
नई दिल्ली- अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा हाल ही में जारी जेफरी एपस्टीन से जुड़ी जांच फाइलों (एपस्टीन फाइल्स) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम आने से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने इसे "राष्ट्रीय शर्म" बताते हुए सोशल मीडिया पर साझा किया और पीएम मोदी से जवाब मांगा, जबकि विदेश मंत्रालय (MEA) ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया।
एपस्टीन अमरीका का एक दोषी बाल यौन अपराधी और रेपिस्ट था जिसकी 2019 में मौत हो गई, उसके ईमेल अक्सर नाम ड्रॉपिंग या अतिशयोक्ति से भरे होते थे। एपस्टीन ने 9 जुलाई 2017 को एक ईमेल लिखा था, जिसमें उसने कतर के 'Jabor Y' नामक एक प्रभावशाली व्यक्ति को सलाह देते हुए पीएम मोदी का जिक्र किया। ईमेल में लिखा है: “The Indian Prime Minister Modi took advice and danced and sang in Israel for the benefit of the US President. They had met a few weeks ago. IT WORKED!”
(अनुवाद: भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने सलाह ली और अमेरिकी राष्ट्रपति के लाभ के लिए इज़राइल में नाचा-गाया। वे कुछ हफ्ते पहले मिले थे। यह काम कर गया!)
यह ईमेल पीएम मोदी की इज़राइल यात्रा (4-6 जुलाई 2017) के ठीक बाद लिखा गया था। इससे पहले 25-26 जून 2017 को पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। एपस्टीन का यह जिक्र कतर को आतंकवाद विरोधी रुख अपनाने की सलाह के संदर्भ में एक सूचीबद्ध बिंदु के रूप में आया है।
अमेरिकी न्याय विभाग ने 30 जनवरी की रात को एपस्टीन सेक्स स्कैंडल से जुड़ी बड़ी संख्या में दस्तावेज यानी 30 लाख से ज्यादा पन्नों का कंटेंट जारी किया, जो कांग्रेस (अमरीकी संसद) के एक कानून के तहत सार्वजनिक किए गए। इसमें 2,000 से अधिक वीडियो और करीब 1 लाख 80 हजार तस्वीरें शामिल हैं. इनमें एपस्टीन के कई ईमेल और संदेश सामने आये हैं जिसमें भारत, पीएम मोदी और अन्य मुद्दों का जिक्र है। अमेरिकी मीडिया न्यू यॉर्क पोस्ट के मुताबिक फाइल्स में प्रसिद्ध भारतीय फिल्म डायरेक्टर मीरा नायर का नाम भी सामने आया है। इसमें एक बड़ा नाम ब्रिटेन के पूर्व राजकुमार एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर का आया है जो शुरू से ही इस विवाद में घिरे सबसे बड़े नामों में से एक हैं.
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और पार्टी के आधिकारिक हैंडल ने 31 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी से जुड़े मेल को सोशल मीडिया पर साझा किया, दावा किया कि एपस्टीन ने पीएम मोदी को "सलाह" देने का जिक्र किया है और यह "राष्ट्रीय गरिमा का मामला" है। पार्टी ने पूछा: सलाह क्या थी? "IT WORKED" का मतलब क्या? और पीएम मोदी का एपस्टीन से क्या संबंध है? दिल्ली के पूर्व केबिनेट मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने x पर सवाल उठाया , "एप्सटीन फाइल्स का सच्च क्या है ? प्रधानमंत्री जी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर जेफ्री एप्सटीन से उन्होंने क्या सलाह ली व इस्राइल में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को खुश करने के लिए यह डाँस व गाने का क्या मामला है ? अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि का मामला है इसलिए सच्च सामने आना चाहिए !"
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने स्पष्ट बयान जारी किया: "हमने सो-कॉल्ड एपस्टीन फाइल्स में एक ईमेल का संदर्भ देखा है जिसमें प्रधानमंत्री और उनकी इज़राइल यात्रा का जिक्र है। प्रधानमंत्री की जुलाई 2017 की आधिकारिक इज़राइल यात्रा के अलावा, ईमेल में बाकी बातें एक दोषी अपराधी की घटिया कल्पनाएं मात्र हैं, जिन्हें पूरे तिरस्कार के साथ खारिज किया जाना चाहिए।" इधर भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी ने ईमेल को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और "his advice" जैसे शब्द जोड़कर गलत नैरेटिव बनाया, जबकि मूल ईमेल में ऐसा कोई सीधा संकेत नहीं है कि सलाह एपस्टीन की थी।
जेफरी एपस्टीन को दुनिया के बदनाम लोगों के रूप में जाना जाता है. उसके कारण कई लड़कियों को सुसाइड तक करना पड़ा. उसके खिलाफ जांच हुई तो दुनिया के कई हाई-प्रोफाइल लोगों के नाम आए. एपस्टीन के काले कारोबार में मदद करने वाले ऐसे लोगों के नाम उजागर करने की मांग उठी तो अब उससे संबंध रखने वालों के नाम अमेरिका के न्याय विभाग ने जारी किए हैं. पहली क़िस्त में ज्यादा लोगों के नाम नहीं आए तो बहुत विवाद हुआ. लोगों ने आरोप लगाए कि बड़े लोगों के नाम जानबूझकर छिपा लिए गए. अब 30 लाख पन्नों की नई किश्त जारी की गई है. इसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स, अमेरिका के वाणिज्य सचिव और अरबपति हॉवर्ड लटनिक और ब्रिटिश अरबपति रिचर्ड ब्रैनसन सहित एक देश के राजकुमार के भी नाम इन दस्तावेजों में दर्ज हैं.
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