उत्तर प्रदेश: बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 23 सितंबर को लखनऊ में पार्टी की एक और अखिल भारतीय बैठक बुलाई है। दिलचस्प बात यह है कि एक ही महीने के भीतर यह पार्टी की दूसरी राष्ट्रीय स्तर की बैठक होने जा रही है।
पिछली अखिल भारतीय बैठक के बाद से अब तक बीएसपी के अंदर काफी कुछ बदल चुका है। ऐसे में इस आगामी बैठक के ऐलान ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा तेज कर दी है कि भविष्य के गर्भ में अब और कौन से फैसले छिपे हैं।
इससे पहले 3 सितंबर को हुई बैठक में मायावती ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद से हटा दिया था। उस वक्त उन्होंने कहा था कि आकाश पार्टी में एक आम कार्यकर्ता की तरह काम कर सकते हैं, लेकिन 10 सितंबर को उन्हें पूरी तरह से पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
3 सितंबर के घटनाक्रम के बाद मायावती ने पार्टी सदस्यों को यह जानकारी दी थी कि आकाश के छोटे भाई ईशान आनंद उन सभी राज्य इकाइयों के लिए मुख्य केंद्रीय समन्वयक होंगे, जहां पार्टी का संगठनात्मक ढांचा मौजूद है।
हालाँकि, 12 सितंबर को बीएसपी में एक और बेहद नाटकीय बदलाव देखने को मिला। मायावती ने न सिर्फ ईशान आनंद को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में उनके किसी भी भतीजे को पार्टी में छोटा या बड़ा कोई भी पद नहीं दिया जाएगा।
भतीजों को पदमुक्त करने के बाद मायावती ने अपनी भतीजी दीपिका आनंद को लेकर एक अहम बात कही। उन्होंने इशारा किया कि अगर दीपिका काम करने की इच्छुक हैं और पार्टी की जिम्मेदारियों के प्रति अपनी 'कुशलता, वफादारी और ईमानदारी' साबित करती हैं, तो वह भविष्य में अपने पिता आनंद कुमार की जगह ले सकती हैं।
वर्तमान में मायावती के भाई आनंद कुमार बीएसपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, जो पार्टी पदानुक्रम में दूसरे नंबर का सबसे ताकतवर पद है। चूंकि ईशान आनंद के लिए बनाया गया मुख्य केंद्रीय समन्वयक का पद अब खत्म कर दिया गया है, इसलिए पार्टी के भीतर आनंद कुमार की जिम्मेदारियां और भी ज्यादा बढ़ गई हैं।
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