
नई दिल्ली- वंचित बहुजन अघाड़ी के अध्यक्ष और बाबासाहेब आंबेडकर के प्रपौत्र प्रकाश आंबेडकर ने यूजीसी (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 को लेकर एक भावुक पोस्ट साझा की है, जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन नए नियमों पर लगाई गई रोक की कड़ी आलोचना की है। यह पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उनकी ओर से की गई है, जहां उन्होंने जातिवादी विरोध और अदालती फैसले को सामाजिक न्याय के खिलाफ हमला बताया है।
यूजीसी ने जनवरी 2026 में नए नियम जारी किए थे, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकना, पहचानना और उस पर कार्रवाई करना था। ये नियम जाति, धर्म, लिंग, नस्ल, जन्मस्थान और दिव्यांगता आधारित भेदभाव को कवर करते थे, खासकर SC, ST, OBC और PwD समुदायों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने पर फोकस था। इनमें Equal Opportunity Centres, Equity Committees और हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं।
हालांकि, सवर्ण जाति समूहों और कुछ संगठनों ने इनका विरोध किया, दावा किया कि ये केवल जाति-आधारित भेदभाव (विशेषकर SC/ST/OBC के खिलाफ) पर फोकस करते हैं और सामान्य वर्ग के लिए असमान हैं। विरोध प्रदर्शन हुए और सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को इन नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि नए नियम "vague" हैं, "misuse" के लिए susceptible हैं और समाज को विभाजित कर सकते हैं।
बहुजन समाज का सामाजिक न्याय की लड़ाई में निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए प्रकाश अम्बेडकर ने कुछ चुभते हुए सवाल पूछे; एक लम्बे पोस्ट में उन्होंने लिखा:
"तुम लोग क्या झक मार रहे हो?!
यूजीसी ने एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने, पहचानने और उस पर कार्रवाई करने के लिए नए नियम जारी किए। आरएसएस और सवर्ण जातिवादी समूह ने यह प्रचारित किया कि ये नए नियम केवल जाति-आधारित भेदभाव पर ही लागू होते हैं, जबकि वास्तव में ये नियम धर्म, नस्ल, लिंग, जन्मस्थान और दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को भी प्रतिबंधित करते हैं। इन नए नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि उच्च शिक्षा संस्थानों में सभी हितधारक, जिसमें SC, ST, OBC और दिव्यांगजन (PwD) भी शामिल हैं, एक सुरक्षित, न्यायपूर्ण और सहयोगी शैक्षणिक वातावरण का अनुभव कर सकें।
नए नियमों के खिलाफ जातिवादी समूह सड़कों पर उतर आए और प्रदर्शन करने लगे, हमें गालियाँ दीं।
तुमने क्या किया?
देश भर में सवर्ण जातिवादी समूह द्वारा किए गए UGC के खिलाफ जातिवादी प्रदर्शनों ने यह दिखाया कि SC, ST और OBC की समानता की लड़ाई के खिलाफ और खुद को जवाबदेही से बचाने के लिए वे किस हद तक जा सकते हैं। इन प्रदर्शनों से पूरे देश को दिखा कि वे हमारे बारे में घटिया और नीचा सोचते हैं। सवर्णों ने अपनी जातिवादी मानसिकता का खुलकर प्रदर्शन किया।
तुमने क्या किया? तुम सड़क पर क्यों नहीं उतरे?
सुप्रीम कोर्ट ने इन नए नियमों पर रोक लगा दी। तुमने क्या किया?
क्या तुम सिर्फ़ बाबासाहेब के संघर्ष का फ़ायदा उठाने के लिए हो?
क्या तुम सिर्फ़ बाबासाहेब द्वारा दिए गए आरक्षण का फ़ायदा उठाने के लिए हो?
हो सकता है कि तुमने शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण का फ़ायदा उठाकर तरक्की हासिल कर ली हो, लेकिन यह याद रखो कि जातिवादी सवर्ण तुम्हें हमेशा केवल तुम्हारी जाति के चश्मे से ही देखेंगे! क्या तुम चाहते हो कि तुम्हारा बेटा अगला रोहित वेमुला बने? क्या तुम चाहते हो कि तुम्हारी बेटी अगली पायल तडवी बने? जो मूवमेंट बाबासाहेब ने शुरू किया था, उसे हमारे दादा-दादी, माता-पिता के खून-पसीने से आगे बढ़ाया गया और और मजबूत किया गया।
उन्होंने हर मुश्किल का सामना करते हुए भी इस लड़ाई को अपने कंधों पर उठाया। मूवमेंट के लोग जितना भी समय, मेहनत और पैसा दे सकता था, उन्होंने दिया। क्यों? ताकि आंदोलन ज़िंदा रहे। इस मेहनत और बलिदान के फल समुदाय में बांटे गए हैं।
एक पीढ़ी जिसने इस काम को आगे बढ़ाया, वह धीरे-धीरे इतिहास का हिस्सा बन रही है। लेकिन तुम क्या कर रहे हो?
तुम लोग क्या झक मार रहे हो?!"
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