
जोधपुर- राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने हनुमानगढ़ के एक ट्रैफिक पुलिस इंस्पेक्टर द्वारा सोशल मीडिया पर रील बनाकर फॉलोअर्स बढ़ाने के आचरण को गंभीर कदाचार करार देते हुए राजस्थान के महानिदेशक पुलिस (डीजीपी) को दो महीने के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकल पीठ ने 17 जुलाई को यह आदेश पारित किया।
मामला हनुमानगढ़ टाउन पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 357/2026 से संबंधित है। एफआईआर 21 मई को ट्रैफिक शाखा के सीआई अनिल कुमार ने दर्ज कराई थी। इसमें आरोप है कि 19 मई को एक अज्ञात ऑडी कार चालक ने सार्वजनिक सड़क पर स्टंट किया, जिससे उनके बेटे लक्ष्य को चोटें आईं। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता की धारा 281 और 125(क) के तहत दर्ज की गई थी। जांच के दौरान धारा 110 भी जोड़ी गई। आरोपी बारबदिव्या स्वरुप सिंह पुत्र (उम्र 22 वर्ष, निवासी लाखुआना, तहसील डाबवाली, जिला सिरसा, हरियाणा) को 23 जून को गिरफ्तार किया गया था। वह हनुमानगढ़ जेल में बंद था।
आरोपी की ओर से अधिवक्ता आर.एस. चौधरी, राकेश ढाका, नितिन मील और अमित सरन ने तर्क दिया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है। जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी अब जांच के लिए आवश्यक नहीं है। उन्होंने कहा कि आरोपी के भागने की कोई संभावना नहीं है और वह अपराध दोहराने तथा जांच-ट्रायल में सहयोग करने का वचन देता है। अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता और उसका बेटा रील बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करते हैं ताकि फॉलोअर्स बढ़ा सकें। घटना के दिन शिकायतकर्ता ने कार रोकी और रील बना रहा था, तभी उसका बेटा रील की ड्रामा स्टोरी के हिस्से के रूप में गाड़ी के सामने कूद गया, जिससे दुर्घटना हुई। अधिवक्ताओं ने कहा कि शिकायतकर्ता पुलिस अधिकारी होने के बावजूद एफआईआर दर्ज कराने में देरी हुई।
सरकार की ओर से लोक अभियोजक नरेंद्र गहलोत और ओमप्रकाश चौधरी ने इन तर्कों का विरोध किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपी जांच में अब आवश्यक नहीं है और वह कुछ समय से हिरासत में है। आगे की कार्यवाही में समय लगेगा। मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए तथा गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी। आरोपी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदारों पर रिहा करने का आदेश दिया गया। शर्तें लगाई गईं कि आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा, कोई आपराधिक गतिविधि नहीं करेगा और ट्रायल कोर्ट की सुनवाई में नियमित रूप से उपस्थित रहेगा। शर्तों के उल्लंघन पर जमानत रद्द होने का प्रावधान रखा गया।
आदेश में कोर्ट ने कुछ असामान्य तथ्यों पर विशेष ध्यान देते हुए लिखा कि एक पुलिस इंस्पेक्टर अपने बेटे की सहायता से इंस्टाग्राम, फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रील बनाकर और अपलोड करके फैन फॉलोइंग बना रहा है। यह स्वयं एक बहुत गंभीर कदाचार है। इसलिए राजस्थान के डीजीपी को निर्देश दिया गया कि वे इस मामले की जांच कर आदेश की प्रति प्राप्त होने के दो महीने के भीतर कोर्ट को रिपोर्ट भेजें। रजिस्ट्री को आदेश की प्रति ट्रायल कोर्ट को ई-मेल से भेजने का भी निर्देश दिया गया।
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