधि को मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना के लिए उपयोग करने की मंजूरी दे दी। इस निर्णय के तहत वित्त वर्ष 2026-27 में ₹3000 करोड़ का प्रावधान किया गया, जिसमें से मार्च 2026 और अप्रैल 2026 के लिए कुल ₹730.51 करोड़ (प्रत्येक माह ₹365.2550 करोड़) महिला एवं बाल विकास विभाग को वितरित किए। फरवरी माह में महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसत ने अपनी ही सरकार की नीति पर असंतोष व्यक्त किया और दोहराया कि उनके विभाग के फंड को 'लाड़की बहिन' जैसी योजनाओं के लिए इस्तेमाल किया गया, जो कि अस्वीकार्य है।
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