
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने पार्टी संगठन और अपने परिवार के सदस्यों की राजनीतिक भूमिका को लेकर एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट किया है। रविवार को एक लम्बे और भावुक पोस्ट में मायावती ने कहा कि राजनीति और बहुजन आंदोलन में काम करने वालों को अपने भाई-बहनों तथा नजदीकी रिश्तेदारों के मोह से ऊपर उठकर पार्टी और समाज के हित में ईमानदारी तथा निष्ठा से काम करना चाहिए।
मायावती ने अपने राजनीतिक फैसले के समर्थन में बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने राजनीति में आने के बाद अपने नजदीकी रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ देने से दूरी बनाए रखी और उन्हें केवल निःस्वार्थ भाव से पार्टी संगठन में काम करने की अनुमति दी। मायावती के अनुसार, कांशीराम ने अपना निजी परिवार बसाने के बजाय अपना पूरा जीवन बहुजन समाज के हित और कल्याण के लिए समर्पित किया।
मायावती ने कहा कि वह भी कांशीराम के इसी रास्ते से प्रेरित हुईं और उन्होंने अपना पूरा जीवन बहुजन समाज के लिए समर्पित करने का फैसला लिया।
अपने परिवार के संदर्भ में मायावती ने कहा कि एक महिला होने के कारण उन्हें मजबूरी में अपने किसी भाई-बहन अथवा नजदीकी व्यक्ति को अपने साथ रखना पड़ा। उन्होंने अपने छोटे भाई आनंद कुमार का उल्लेख करते हुए कहा कि वह पिछले कई वर्षों से उनकी सेवा और पार्टी से जुड़े कार्यों में उनके साथ रहे हैं।
मायावती ने कहा कि आनंद कुमार के विशेष आग्रह पर उनके बड़े बेटे आकाश आनंद को राजनीति में आगे बढ़ाया गया। हालांकि, उनके मुताबिक, आकाश आनंद के विवाह के बाद उनके रवैये और गतिविधियों को लेकर ऐसी परिस्थितियां बनीं, जिसके कारण उन्हें कुछ समय पहले पार्टी से अलग करना पड़ा।
मायावती ने आकाश आनंद के ससुर और पूर्व बसपा नेता अशोक सिद्धार्थ का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आकाश आनंद अब उनके ससुर के प्रभाव में हैं और ऐसी स्थिति में उन्हें पार्टी में वापस लेना पार्टी के साथ विश्वासघात होगा।
आकाश आनंद को लेकर हाल के घटनाक्रम में मायावती ने पहले उन्हें पार्टी की जिम्मेदारियों से हटाया था और बाद में 10 सितंबर को पार्टी से पूरी तरह अलग किए जाने की घोषणा की थी। बाद में मायावती ने 12 सितंबर को अपने दोनों भतीजों आकाश आनंद और ईशान आनंद को पार्टी में कोई भी राजनीतिक पद नहीं देने की घोषणा की। उन्होंने आनंद कुमार की बेटी दीपिका आनंद को भविष्य में उनके पिता की सहायता करने की संभावना का उल्लेख किया था।
मायावती ने कहा कि आनंद कुमार के परिवार में से किस सदस्य को राजनीतिक जिम्मेदारी दी जाए, इसे लेकर उनके सामने पिछले कुछ समय से दुविधा थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस विषय पर गंभीरता से विचार करने के बाद यह तय किया कि परिवार के किसी ऐसे सदस्य को आगे किया जाए जो आकाश आनंद के रास्ते पर न चले। मायावती ने कहा, " और जहाँ तक आगे चलकर, इनकी बेटी की मदद लेने का सवाल है तो इनकी शादी होने के बाद, फिर इनका मामला भी यदि आकाश आनन्द की तरह ही निकल गया तो यह भी पार्टी हित में सही नहीं होगा। ऐसी सम्भावना को भी ध्यान में रखकर अब पार्टी हित में यही उचित होगा कि आकाश आनन्द व इनकी बहिन को भी अब पार्टी की कोई भी ज़िम्मेवारी देने से इन दोनों को एकदम दूर रखा जाये अर्थात् अब इनके इस फैसले में कोई भी फेरबदल नहीं किया जायेगा। और अब इन दोनों के स्थान पर आनन्द कुमार के परिवार में से केवल ईशान आनन्द को ही, पार्टी में सम्मानजनक ज़िम्मेवारी देकर इनको आगे किया जायेगा, जिसका आकाश आनन्द व इनकी बहिन की तरह कभी भी कोई चक्कर नहीं रहेगा। अभी तक ऐसा ही लग रहा है। आगे तो कुछ भी नहीं कहा जा सकता है. फिर भी यदि इन्होंने पार्टी विरोधी ऐसा कोई भी गम्भीर कृत्य किया तो फिर इनको भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जायेगा, लेकिन तब ऐसी स्थिति में आनन्द कुमार के परिवार में से अन्य किसी भी सदस्य को पार्टी की कोई भी छोटी-बड़ी ज़िम्मेवारी नहीं दी जायेगी।"
मायावती ने यह स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि ईशान आनंद भी कोई गंभीर पार्टी-विरोधी गतिविधि करते हैं तो उन्हें भी पार्टी से बाहर कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार के किसी अन्य सदस्य को पार्टी की कोई भी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
इसके बजाय पार्टी में काम कर रहे किसी दलित वर्ग के ‘मिशनरी और वफादार कार्यकर्ता’ को आगे बढ़ाने की बात मायावती ने कही।
मायावती ने कहा कि देश और जनहित के जरूरी मुद्दों के साथ-साथ परिवार और पार्टी संगठन से जुड़े इस विषय पर भी 23 सितंबर को बसपा की अत्यंत महत्वपूर्ण ऑल इंडिया बैठक बुलाई गई है। यह सितंबर में बसपा की दूसरी राष्ट्रीय स्तर की बैठक होगी। 3 सितंबर की पिछली बैठक में आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया गया था। इसके बाद 10 सितंबर को उन्हें पार्टी से ही अलग कर दिया गया।
मायावती ने अपने फैसले को समझाने के लिए डॉ. बी.आर. आंबेडकर के एक पुराने पत्र का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने 23 फरवरी 1956 को नई दिल्ली के 26, अलीपुर रोड से अपने पुत्र यशवंत बी. आंबेडकर को पत्र लिखा था।
मायावती के अनुसार, इस पत्र में डॉ. आंबेडकर ने ‘बुद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस’ से जुड़े एक विवाद का उल्लेख करते हुए यशवंत को चेतावनी दी थी कि प्रेस सार्वजनिक संपत्ति है, न तो उनकी निजी संपत्ति और न ही यशवंत की। उन्होंने सार्वजनिक संस्था के खाते अथवा संपत्ति में किसी भी प्रकार की अनियमितता को स्वीकार नहीं करने की बात कही थी। पत्र में बाबा साहब के लिखे वाक्यों को दोहराते हुए बसपा चीफ ने लिखा, "तुम्हारा आचरण उचित नहीं रहा है...अगर तुमने मेरी अन्तिम व फाइनल निर्देश की परवाह नहीं कि तो फिर मैं तुम्हें प्रेस से निकाल-बाहर करूंगा और इस चेतावनी के नहीं मानने पर फिर मैं आपके विरुद्ध अभियोजन (मुक़दमा) (prosecute) भी करूंगा। संक्षेप में अब मैं अपने ख़ुद के बारे में भी यही कहना चाहती हूँ कि समस्त ’बहुजन समाज’ ही मेरा असली परिवार है तथा सत्ता की मास्टर चाबी के ज़रिये ही उन्हें ’शोषित से शासक वर्ग’ बनाकर उनका हित व कल्याण सुनिश्ति करना ही मेरा मिशनरी लक्ष्य व मेरी प्रतिज्ञा भी है, जिसके लिए मैं अपने भाई-बहिनों आदि के ख़िलाफ भी किसी भी हद तक जा सकती हूँ, जैसाकि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने उदाहरण पेश किया, यही मेरा भी संकल्प है।"
अपने बयान के अंत में मायावती ने कहा कि उनके लिए पूरा बहुजन समाज ही उनका ‘असली परिवार’ है। उन्होंने कहा कि उनका मिशन बहुजन समाज को ‘शोषित से शासक वर्ग’ बनाना और सत्ता की ‘मास्टर चाबी’ के माध्यम से उनके हित एवं कल्याण को सुनिश्चित करना है।
मायावती ने कहा कि पार्टी और आंदोलन के हित में यदि आवश्यकता पड़ी तो वह अपने भाई-बहनों समेत परिवार के सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने इसे कांशीराम की विचारधारा और डॉ. आंबेडकर द्वारा प्रस्तुत उदाहरणों से प्रेरित अपना संकल्प बताया।
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