
हिसार में 1 सितंबर को पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के आवास के बाहर कचरा गाड़ियां रोकने के दौरान पुलिस और हड़ताली सफाई कर्मचारियों में झड़प हुई। उसी दिन एक वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर फैल गए, जिनमें एक पुलिसकर्मी महिला सफाई कर्मचारी को लात मारता दिख रहा है। महिला गिरते-गिरते बची। वीडियो वायरल होते ही गुबार फूट पड़ा। लोग लिख रहे हैं- वर्दी सुरक्षा के लिए है, महिला को लात मारने के लिए नहीं।
झड़प अर्बन एस्टेट इलाके में हुई, जहां नगर निगम पुलिस एस्कॉर्ट के साथ कचरा उठाने निकला था। सफाई कर्मचारी 6 अगस्त से नियमितीकरण और समान वेतन की मांग पर हड़ताल पर हैं। करीब 27 दिन बीत चुके थे। वीडियो आने के बाद बहस सिर्फ हड़ताल तक नहीं रही। सवाल यह बन गया कि प्रदर्शन के दौरान महिला कर्मचारी के साथ बल प्रयोग कहां तक जायज है।
एक्स पर कई यूजर्स ने एक ही लाइन दोहराई, “सवाल सिर्फ एक महिला सफाई कर्मचारी को लात मारने का नहीं, सवाल कानून और इंसानियत का है।” राजस्थान प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष सारिका सिंह चौधरी ने मुख्यमंत्री हरियाणा को टैग कर लिखा कि यह बेहद शर्मनाक है और उस पुलिसकर्मी को तुरंत नौकरी से निकाला जाए। दलित-ओबीसी संगठनों से जुड़े हैंडल डोमा परिसंघ ने भी वही सवाल उठाया कि क्या महिला प्रदर्शनकारी के साथ इस तरह बल प्रयोग सही है?
आज़ाद समाज पार्टी के दिल्ली प्रदेश प्रभारी महेश पाहवाल ने एक पोस्ट में कहा, "महिला सफाई कर्मचारी को लात मारने का वीडियो बेहद शर्मनाक है। विरोध करने का अधिकार कानून देता है, और कानून तोड़ने पर कार्रवाई भी कानून के तहत होनी चाहिए। लेकिन पुलिस को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। हरियाणा सरकार वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई करे। वर्दी जनता की सुरक्षा के लिए है, किसी महिला को लात मारने के लिए नहीं।"
नगीना सांसद और भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद ने घटना से जुडी एक क्लिप शेयर करते हुए लिखा, " हरियाणा के हिसार में पिछले 27 दिनों से अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे सफाई कर्मचारियों के साथ पुलिस की धक्का-मुक्की और एक महिला सफाई कर्मचारी के निजी अंग पर लात मारने का वीडियो बेहद शर्मनाक और अमानवीय है। प्रधानमंत्री जी चुनाव के समय इन्हीं सफाई कर्मचारियों के पैर धोने का दिखावा करते हैं और इन्हें “स्वच्छता सैनिक” कहते हैं, लेकिन आज उन्हीं महिला सफाई कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की और निजी अंग पर लात मारकर उन्हें अपमानित किया जा रहा है। यह सम्मान के नाम पर किए जाने वाले राजनीतिक दिखावे और जमीनी हकीकत के बीच का फर्क साफ दिखाता है। भाषा की भी छुआछूत होती है। अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरी महिला सफाई कर्मचारी को प्रशासन की ओर से “तू” जैसे अपमानजनक संबोधन देना भी उसी सामाजिक मानसिकता को दर्शाता है, जिसमें मेहनतकश और वंचित समाज के सम्मान को छोटा समझा जाता है। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की चुप्पी भी गंभीर सवाल खड़े करती है। हरियाणा सरकार दमन का रास्ता छोड़कर तत्काल सफाई कर्मचारियों से बातचीत करे। महिला कर्मचारी के साथ हुए दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए और उनकी सभी जायज मांगों का सम्मानजनक समाधान निकाला जाए। भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) हरियाणा के अपने सफाई कर्मचारियों के संघर्ष, सम्मान और अधिकारों के साथ मजबूती से खड़ी है।"
कुछ पोस्ट में “नारी शक्ति वंदन” का जिक्र कर व्यंग्य किया गया। पत्रकार अजय झा के पोस्ट में लिखा गया कि देश की गरीब और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के साथ ऐसा दुर्व्यवहार हो रहा है। वीडियो के साथ फोटो भी घूम रही हैं। लोग पूछ रहे हैं कि दोषी पुलिसकर्मी की पहचान क्यों नहीं हुई और जांच क्यों नहीं शुरू हुई।
पुलिस का आधिकारिक रुख अलग है। पीआरओ मदन लाल ने कहा कि झड़प में 5 से 7 पुलिसकर्मी घायल हुए और उनकी शिकायत पर कानूनी प्रक्रिया चल रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार 20 सफाई कर्मचारियों (14 महिलाएं) और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ। कर्मचारी पक्ष का आरोप है कि महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की और जबरदस्ती हुई। वायरल फोटो में दिख रहे पुलिसकर्मी के निलंबन या अलग जांच की कोई जानकारी नहीं मिली है।
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