
मुंबई/तूतूकुडी- जवान बेटे की मौत क्या होती है, यह वही माता-पिता जान सकते हैं जिन्होंने उसे खोया है। मुंबई के आज़ाद मैदान में रवींद्र और सोनाली वाकोडे अपने 20 साल के बेटे साहिल की तस्वीर थामे भूखे बैठे हैं। साहिल आईआईटी बॉम्बे में बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र थे। 18 सितंबर को संस्थान के हॉस्टल रूम में साहिल ने आत्महत्या की।
दूसरी ओर, तमिलनाडू के आरुमुगामंगलम में चंद्रशेखर और तमिलसेल्वी अपने बेटे 27 साल के लाडले केविन की तस्वीर रखे धरने पर हैं। केविन एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे, जिनकी जुलाई 2025 में तिरुनेलवेली में कथित तौर पर जातिगत ऑनर किलिंग के तहत बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।
धरने पर बैठे माता पिता के हाथों में अपने बेटों की तस्वीर और आँखों में बेबसी है और दोनों के सामने एक ही सवाल है: क्या उनके बेटे को इंसाफ़ मिलेगा? अपने बेटों को खोने के गम के साथ इन्हें अब इंसाफ की लड़ाई भी लड़नी है। इन्हें उसी सिस्टम से न्याय माँगना है, जिससे दलित और हाशिये के परिवारों को अक्सर लड़कर ही कुछ मिलता है। इसलिए जो भी हाथ बढ़ाता है, चाहे नेता हो, आयोग हो या कोई आम इंसान, ये उसमें उम्मीद की एक किरण देखते हैं कि शायद अब इंसाफ़ मिल जाए। केविन की माँ और पिता ने रोते हुए कहा कि वे एक केविन को खो चुके हैं और अब कोई दूसरा बच्चा ऐसे न जाए। साहिल के पिता का कहना है कि जब तक आरोपियों की गिरफ़्तारी नहीं होती, अनशन जारी रहेगा।
दो शहर, दो धरने, पर माँ-बाप का दर्द एक: बेटे चले गए, अब बस इंसाफ़ की आस बाक़ी है।
27 साल के आईटी इंजिनियर केविन सेल्वगणेश थूथुकुडी ज़िले के एरल के पास आरुमुगामंगलम के रहने वाले थे। 27 जुलाई 2025 को उनकी तलवार जैसे हथियार से हत्या कर दी गई थी। वे अनुसूचित जाति से थे और एक युवती से उनका प्रेम था। युवती के छोटे भाई सुरजीत को हत्या के आरोप में गिरफ़्तार किया गया। हत्या के कुछ ही घंटों के भीतर सुरजीत ने थाने में आत्मसमर्पण कर दिया था। मामले में सुरजीत के माता-पिता, सरवनन और कृष्णकुमारी, भी आरोपी बनाए गए थे। दोनों पुलिस में थे। कृष्णकुमारी तमिलनाडु विशेष पुलिस बल में सब-इंस्पेक्टर थीं और उन्हें सीबी-सीआईडी ने घटना के नौ महीने बाद गिरफ़्तार किया था।
सीबी-सीआईडी की जाँच के बाद अदालत में बड़ी चार्जशीट दाखिल हुई। 800 पन्नों की इस चार्जशीट में सीसीटीवी फ़ुटेज, फ़ॉरेंसिक सबूत और 83 गवाहों के बयान शामिल बताए गए हैं। मामले की सुनवाई तिरुनेलवेली की एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत में चल रही थी। अभियोजन का आरोप था कि वारदात के बाद सुरजीत ने अपने पिता को बताया और माता-पिता ने उससे मिलकर कपड़े व मोबाइल नष्ट करने और दोपहिया वाहन की नंबर प्लेट हटाने को कहा।
लेकिन मंगलवार, 29 सितंबर को मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के न्यायमूर्ति आर. विजयकुमार ने सरवनन और कृष्णकुमारी के ख़िलाफ़ चार्जशीट रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि उन्हें अपराध से जोड़ने वाले सबूत नहीं हैं। फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय का हवाला देते हुए कहा गया कि मोबाइल टावर की जानकारी केवल टावर के दायरे को दर्शाती है, फ़ोन की सटीक लोकेशन को नहीं। इस आदेश के साथ दोनों हत्या के मामले से बरी-मुक्त (डिस्चार्ज) हो गए। हालाँकि अदालत ने सुरजीत के रिश्तेदार जयपाल की वह याचिका ख़ारिज कर दी, जिसमें उसने अपने ख़िलाफ़ चार्जशीट रद्द करने की माँग की थी। कोर्ट ने कहा कि जयपाल की साज़िश में भूमिका का सवाल ट्रायल में तय होगा।
फ़ैसले के बाद केविन के पिता चंद्रशेखर और माँ तमिलसेल्वी धरने पर बैठ गए। वे आरुमुगामंगलम में अपने घर के सामने केविन की तस्वीर रखकर बैठे हैं। वे घर के सामने एक बरगद के पेड़ के नीचे बैठे हैं और कहते हैं कि सबूतों के अभाव में आरोप रद्द कर दिए गए। तमिलसेल्वी कहती हैं, "हम इतने दिनों से किसलिए लड़ रहे थे? सबूत कम होने की बात कहकर चार्जशीट रद्द कर दी गई है। अगर ऐसा है, तो हमें न्याय कहाँ मिला?"
विरोध कर रहे माता-पिता ने सवाल उठाया कि अगर मामले में सबूत कम थे, तो गिरफ्तारियाँ कैसे की गईं। उन्होंने CBCID से जाँच जारी रखने और और सबूत इकट्ठा करने की मांग की। तमिलसेल्वी ने कहा, "चूँकि इस मामले में शामिल लोग पुलिस अधिकारी हैं, इसलिए उनकी भूमिका की भी अच्छी तरह से जाँच होनी चाहिए। जिन घटनाओं से हमें लगता है कि मामले में सबूत नष्ट किए गए, उनकी भी जाँच होनी चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा, "हमारी किसी से कोई निजी दुश्मनी नहीं है। हम न्याय और निष्पक्षता में विश्वास करते हैं। हम अब तक सिर्फ़ न्याय के आधार पर लड़ रहे हैं। हम अदालत के फ़ैसले का सम्मान करते हैं। साथ ही, हमें अपने संदेहों और सवालों के सही जवाब चाहिए।"
तमिलसेल्वी ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से अपील की कि वे दखल दें, सरकार की ओर से अपील शुरू करें और आगे की जाँच के लिए कदम उठाएँ। उन्होंने कहा कि उनका विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक उनके सवालों के जवाब नहीं मिल जाते और उनके बेटे को न्याय नहीं मिल जाता।
मामले में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई है। वीसीके नेता थोल. थिरुमावलवन ने इस फ़ैसले को "चौंकाने वाला" बताया। उन्होंने कहा कि ट्रायल शुरू होने से पहले चार्जशीट रद्द करना ग़लत मिसाल बनेगा। पहले भी केविन के परिवार के पास नेता पहुँचते रहे हैं। घटना के बाद कनिमोझी सांसद और मंत्री के.एन. नेहरू व अनीता राधाकृष्णन ने परिवार से मुलाक़ात की थी, और तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने फ़ोन पर माता-पिता को सांत्वना दी थी। पहली पुण्यतिथि पर सामाजिक न्याय मंत्री वन्नी अरासु भी परिवार से मिलने आरुमुगामंगलम पहुँचे थे।
यवतमाल के रहने वाले रवींद्र और सोनाली वाकोडे का 20 वर्षीय बेटा साहिल आईआईटी बॉम्बे में बी.टेक द्वितीय वर्ष का छात्र था। 18 सितंबर की शाम वह हॉस्टल के अपने कमरे में मृत पाया गया। उसी दिन मिड-सेमेस्टर परीक्षा में कथित तौर पर मोबाइल से ChatGPT इस्तेमाल करते हुए उसे पकड़ा गया था। माता-पिता का आरोप है कि साहिल ने संस्थान में जातिगत भेदभाव की शिकायत की थी।
पुलिस की एफ़आईआर में प्रोफ़ेसर सूर्यनारायण दूल्ला का नाम है। उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज है। एफ़आईआर में जातिगत भेदभाव का आरोप भी बताया गया है। निष्पक्ष जाँच के लिए प्रोफ़ेसर दूल्ला को छुट्टी पर भेज दिया गया है। संस्थान के बोर्ड ने 10 सदस्यीय जाँच समिति बनाई है, जबकि मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच मामले की जाँच कर रही है। क्राइम ब्रांच सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य सबूतों की जाँच कर रही है। क्राइम ब्रांच अब तक करीब 20 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है, और अनुसूचित जाति राष्ट्रीय आयोग (एनसीएससी) ने विस्तृत जाँच रिपोर्ट माँगी है। जाँच के हवाले से यह भी बताया गया है कि साहिल ने एक महिला मित्र से फ़ोन पर बात करते हुए परीक्षा में "नकल की कोशिश" पर पछतावा जताया था।
अनशन की शुरुआत 24 सितंबर को हुई थी। उससे पहले माता-पिता एनसीएससी अध्यक्ष किशोर मकवाना से मिले और त्वरित जाँच की माँग का ज्ञापन सौंपा। वह अनशन संक्षिप्त रहा। इसके बाद 28 सितंबर, सोमवार से आज़ाद मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू हुआ, जो अभी जारी है। माता-पिता की मुख्य माँग है कि प्रोफ़ेसर दूल्ला और आईआईटी बॉम्बे के निदेशक शिरीष केदारे को गिरफ़्तार किया जाए। रवींद्र वाकोडे ने कहा है कि जब तक दोनों गिरफ़्तार नहीं होते, अनशन जारी रहेगा। परिवार ने मामले की सीबीआई जाँच की भी माँग की है। उन्होंने सीसीटीवी फ़ुटेज लीक करने वालों पर कार्रवाई की भी माँग रखी है। साथ ही मामले की सुनवाई फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराने की माँग है।
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने आज़ाद मैदान पहुँचकर परिवार को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि साहिल और दर्शन सोलंकी की मौतों ने संस्थान में छात्र सुरक्षा और जवाबदेही पर चिंता बढ़ाई है। गुरुवार को धरना स्थल पर वंचित बहुजन अघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर पहुंचे और साहिल के माता-पिता को हिम्मत दी। उन्होंने कहा, "साहिल बहुत होशियार छात्र था, जैसा कि पिछली परीक्षाओं में उसके रिकॉर्ड से पता चलता है। इस बार, मैंने मामले के बारे में वकीलों से भी पूरी जानकारी ली। इस मामले में पुलिस की जांच निराशाजनक रही है। आरोपियों को न तो पूछताछ के लिए बुलाया गया है और न ही उन्हें अदालत के सामने पेश किया गया है। क्या इतने संवेदनशील मामले में फैसला मुख्यमंत्री के हाथ में है? यह देखना होगा। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बिना पुलिस ऐसी जांच नहीं करती है।"
केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने फ़ोन पर माता-पिता से बात कर न्याय का आश्वासन दिया। परिवार के वकील निखिल कांबले ने कहा था कि सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं आया। कैंपस में छात्र भी जाँच प्रक्रिया में बदलाव और शिकायत निवारण व्यवस्था सुधारने की माँग कर रहे हैं।
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