आदिवासियों की सेवा के लिए मुम्बई छोड़ ओडिशा में बसे डॉक्टर सीक्वेरा और दलित एक्टिविस्ट लक्ष्मण नाइक क्यों हुए गिरफ्तार? क्या कहते हैं नागरिक समूह

डॉक्टर और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता रैंडल सीक्वेरा और दलित कार्यकर्ता लक्ष्मण नाइक को 16 अक्टूबर को ओडिशा में बॉक्साइट खनन विरोधी प्रदर्शनों के बीच गिरफ्तार किया गया।
सीक्वेरा और लक्ष्मण नाइक पर हत्या का प्रयास, घातक हथियार के साथ दंगा, डकैती और जान से मारने की धमकी देकर आपराधिक धमकी के आरोप हैं। पुलिस अधिकारी ने भी हत्या के प्रयास, दंगे और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज होने की बात कही।
सीक्वेरा और लक्ष्मण नाइक पर हत्या का प्रयास, घातक हथियार के साथ दंगा, डकैती और जान से मारने की धमकी देकर आपराधिक धमकी के आरोप हैं। पुलिस अधिकारी ने भी हत्या के प्रयास, दंगे और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज होने की बात कही।
Published on: 

नई दिल्ली - ओडिशा के कालाहांडी जिले में आदिवासी समुदायों के बीच स्वास्थ्य सेवा देने वाले डॉक्टर रैंडल सेक्वेरा और दलित कार्यकर्ता लक्ष्मण नायक 16 अक्टूबर की रात गिरफ्तार किए गए। दोनों वर्तमान में रायगड़ा सब-जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस ने उन्हें अप्रैल 2026 के एक हिंसक झड़प से जोड़कर आरोप लगाया है। पुलिस का कहना है सेक्वेरा आदिवासियों को सरकार के खिलाफ भड़का रहे थे और नाइक लोगों को गुमराह कर रहे हैं जबकि मानवाधिकार संगठनों और नागरिक समूहों ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया और मंशा पर सवाल उठाए हैं।

16 अक्टूबर रात करीब 10:45–11 बजे कालाहांडी के भवानीपटना स्थित डॉ. सेक्वेरा के घर पर पुलिस दो जीपों में पहुँची, जहाँ नाइक भी ठहरे हुए थे। ओरिसा पोस्ट के अनुसार पुलिस ने सूचना मिलने पर दोनों को 16 अक्टूबर की रात उनके किराये के मकान से पकड़ा। कई अधिकारी सिविल ड्रेस में थे। उनके मोबाइल फोन छीन लिए गए और उन्हें भवानीपटना टाउन पुलिस स्टेशन ले जाया गया। परिवार और वकीलों को 17 अक्टूबर सुबह 6 बजे से शाम करीब 6:30 बजे तक उनके ठिकाने की जानकारी नहीं थी। उसी शाम उन्हें रायगड़ा के सब-डिविजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

पुलिस के अनुसार यह गिरफ्तारी काशीपुर पुलिस स्टेशन के केस नंबर 85/2026 के संबंध में की गई। यह केस 6–7 अप्रैल 2026 की रात रायगढ़ा जिले के कांतामल (कुटामल) गाँव में हुई हिंसक झड़प से जुड़ा है। उस समय पुलिस वेदांता की प्रस्तावित सिजिमाली बॉक्साइट खदान के लिए सड़क परियोजना के सिलसिले में गाँव में दाखिल हुई थी। ग्रामीणों ने लाठीचार्ज और आँसू गैस का आरोप लगाया, जबकि पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने उन पर हमला किया। पुलिस के अनुसार भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आँसू गैस का इस्तेमाल हुआ और कई लोग और पुलिसकर्मी घायल हुए। यह घटना सिजीमाली बॉक्साइट रिजर्व तक पहुंच मार्ग के निर्माण के विरोध से जुड़ी थी। पुलिस का कहना है कि मूल FIR में डॉ. सेक्वेरा और लक्ष्मण नायक का नाम नहीं था। जांच के दौरान उनकी भूमिका सामने आई।

पुलिस का कहना है कि डॉ. सेक्वेरा और लक्ष्मण नायक ने अप्रैल में कांतामल गाँव में आदिवासियों को पुलिसबल पर हमले के लिए उकसाया। कार्यकर्ता संगठन इसे झूठा मामला बताते हैं।
पुलिस का कहना है कि डॉ. सेक्वेरा और लक्ष्मण नायक ने अप्रैल में कांतामल गाँव में आदिवासियों को पुलिसबल पर हमले के लिए उकसाया। कार्यकर्ता संगठन इसे झूठा मामला बताते हैं।

डॉ सीक्वेरा और लक्ष्मण नाइक पर हत्या का प्रयास, घातक हथियार के साथ दंगा, डकैती और जान से मारने की धमकी देकर आपराधिक धमकी के आरोप हैं। पुलिस अधिकारी ने भी हत्या के प्रयास, दंगे और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज होने की बात कही।

दोनों की गिरफ़्तारी को मानवाधिकार और आदिवासी अधिकार संगठन गलत और अवैध बताते हुए दोनों की रिहाई की मांग कर रहे हैं। पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL), कंसर्न्ड सिटिजन्स कमेटी ओडिशा, मेडिको फ्रेंड सर्कल और अन्य संगठनों ने गिरफ्तारी की निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि गिरफ्तारी बिना वारंट या कारण बताए की गई और यह सिजीमाली बॉक्साइट खनन के विरोध को दबाने का हिस्सा है। वे कहते हैं कि पिछले तीन साल में इस क्षेत्र में दर्जनों केस दर्ज हुए और सैकड़ों आदिवासी-दलित लोगों को जेल भेजा गया है।

मेडिको फ्रेंड सर्किल के एक बयान के अनुसार दोनों को बिना वारंट, गिरफ्तारी मेमो या कारण बताए रात भर रखा गया और वकीलों व परिवार से मिलने नहीं दिया गया। संगठन के अनुसार किसी का नाम मूल एफआईआर में नहीं था और सीक्वेरा के पास एक अन्य मामले में अग्रिम जमानत पहले से है।

पीयूसीएल ने गिरफ्तारी की निंदा की। उसके अनुसार यह सिजिमाली में वेदांता की खदान का विरोध करने वाले दलित-आदिवासी नेताओं की गिरफ्तारियों की ताज़ा कड़ी है। कार्यकर्ता दावा करते हैं कि 2023 में प्रतिरोध शुरू होने के बाद से 100 से अधिक दलित-आदिवासियों को गिरफ्तार किया गया और 43 मामले दर्ज हुए।

दक्षिण-पश्चिम रेंज के डीआईजी अखिलेश्वर सिंह ने पीटीआई से कहा कि गिरफ्तार लोग निर्दोष नहीं थे। उनके मुताबिक डॉ. सीक्वेरा चिकित्सा सेवा देने के बजाय आदिवासियों को सरकार के खिलाफ भड़का रहे थे और नाइक लोगों को गुमराह कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कालाहांडी और रायगढ़ा में कई डॉक्टर काम करते हैं, पर सिर्फ डॉ. सीक्वेरा को गिरफ्तार किया गया। यातना के आरोप पर उन्होंने कहा कि दोनों ने अदालत में मजिस्ट्रेट के सामने ऐसी कोई शिकायत नहीं की। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि दोनों का नाम एफआईआर में नहीं था, लेकिन बाद की जाँच में उनकी संलिप्तता सामने आई।

रायगढ़ा-कालाहांडी के संगठन आरटीएफसी के अनुसार ओडिशा हाईकोर्ट पहले सीक्वेरा के रायगढ़ा में प्रवेश पर रोक लगाने वाला जिला आदेश रद्द कर चुका है। सीक्वेरा की माँ नैंसी सीक्वेरा ने कहा कि उनका बेटा आदिवासियों के अधिकारों और गरिमा के लिए लड़ रहा था और उन्हें न्याय की उम्मीद है।

सिजीमाली पहाड़ी क्षेत्र 2023 से बॉक्साइट खनन को लेकर विवादित रहा है। स्थानीय समुदाय जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा का दावा करते रहे हैं।

सिजिमाली विवाद की पृष्ठभूमि

2023 में ओडिशा ने रायगढ़ा और कालाहांडी में फैला सिजिमाली बॉक्साइट ब्लॉक वेदांता लिमिटेड को नीलामी में दिया। एक रिपोर्ट के अनुसार लीज़ लगभग 1,549 हेक्टेयर की है और इसमें 50 साल तक सालाना करीब 90 लाख टन बॉक्साइट निकलना है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम सभा की सहमति जाली हस्ताक्षरों से ली गई। बिज़नेस एंड ह्यूमन राइट्स रिसोर्स सेंटर के अनुसार आरोप है कि 8 दिसंबर 2023 की कथित ग्राम सभा बैठकों के प्रस्ताव जाली थे।

लोकतांत्रिक विरोध को आपराधिक ठहराने का चिंताजनक चलन

डॉ. सेक्वेरा (39) का जन्म कर्नाटक में हुआ और वे मुंबई में बड़े हुए। उन्होंने बेंगलुरु के सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज से MBBS किया। 2017 में वे कालाहांडी आ गए। वे दूर-दराज के आदिवासी गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाते रहे, गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों का इलाज करते रहे तथा स्थानीय छात्रों को मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी में मदद करते रहे। वे मेडिको फ्रेंड सर्कल और जन स्वास्थ्य अभियान से जुड़े रहे।

लक्ष्मण नायक माँ माटी माली सुरक्षा मंच और समाजवादी जन परिषद से जुड़े दलित कार्यकर्ता हैं। वे मार्शल आर्ट ट्रेनर भी हैं।

'कैम्पेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन' (CASR) ने डॉ. रैंडल सेक्वेरा और लक्ष्मण नायक की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की। संगठन का कहना है कि इन गिरफ्तारियों को 'नियमगिरि सुरक्षा समिति' के अध्यक्ष लाडा सिकाका और 'नियमगिरि सुरक्षा समिति' तथा 'माँ माटी माली सुरक्षा मंच' के सलाहकार लिंगराज आज़ाद की लगातार हो रही जेल की कैद के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। आदिवासियों की ज़मीन और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने वाले आंदोलनों से जुड़े कई कार्यकर्ताओं की हिरासत, ओडिशा में लोकतांत्रिक विरोध को आपराधिक ठहराने के एक चिंताजनक चलन को दर्शाती है।

दमन का एक राष्ट्रव्यापी पैटर्न

यह दमन केवल ओडिशा तक सीमित नहीं है। पूरे भारत में, जो समुदाय कॉरपोरेट द्वारा ज़मीन हड़पने, खनन, बड़े बांधों, जबरन विस्थापन और जंगलों तथा जैव-विविधता के विनाश का विरोध कर रहे हैं, उन्हें पुलिस हिंसा, झूठे मुकदमों और लंबी जेल की सज़ा का सामना करना पड़ रहा है।

अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित सियांग मेगा-डैम से लेकर असम के काजीरंगा में प्रस्तावित होटल परियोजना के खिलाफ संघर्ष तक, और ओडिशा से लेकर मध्य प्रदेश तथा अन्य खनिज-समृद्ध आदिवासी क्षेत्रों तक, अपनी पुश्तैनी ज़मीन और आजीविका की रक्षा करने वाले लोगों को अब राज्य और कॉरपोरेट हितों के लिए खतरा माना जाने लगा है।

कार्यकर्ताओं को 'अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट' (UAPA), 'नेशनल सिक्योरिटी एक्ट' (NSA) और अन्य कड़े सुरक्षा कानूनों के तहत मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है। यहाँ तक कि जहाँ आतंकवाद-विरोधी कानून लागू नहीं किए जाते, वहाँ भी कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने और जन-आंदोलनों को कमज़ोर करने के लिए कई आपराधिक मामले दर्ज किए जाते हैं और पुलिस द्वारा बार-बार परेशान किया जाता है।

CASR का कहना है कि संदेश स्पष्ट है: जो लोग कॉरपोरेट लूट का विरोध करते हैं और लोगों की ज़मीन, जंगलों, पानी और आजीविका की रक्षा करते हैं, उन्हें अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए दंडित किया जा रहा है। सरकारें मूल निवासी और आदिवासी समुदायों के अधिकारों के बजाय कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दे रही हैं, जबकि असहमति को दबाने के लिए राज्य की मशीनरी का इस्तेमाल तेज़ी से किया जा रहा है।

सीक्वेरा और लक्ष्मण नाइक पर हत्या का प्रयास, घातक हथियार के साथ दंगा, डकैती और जान से मारने की धमकी देकर आपराधिक धमकी के आरोप हैं। पुलिस अधिकारी ने भी हत्या के प्रयास, दंगे और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज होने की बात कही।
"आप दमन और जातिवाद के प्रतीक न बनें": सहिल वाकोडे मामले में IIT बॉम्बे निदेशक को खुला पत्र, 84 संगठनों ने कहा- जवाबदेह बनिए!
सीक्वेरा और लक्ष्मण नाइक पर हत्या का प्रयास, घातक हथियार के साथ दंगा, डकैती और जान से मारने की धमकी देकर आपराधिक धमकी के आरोप हैं। पुलिस अधिकारी ने भी हत्या के प्रयास, दंगे और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज होने की बात कही।
TM Student Voice | असहयोग की कोख से जन्मा जामिया, 20 साल से अपने छात्रों की चुनी हुई आवाज़ का इंतज़ार!
सीक्वेरा और लक्ष्मण नाइक पर हत्या का प्रयास, घातक हथियार के साथ दंगा, डकैती और जान से मारने की धमकी देकर आपराधिक धमकी के आरोप हैं। पुलिस अधिकारी ने भी हत्या के प्रयास, दंगे और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज होने की बात कही।
यूपी के बॉन्डेड डॉक्टरों की हड़ताल का 11वां दिन, 7 दिन से अनशन लेकिन सरकार ने अब तक न पूछा हाल!
सीक्वेरा और लक्ष्मण नाइक पर हत्या का प्रयास, घातक हथियार के साथ दंगा, डकैती और जान से मारने की धमकी देकर आपराधिक धमकी के आरोप हैं। पुलिस अधिकारी ने भी हत्या के प्रयास, दंगे और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज होने की बात कही।
कमज़ोर होती सेहत पर हौसले बुलंद : JNU में 16 दिन से अनशन पर 7 छात्र, अब राष्ट्रपति तक पहुंची गुहार | TM Special

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक को सब्सक्राइब करें

'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।

यहां सब्सक्राइब करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com