
नई दिल्ली- महिला सशक्तिकरण के एक कार्यक्रम में दौलत राम कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय की 19 वर्षीय छात्रा साराह शर्मा को स्लीवलेस कुर्ती पहनने के कारण केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया को सम्मानित करने के लिए मंच पर जाने से रोक दिया गया।
12 अप्रैल को श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में मेरा युवा भारत (MY Bharat) द्वारा आयोजित “नारी शक्ति: विकसित भारत की आवाज – सशक्त समावेशी लोकतंत्र” विषयक मॉक यूथ पार्लियामेंट में यह घटना हुई। कॉलेज की छात्रा साराह शर्मा को मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स की ओर से मुख्य अतिथि को सम्मानित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
साराह शर्मा के अनुसार, उन्होंने निमंत्रण स्वीकार किया और “पारंपरिक” ड्रेस कोड पहन वेन्यु पर पहुंची लेकिन मंच पर जाने से ठीक पहले मंत्रालय के अधिकारियों ने उन्हें उनकी स्लीवलेस पोशाक का हवाला देते हुए रोक दिया और उनकी जगह दूसरी छात्रा को भेज दिया। सारा का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमे वह घटना के बारे में जानकारी देते हुए कहती हैं कि " मिनिस्ट्री अधिकारियों ने मुझे देखा और कहा कि आपने तो स्लीवलेस पहन रखा है, आप उनको फेलिसीटेट नहीं कर सकती"।
साराह कहती हैं " मुझे यह सुनकर बहुत अजीब, डिसगस्टड फील हुआ , बहुत एम्बेरस फील हुआ क्योंकि मुझे सबके सामने बोला और आखिर में मुझे नहीं सम्मनित करने दिया गया, मुझे रिप्लेस कर दिया"। इतना ही नहीं साराह ने आगे भी बताया कि कार्यक्रम खत्म होने पर जब स्टूडेंट्स और कुछ महिलाएं फोटो खिंचवा रही थी तो मिनिस्ट्री के एक अन्य अधिकारी बोले, " यह देश इसलिए आगे नहीं बढ़ता है क्योंकि इस देश की औरतें एक एक घंटे फोटोज खिंचवा रही हैं...ऐसे लोग बात करते हैं वुमन एम्पोवेर्मेंट की, बिल पास करने की..मेरे को नहीं लगता इस बिल से ज्यादा कुछ चेंज आ पायेगा , लोगों का माइंडसेट नहीं बदलेगा तो, ऐसे ही रहेगा तो..."
उन्होंने यह भी बताया कि अधिकारियों द्वारा सबके सामने उनके कपड़ों पर की गई टिप्पणी से उन्हें “बहुत घिन और शर्मिंदगी” महसूस हुई।
इस घटना ने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस छेड़ दी है कि 33% महिला आरक्षण बिल जैसे विधायी प्रयासों और महिलाओं की पोशाक व स्वतंत्रता को लेकर समाज की वास्तविक सोच के बीच कितना अंतर है।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.
यहां सपोर्ट करें