
नई दिल्ली- नमाज के स्वास्थ्य लाभों पर रील बनाने के बाद शार्क टैंक इंडिया की जज और एमक्यूर फार्मास्यूटिकल्स की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर नमिता थापर को ऑनलाइन हमले का सामना करना पड़ रहा है। मार्च में नमिता ने इंस्टाग्राम पर एक रील पोस्ट की थी जिसमें उन्होंने दोस्तों के साथ ईद मनाने का जिक्र करते हुए नमाज को फुल बॉडी एक्सरसाइज बताया था। उन्होंने कहा था कि नमाज से फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है, जोड़ों और घुटनों की सेहत सुधरती है, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, मानसिक स्वास्थ्य को फायदा मिलता है और वज्रासन जैसी मुद्रा पाचन तंत्र के लिए लाभदायक साबित होती है।
रील स्वास्थ्य और फिटनेस के नजरिए से बनाई गई थी, लेकिन इस पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं और तीन हफ्तों तक नमिता तथा उनकी मां को अश्लील गालियां और व्यक्तिगत हमलों का सामना करना पड़ा। हिंदूवादी समर्थक नमिता की जमकर आलोचना कर रहे हैं और उसे 'दोहरे मापदंड' वाली बता रहे हैं।
20 अप्रैल को नमिता थापर ने मुंबई जाते हुए कार में रुककर एक वीडियो जारी किया जिसमें उन्होंने अपनी आपबीती बताई। उन्होंने कहा कि वे हेल्थकेयर प्रोफेशनल हैं और पहले भी हिंदू रीति-रिवाजों जैसे सूर्य नमस्कार और योग दिवस पर आसनों के स्वास्थ्य लाभों पर रील्स बना चुकी हैं, लेकिन तब किसी ने आपत्ति नहीं जताई।
नमिता ने सिलेक्टिव आउट्रेज पर सवाल उठाया और कहा कि धर्म का मतलब सम्मान है, चुप रहना कोई गुण नहीं है जब किसी की गरिमा पर हमला हो। उन्होंने ट्रोल्स को चेतावनी देते हुए कहा कि भगवान सब देख रहे हैं और कर्म का फल मिलता है। उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि इस वीडियो को वायरल करें ताकि महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन गाली-गलौज पर आवाज उठे। नमिता ने अपने वीडियो में जोर दिया कि असहमति जताना जायज है, लेकिन नफरत और व्यक्तिगत हमले स्वीकार्य नहीं।
इस विवाद में मुस्लिम एक्टिविस्ट्स और अन्य यूजर्स ने नमिता थापर के समर्थन में आगे आए। मुस्लिम आईटी सेल ने स्पष्ट रूप से कहा कि नमिता ने सिर्फ स्वास्थ्य लाभ बताए थे, लेकिन उनके खिलाफ अश्लील और व्यक्तिगत हमले किए गए, जबकि हिंदू प्रथाओं पर उनके पिछले कंटेंट को कोई समस्या नहीं हुई। कई अन्य लोगों ने भी ऑनलाइन ट्रोलिंग की निंदा की और कहा कि स्वास्थ्य संबंधी चर्चा को धार्मिक रंग नहीं देना चाहिए।
एक्टिविस्ट और उद्यमी प्रशांत कनौजिया ने नमिता पर ऑनलाइन हमले की निंदा करते हुए कहा, " भारत अब स्वतंत्र और निष्पक्ष व्यापार के लिए कोई देश नहीं रहा, न ही यह रचनात्मक स्वतंत्रता की कोई धरती है। आप अपनी मेहनत की कमाई लगाकर ज़मीन से कुछ खड़ा करते हैं, और अचानक गुंडे आपके दरवाज़े पर आकर उसे बंद करवाने की धमकी देने लगते हैं, सिर्फ़ इसलिए कि आपने कोई निष्पक्ष जगह बनाने की कोशिश की, या कुछ ऐसा कह दिया जो उनकी राजनीति में फिट नहीं बैठता।
पीयूष बंसल और नमिता थापर पर हुए हमले उद्यमियों की पूरी एक पीढ़ी को भारत छोड़ने पर मजबूर कर देंगे। आर्थिक विकास एक मज़बूत इकोसिस्टम पर निर्भर करता है, और जब लोगों को कुछ बनाने या अपनी बात कहने में ही सुरक्षित महसूस न हो, तो भला कोई यहाँ क्यों रुकेगा? एक तरफ़, हिंदुत्ववादी गुंडे हैं। दूसरी तरफ़, सरकार क्या देती है? ऊँचे टैक्स, लगातार इनकम टैक्स और ED के नोटिस, और उन लोगों को ही परेशान करना जो रोज़गार और मूल्य पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। और चलिए, यह बात साफ़ कर लें, यह सब बिना किसी राजनीतिक संरक्षण के नहीं होता। BJP इस बात से इनकार नहीं कर सकती कि ये भीड़ें उसी इकोसिस्टम का हिस्सा हैं जिससे उन्हें फ़ायदा पहुँचता है।आप कुछ बनाते हैं, और एक दिन 100 बेरोज़गार गुंडे अंदर घुसकर उसे तबाह कर सकते हैं। क्या व्यापार और इनोवेशन के लिए हम यही माहौल चाहते हैं?"
इसी बीच हाल ही में लेंसकार्ट शोरूम से जुड़े एक विवाद ने भी सुर्खियां बटोरीं। कंपनी की पुरानी इन-स्टोर स्टाइल गाइड को लेकर सोशल मीडिया पर आरोप लगे कि इसमें कुछ धार्मिक प्रतीकों पर पाबंदी थी। व्यापक विरोध और बैकलैश के बाद लेंसकार्ट ने अपनी पॉलिसी में बदलाव किया और नई गाइडलाइंस जारी कीं जिसमें बिंदी, तिलक, सिंदूर, हिजाब, टरबन समेत सभी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को स्पष्ट अनुमति दी गई। कंपनी के सीईओ पेयूष बंसल ने कहा कि पुराना दस्तावेज पुराना था और कंपनी समावेशिता पर जोर देती है।
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