
नई दिल्ली: राजधानी के मोतीनगर इलाके में एक दलित महिला कुक को रेस्तरां में खाने की खराब क्वालिटी की शिकायत के बाद बकाया वेतन नहीं देने और कैफे मालिक द्वारा उसपर चोरी का इलज़ाम लगाकर पुलिस केस करने का मामला सुलझ गया है।
द मूकनायक में दलित महिला कुक शीतल सिंह की शिकायत और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों पर खबर प्रकाशित होने के बाद मामले में तेजी से कार्रवाई हुई। शीतल के अनुसार, 14 सितंबर की शाम को मोती नगर थाने में पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौता हुआ। कैफे की ओर से उनके बकाया वेतन का भुगतान किया गया, जबकि कैफे मालिक ने शीतल के खिलाफ की गई चोरी की शिकायत वापस लेने की लिखित सहमति दी। शीतल ने भी अपनी शिकायत वापस ले ली है।
शीतल ने द मूकनायक को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उनके मुताबिक, अब दोनों पक्षों ने लिखित रूप से यह सहमति दी है कि वे एक-दूसरे के खिलाफ आगे कोई कानूनी कार्रवाई या शिकायत नहीं करेंगे। यह तुरंत समाधान द मूकनायक की तेज़ रिपोर्ट और सपोर्ट की वजह से ही संभव हो पाया।
इससे पहले शीतल ने द मूकनायक को बताया था कि उन्हें लगातार फोन कर चोरी से संबंधित मामले में थाने आने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने दावा किया था कि वह अपने बकाया वेतन की मांग कर रही थीं और इसी बीच उनके खिलाफ चोरी के आरोप लगाए गए।
इसी मामले में द मूकनायक ने शीतल की शिकायत के आधार पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी। रिपोर्ट में कैफे संचालक और दिल्ली पुलिस की सेवारत महिला कांस्टेबल पर शीतल द्वारा लगाए गए आरोपों को सामने रखा गया था। शीतल ने वेतन रोकने, जातिगत उत्पीड़न और पुलिस पद के कथित प्रभाव के इस्तेमाल सहित कई आरोप लगाए थे।
रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद शीतल ने बताया कि मामले को मोती नगर थाने में SI की मौजूदगी में दोनों पक्षों की सहमति से बंद कर दिया गया है।
शीतल के अनुसार, पुलिस ने दोनों पक्षों के लिखित बयान लिए। इन बयानों में बकाया राशि ₹17,741 का भुगतान किए जाने और विवाद समाप्त होने की बात दर्ज की गई।
शीतल ने द मूकनायक को बताया कि कैफे मालिक ने लिखित रूप से चोरी से संबंधित शिकायत को वापस लेने और मामले को समझौते के जरिए समाप्त करने की बात कही। पुलिस थाने में हुए इस समझौते के बाद दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ आगे कोई शिकायत या कानूनी कार्रवाई नहीं करने की सहमति दी गई।
शीतल ने कहा कि उनके अनुसार अब दोनों पक्षों की ओर से कोई कार्यवाही लंबित नहीं है। शीतल ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए यह भी बताया कि कार्यवाही के दौरान स्थानीय दलित समुदाय से जुड़े एक व्यक्ति भी हस्तक्षेप के लिए थाने पहुंचे थे। शीतल के मुताबिक, चोरी और कथित नकद भुगतान के दावों की पुष्टि के लिए जब कैफे का CCTV फुटेज उपलब्ध कराने की मांग की गई तो प्रबंधन की ओर से कैमरे काम नहीं करने की बात कही गई।
शीतल की मूल शिकायत में कैफे में ₹22,000 मासिक वेतन पर काम करने, वेतन रोके जाने, जातिगत भेदभाव और कथित धमकी के आरोप लगाए गए थे। शिकायत में यह भी कहा गया था कि वेतन मांगने के बाद कैफे संचालक ने उनके खिलाफ दाल, तेल और कॉफी पाउच चोरी करने की शिकायत दर्ज कराई।
समझौते के बाद शीतल ने द मूकनायक को कहा कि मामले का तत्काल समाधान रिपोर्ट प्रकाशित होने और मामले को सार्वजनिक किए जाने के बाद संभव हुआ। उन्होंने द मूकनायक के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि रिपोर्ट ने उनकी आवाज को सामने रखने में मदद की।
शीतल ने यह भी कहा कि उनके अनुभव ने उन्हें यह महसूस कराया कि अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले कमजोर आर्थिक स्थिति के श्रमिकों को अपने मेहनत के पैसे मांगने पर भी दबाव और पुलिस शिकायतों का सामना करना पड़ सकता है।
दिल्ली के मोती नगर स्थित विधि कैफे में काम करने वाली अनुसूचित जाति की महिला कुक शीतल सिंह ने कैफे संचालक विजय सिंह और दिल्ली पुलिस में तैनात महिला कांस्टेबल दिव्या पर गंभीर आरोप लगाए थे। शीतल के मुताबिक उसे ₹22,000 मासिक वेतन पर मुख्य कुक के रूप में रखा गया था और उसने कैफे में कथित तौर पर खराब/बासी खाद्य सामग्री और पाम ऑयल के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी। उसका आरोप था कि उसकी जाति का पता चलने के बाद उसके साथ व्यवहार बदल गया और उससे खाना बनाने के अलावा झाड़ू-पोंछा, गहरी सफाई और देर रात तक गंदे बर्तन धोने जैसे काम कराए जाने लगे।
शीतल ने यह भी आरोप लगाया कि उसका ₹22,000 वेतन रोका गया और जब उसने काम छोड़कर बकाया राशि मांगी तो उसके खिलाफ दाल, तेल और कॉफी के पाउच चोरी करने की शिकायत कर दी गई, जबकि वह कथित नकद भुगतान के दावे को भी चुनौती दे रही थी। उसने महिला कांस्टेबल दिव्या पर कैफे से जुड़े होने और पुलिस पद का इस्तेमाल कर उसे धमकाने का आरोप लगाया। शीतल ने पुलिस और प्रशासन से कार्रवाई, सुरक्षा और बकाया वेतन दिलाने की मांग की थी।
द मूकनायक में मामला प्रकाशित होने के बाद, शीतल के अनुसार पुलिस ने मोती नगर थाने में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया; उसके अनुसार ₹17,741 का लंबित वेतन भुगतान कर दिया गया, कैफे प्रबंधन ने चोरी की शिकायत वापस लेने की लिखित पुष्टि की और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ आगे कोई कानूनी कार्रवाई न करने का लिखित अंडरटेकिंग दिया। शीतल ने यह भी बताया कि पहले उसे चोरी के मामले में थाने आने के लिए लगातार फोन आ रहे थे, लेकिन खबर प्रकाशित होने के बाद उसी दिन SI की मौजूदगी में विवाद का निपटारा कर दिया गया। CCTV फुटेज को लेकर भी उसने सवाल उठाए और कहा कि जब उसने कथित चोरी और नकद भुगतान के दावों की पुष्टि के लिए CCTV मांगा तो प्रबंधन ने कैमरे खराब होने की बात कही। ये सभी आरोप और घटनाक्रम शीतल के बयान तथा उसके द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों पर आधारित हैं।
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