जंतर-मंतर पर महिला पत्रकार का आरोप- "एसीपी ने गलत तरीके से छुआ"; FIR की मांग पर थाने के बाहर धरने पर बैठे मीडिया कर्मी

पीडिता का आरोप है कि जंतर-मंतर के पास जब आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को बस में हिरासत में लिया जा रहा था, तब वह घटना की कवरेज कर रही थीं। इसी दौरान एसीपी विवेक भगत ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, अनुचित तरीके से छुआ और धक्का दिया।
घटना के विरोध में भारी संख्या में पत्रकार शनिवार शाम से संसद मार्ग थाने के बाहर धरना देकर बैठ गये। पत्रकारों ने आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
घटना के विरोध में भारी संख्या में पत्रकार शनिवार शाम से संसद मार्ग थाने के बाहर धरना देकर बैठ गये। पत्रकारों ने आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।सोशल मीडिया
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नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शन के दौरान एक महिला स्वतंत्र पत्रकार ने दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत पर गंभीर आरोप लगाया है। पत्रकार का कहना है कि जब वे आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा के हिरासत में लिए जाने की घटना की कवरेज कर रही थीं, तब एसीपी विवेक भगत ने उनके साथ बदसलूकी की और उन्हें गलत तरीके से छुआ।

शनिवार को पटेल चौक से जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश के दौरान पुलिस ने नेहा बोरा, योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण समेत करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया था। महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी और पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की के आरोप भी सामने आए।

पीड़ित महिला पत्रकार ने संसद मार्ग थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने कथित रूप से एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया। इस घटना के बाद थाने के बाहर सैकड़ों पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों का गुस्सा फूट पड़ा। वे तीन से चार घंटे तक थाने के बाहर बैठे रहे और सिर्फ इतनी मांग करते रहे कि महिला पत्रकार की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की जाए। पुलिस ने यह बुनियादी काम भी नहीं किया।

नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी, सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके, नेहा बोरा सहित कई जनों ने घटना की निंदा करते हुए दिल्ली पुलिस से अधिकारी के विरुद्ध एक्शन लेने की मांग की है।

राहुल गाँधी ने सोशल मीडिया x हैंडल पर पोस्ट में लिखा, " जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार ने एक पुलिस अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। घंटों से सैकड़ों पत्रकार सिर्फ़ इतनी माँग लेकर बैठे हैं कि FIR दर्ज कर ली जाए। ये तो पुलिस का बुनियादी काम है न? वो भी नहीं किया। आज ही जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोग हिरासत में लिए गए। महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी के आरोप हैं। कैमरे छीने गए, पत्रकार घसीटे गए। और ये पहली बार नहीं है - इससे पहले भी हमने वीडियो सबूतों के साथ देखा है कि पुलिस के अफसर महिलाओं के साथ घिनौनी बदसलूकी करते हैं। पूरी दिल्ली की महिलाएं, छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर घबराहट में हैं, सत्याग्रह कर रही हैं - मगर जिस पुलिस पर महिलाओं की हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी है, वही महिलाओं पर हाथ उठा रही है। और एक महिला की शिकायत दर्ज करने से जो सरकार डरती है - वो आख़िर किसकी हिफ़ाज़त कर रही है? दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है। अमित शाह जी, कहाँ हैं आप? जवाब आपको ही देना है।"

दलित कंटेंट क्रिएटर निशु आज़ाद ने भी पत्रकार के समर्थन में पोस्ट में लिखा, " मोदी जी कहते हैं “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।” लेकिन जब एक महिला पत्रकार, जो जनता के सवाल उठाने का काम करती है, वही खुद को सुरक्षित महसूस न करे और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाली पुलिस पर ही गंभीर आरोप लगे, तो सवाल उठता है हम भरोसा किस पर करें? यदि ACP विवेक भगत पर लगे आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो उनकी तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।"

आम आदमी पार्टी के विधायक कुलदीप कुमार ने बताया कि " मैं खुद रात में महिला पत्रकार की शिकायत दर्ज कराने के लिए पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुँचा। महिला पत्रकार को पुलिस मेडिकल के लिए अस्पताल लेकर गई है और पुलिस ने आश्वासन दिया है कि ACP भगत के खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी। लेकिन जब तक FIR दर्ज नहीं होती, तब तक पुलिस के इस आश्वासन पर भरोसा कैसे करें? सवाल है आखिर ACP विवेक भगत को कौन बचा रहा है? देश में कानून सबके लिए बराबर है। अगर एक महिला पत्रकार ने पुलिस अधिकारी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं, तो उनकी शिकायत पर तुरंत FIR दर्ज होनी चाहिए और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। FIR दर्ज होने तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा। अगर कार्रवाई में देरी हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। कानून की वर्दी पहनने वाला भी कानून से ऊपर नहीं हो सकता।"

घटना के विरोध में भारी संख्या में पत्रकार शनिवार शाम से संसद मार्ग थाने के बाहर धरना देकर बैठ गये। पत्रकारों ने आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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घटना के विरोध में भारी संख्या में पत्रकार शनिवार शाम से संसद मार्ग थाने के बाहर धरना देकर बैठ गये। पत्रकारों ने आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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