
भोपाल। मध्यप्रदेश में महिलाओं के कल्याण और सशक्तीकरण के उद्देश्य से वर्ष 2007-08 में शुरू किया गया जेंडर बजट अब अपने मूल उद्देश्य से भटकता नजर आ रहा है। वित्त विभाग के हालिया ऑडिट में यह खुलासा हुआ है कि जेंडर बजट के तहत आवंटित बड़ी राशि उन कार्यों पर खर्च की जा रही है, जो सीधे तौर पर महिलाओं के सशक्तीकरण से जुड़े नहीं हैं। सड़कों का निर्माण, स्कूल भवन, जल जीवन मिशन जैसी सामान्य आधारभूत संरचना वाली योजनाओं में इस बजट का उपयोग किया गया है। यह स्थिति तब है जब जेंडर बजट का मूल मकसद महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य के स्तर पर सशक्त बनाना था।
सरकार की ओर से इस पर यह तर्क दिया जा रहा है कि इन योजनाओं का लाभ महिलाओं को भी मिलता है, इसलिए इन्हें जेंडर बजट में शामिल करना उचित है। हालांकि विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यह तर्क जेंडर बजट की मूल भावना के विपरीत है, क्योंकि यह बजट महिलाओं के लिए विशेष रूप से लक्षित योजनाओं के लिए बनाया गया था, न कि सामान्य विकास कार्यों के लिए। प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि बजट का उपयोग निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ही किया जा रहा है, लेकिन ऑडिट रिपोर्ट इस दावे पर सवाल खड़े करती है।
जेंडर बजट के मूल उद्देश्यों पर नजर डालें तो इसमें महिला स्वसहायता समूहों को केवल छोटे ऋण तक सीमित न रखते हुए उन्हें बाजार से जोड़ने, ब्रांडिंग और वित्तीय सहायता देने की बात कही गई थी। साथ ही महिलाओं को पारंपरिक कार्यों से हटाकर आईटी, लॉजिस्टिक्स और तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षित करने, कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य व पोषण पर विशेष ध्यान देने जैसे लक्ष्य तय किए गए थे। ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और महिलाओं को डिजिटल माध्यमों से सरकारी योजनाओं से जोड़ना भी इस बजट का हिस्सा था।
लेकिन वर्ष 2025-26 के व्यय आंकड़े इन लक्ष्यों से अलग तस्वीर पेश करते हैं। लगभग 4500 करोड़ रुपये जल जीवन मिशन पर खर्च किए गए, जिसे यह कहकर उचित ठहराया गया कि इससे ग्रामीण महिलाओं का रोजाना 2-3 घंटे का समय बचता है। इसी तरह 125 करोड़ रुपये भोपाल, इंदौर और ग्वालियर की सड़कों पर स्मार्ट लाइटिंग और सीसीटीवी लगाने में खर्च किए गए। 1017 करोड़ रुपये स्कूल भवन निर्माण पर खर्च हुए, जिसमें छात्राओं के लिए हाइजीन कॉर्नर बनाने का हवाला दिया गया। 215 करोड़ रुपये छात्राओं के लिए साइकिल खरीदने और 85 करोड़ रुपये सरकारी आवास निर्माण पर खर्च किए गए, जिन्हें महिला हित से जोड़कर दिखाया गया।
स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन बजट का टोटा!
वहीं दूसरी ओर, महिलाओं के लिए सीधे तौर पर बनाई गई योजनाएं जैसे वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन और ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसी पहलें अपेक्षित खर्च से वंचित रह गईं। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, इन योजनाओं के लिए आवंटित राशि का पूरा उपयोग नहीं किया गया। यहां तक कि वन स्टॉप सेंटर के सुदृढ़ीकरण के लिए जारी फंड का इस्तेमाल भी केवल वेतन और किराए के भुगतान तक सीमित रहा, जिससे इन केंद्रों की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।
ऑडिट में एक और गंभीर अनियमितता सामने आई है कि करीब 5000 करोड़ रुपये महिला कल्याण के नाम पर खर्च तो किए गए, लेकिन उनके उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) जमा नहीं किए गए। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि यह राशि वास्तव में किन कार्यों में और किस हद तक उपयोगी साबित हुई। इसके अलावा राज्य के कुल राजस्व का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा वेतन और पेंशन पर खर्च हो रहा है, और जेंडर बजट की राशि को महिला कर्मचारियों के वेतन में जोड़कर दिखाया गया है, जो पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
1.27 लाख करोड़ का है बजट
वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने 1.27 लाख करोड़ रुपये का जेंडर बजट निर्धारित किया है, जिसमें से 23,382 करोड़ रुपये ‘लाड़ली बहना’ योजना पर खर्च किए जाएंगे। हालांकि, गृह, ऊर्जा और परिवहन जैसे विभागों में जेंडर बजट का आवंटन बेहद कम है, और वहां भी इसका उपयोग विभागीय खर्चों में ही किया जा रहा है। कुल मिलाकर जेंडर बजट का लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा महिला एवं बाल विकास और स्कूल शिक्षा विभाग पर ही केंद्रित है, जिससे अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों की अनदेखी का संकेत मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जेंडर बजट को इस तरह सामान्य विकास कार्यों में समाहित किया जाता रहा, तो इसका मूल उद्देश्य कमजोर पड़ जाएगा। जेंडर बजट केवल आंकड़ों का खेल बनकर रह जाएगा और महिलाओं के वास्तविक सशक्तीकरण की दिशा में अपेक्षित बदलाव नहीं हो पाएगा। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि सरकार जेंडर बजट के उपयोग में पारदर्शिता लाए, लक्षित योजनाओं पर फोकस बढ़ाए और यह सुनिश्चित करे कि हर खर्च वास्तव में महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला हो।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.