तिलक और कलावा पर विवाद: जानिये Lenskart को क्यों बदलनी पड़ी कर्मचारियों की In-Store Style Guide

पुराने ग्रूमिंग गाइडलाइन के मुताबिक कम्पनी कर्मियों को इन स्टोर धार्मिक टीका/तिलक और बिंदी आदि की अनुमति नहीं थी जबकि हिजाब और टर्बन को शर्तों के साथ जगह दी गई थी।
भाजपा लीडर नाजिया इलाही खान ने Lenskart शोरूम में जाकर हिंदू वर्कर्स को तिलक लगाकर कलावा बांधा.
भाजपा लीडर नाजिया इलाही खान ने Lenskart शोरूम में जाकर हिंदू वर्कर्स को तिलक लगाकर कलावा बांधा.सोशल मीडिया
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मुंबई- मुंबई के अंधेरी इलाके में स्थित Lenskart के एक शोरूम में हाल ही में एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी है। बीजेपी माइनॉरिटी मोर्चा की नेता नाजिया इलाही खान इस शोरूम में पहुंचीं, जहां उन्होंने हिंदू कर्मचारियों को तिलक लगाया, कलावा बांधा और स्टोर मैनेजर मोहसिन खान से तीखी बहस की। वायरल वीडियो में नाजिया इलाही खान साफ-साफ कहती दिख रही हैं कि “शरिया लागू करवाना है क्या?” और हिंदू कर्मचारियों से अपील करती हैं कि “तिलक तुम्हारा गौरव है, कलावा तुम्हारा संस्कार है, सनातन तुम्हारी पहचान है”। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी की नीति के कारण हिंदू कर्मचारी अपनी धार्मिक परंपराएं निभाने से रोके जा रहे हैं। मामले को बढ़ता देख कम्पनी ने रिवाइज्ड इन स्टोर स्टाइल गाइड सार्वजनिक की जिसमें आस्था से जुड़े सभी प्रतीकों को धारण करने पर सहमति दी गई।

पूरे मामले की शुरुआत कम्पनी की पुरानी आंतरिक स्टाइल गाइड से हुई जिसमें स्टोर कर्मचारियों के लिए पहनावे और ग्रूमिंग के कई नियम दिए गए थे। इनमें टर्बन और हिजाब को काला रंग अनिवार्य करके अनुमति दी गई थी, हिजाब के लिए ट्यूटोरियल वीडियो सर्कुलेट करने की बात कही गई थी, बुर्का पर रोक थी, बाहें ढकने के लिए फुल स्लीव्स ब्लैक टी-शर्ट का विकल्प था, विजिबल टैटू पर रोक थी जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकें, सेल्वेट और स्प्रे बॉटल डेनिम के राइट लूप में लटकाना अनिवार्य था, ब्लू टॉर्च रखना जरूरी था, मेटल हेयरबैंड और हेयर नेट की अनुमति थी, हेना लगाने पर रोक थी जिसके लिए विशेष अनुमति लेनी पड़ती थी, टंग और फेस पियर्सिंग प्रतिबंधित था और गर्भवती कर्मचारियों को लूज जींस या जेगिंग्स की छूट थी। विवाद धार्मिक टीका/तिलक और बिंदी/स्टिकर की पाबंदी से हुआ जबकि हिजाब और टर्बन को शर्तों के साथ जगह दी गई थी।

इस कथित भेदभाव के खिलाफ नाजिया इलाही खान के स्टोर पहुंचने और कर्मचारियों को तिलक-कलावा लगवाने के बाद मामला वायरल हो गया। Lenskart के फाउंडर और सीईओ पेयुष बंसल ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि वायरल हो रहा दस्तावेज पुराना और आउटडेटेड है, यह कंपनी की वर्तमान पॉलिसी को नहीं दर्शाता। उन्होंने माफी मांगी और कहा कि अगर किसी को ठेस पहुंची तो वे खेद व्यक्त करते हैं। उन्होंने साफ कहा कि Lenskart की पॉलिसी में बिंदी, तिलक समेत किसी भी प्रकार के धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं है। इसके बाद Lenskart ने 18 अप्रैल को अपना नया इन-स्टोर स्टाइल गाइड जारी किया और इसे ट्विटर (X) पर सार्वजनिक रूप से शेयर किया। कंपनी ने लिखा कि “हमने आपकी बात सुनी है। आज हम अपने इन-स्टोर स्टाइल गाइड को स्टैंडर्डाइज कर रहे हैं और इसे सार्वजनिक तथा पारदर्शी तरीके से शेयर कर रहे हैं।”

संस्थापक और CEO के तौर पर, इस तरह की चूकों की ज़िम्मेदारी मेरी है। मैंने अपनी टीम से कहा है कि वे ऐसी सभी चीज़ों की और भी ज़्यादा सख्ती से समीक्षा करें, और मैं खुद यह पक्का करूँगा कि आगे से ऐसी कोई गलती न हो। हम इस बात की भी जाँच कर रहे हैं कि यह चीज़ हमारे ट्रेनिंग कंटेंट में कैसे शामिल हो गई। मैं यह बात बिल्कुल साफ कर देना चाहता हूँ। Lenskart किसी भी तरह की सम्मानजनक धार्मिक अभिव्यक्ति पर न तो कोई रोक लगाता है और न ही कभी लगाएगा। इसमें बिंदी, तिलक, या आस्था से जुड़े ऐसे ही दूसरे प्रतीक शामिल हैं। हमारी टीम के सदस्य हमेशा से अपनी आस्था को गर्व के साथ ज़ाहिर करने के लिए आज़ाद रहे हैं, और आगे भी हमेशा आज़ाद रहेंगे।
Peyush Bansal, CEO & Founder, Lenskart

ट्विटर पर जारी रिवाइज्ड इन-स्टोर स्टाइल गाइड में ज्यादातर नियम साफ-सुथरे और व्यवस्थित दिखने वाले रखे गए हैं लेकिन कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पुराने संस्करण में बिंदी पर रोक थी, जबकि नए संस्करण में अब स्पष्ट रूप से अनुमति दी गई है कि “धार्मिक, सांस्कृतिक या पारिवारिक निशान (जैसे बिंदी, तिलक, सिंदूर या कोई अन्य)” पहने जा सकते हैं। इसी तरह कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा जैसे सांस्कृतिक या धार्मिक आइटम्स को भी अनुमति दी गई है। कंपनी ने कहा कि ये गाइडलाइंस स्पष्ट रूप से और बिना किसी अस्पष्टता के हर कर्मचारी द्वारा धारण किए जाने वाले विश्वास और संस्कृति के हर प्रतीक का स्वागत करती हैं – बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब, टर्बन और अन्य – इन्हें अपवाद के रूप में नहीं बल्कि हमारी टीम की पहचान के रूप में। कंपनी ने जोर देकर कहा कि किसी भी कर्मचारी से कभी भी अपनी आस्था को दरवाजे पर छोड़ने को नहीं कहा जाएगा और अगर पुरानी कम्युनिकेशन से किसी को ठेस पहुंची तो वे गहरा खेद व्यक्त करते हैं।

यह पूरा मामला Lenskart के लिए एक सबक साबित हुआ है कि कर्मचारियों की धार्मिक भावनाओं और पहचान को कितना महत्व देना चाहिए, और कंपनी अब अपनी पॉलिसी को और अधिक समावेशी तथा पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठा रही है।

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