
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकार रोज़ी ने एसीपी विवेक भगत पर कथित तौर पर अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया था। इसको लेकर पिछले दिनों से जोरदार विरोध प्रदर्शन चल रहा है और FIR की मांग लेकर पत्रकार धरना दे रहे हैं लेकिन शिकायत दर्ज करने की बजाय पुलिस ने रोज़ी समेत अन्य लोगों पर ही एफआईआर दर्ज कर दी गई है। पुलिस के मुताबिक मामले की जांच क्राइम ब्रांच करेगी।
इसी बीच दिल्ली पुलिस ने पत्रकारों के लिए एडवाइजरी जारी की कि प्रदर्शन में क्या-क्या करना चाहिए। पुलिस की सलाह में कहा गया विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के लिए भेजे गए सभी पत्रकारों को अपने संबंधित संगठनों द्वारा जारी वैध पहचान पत्र और/या वैध PIB/DIP एक्रेडिटेशन कार्ड साथ रखने को कहा गया है।
पुलिस का कहना है कि मीडिया कर्मी को अपनी पहचान के लिए, मौके पर मौजूद कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आसानी हो, इसके लिए अपने पहचान पत्र हर समय स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने चाहिए। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी उपस्थिति या गतिविधियों से पुलिस के कामकाज या कानून प्रवर्तन कर्मियों की आवाजाही में कोई बाधा न आए। तनावपूर्ण स्थितियों के दौरान, मौके पर मौजूद पत्रकारों को कवरेज और रिकॉर्डिंग करते समय उचित और सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए। उन्हें खुद को इस तरह से रखना चाहिए कि वे प्रदर्शनकारियों से स्पष्ट रूप से अलग दिखें।
इधर, जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था में तैनात दिल्ली पुलिस के जवानों ने एक नई रणनीति के तहत अपनी वर्दी से नेम टैग (नाम की पट्टियां) हटा दिए हैं। पुलिस प्रशासन ने कथित रूप से यह फैसला जवानों को सोशल मीडिया पर निशाना बनाए जाने और उनके परिवारों को अनावश्यक विवादों में घसीटे जाने से बचाने के लिए लिया है।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में हुए प्रदर्शनों के दौरान कई पुलिसकर्मियों की तस्वीरें और नाम सोशल मीडिया पर शेयर कर उन्हें ट्रोल किया गया था, जिससे उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को पहचान पत्र की पट्टी न लगाने की छूट दी है, ताकि वे बिना किसी दबाव के अपनी ड्यूटी कर सकें।
लेकिन दिल्ली पुलिस द्वारा मीडिया को दी जा रही सलाह पोस्ट के बाद लोगों ने पूछना शुरू कर दिया कि प्रदर्शन में कई पुलिसकर्मी बिना नेमप्लेट लगाए कैसे घूम रहे हैं। पुलिस ने नेमप्लेट न लगाने के बहाने बनाए। जंतर-मंतर से वायरल हो रहे कई वीडियो में प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों से उनका परिचय पूछते और वर्दी पर नाम न दिखने पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि नेमप्लेट न लगाने का कोई आदेश नहीं दिया गया। कुछ जूनियर कर्मियों ने कहा कि झड़प के दौरान नेमप्लेट का पिन कभी-कभी गिर जाता है या ढीला पड़ जाता है, जिससे चोट लगने का खतरा भी रहता है। कुछ ने सुरक्षा चिंता जताई कि सोशल मीडिया पर नाम सामने आने से परिवारों का पता लीक हो सकता है और डॉक्सिंग का खतरा पैदा हो सकता है। दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग ऑर्डर के अनुसार सभी रैंक के कर्मियों को दाईं छाती पर हिंदी और अंग्रेजी में नेमप्लेट लगाना अनिवार्य है।
इधर, इसी बीच एसीपी विवेक भगत का प्रमोशन कर उन्हें डीसीपी बनाये जाने की खबर के बाद प्रदर्शनकारियों और मीडिया में गुस्सा है। आरोपों के बीच यह पदोन्नति विवाद का विषय बनी हुई है। रोज़ी ने आरोप लगाया था कि एआईएसए कार्यकर्ता नेहा बोरा की गिरफ्तारी की रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने महिला कांस्टेबल न होने का सवाल पूछा तो एसीपी ने कथित रूप से उनका सीना दबाया और धक्का दिया। तीन महिला पत्रकारों की शिकायतें क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थीं। पुलिस ने वायरल सीसीटीवी फुटेज को एआई-जनरेटेड या मैनिपुलेटेड बताया था।
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