मुस्लिम समुदाय की बिगड़ती स्थिति पर व्यापक दस्तावेज तैयार करेगा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

सांप्रदायिक तनाव और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन को लेकर राष्ट्रव्यापी अभियान का ऐलान
 प्रवक्ता एसक्यूआर इलियास ने बताया कि BJP-शासित राज्यों में मुसलमानों के ख़िलाफ़ भीड़ की हिंसा या लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं; मुस्लिम घरों, इलाक़ों, मस्जिदों और मदरसों को निशाना बनाकर किए जा रहे तोड़-फोड़ के अभियानों; बुलडोज़र कार्रवाई आदि के मद्देनजर AIMPLB ने ऐसा निर्णय लिया है।
प्रवक्ता एसक्यूआर इलियास ने बताया कि BJP-शासित राज्यों में मुसलमानों के ख़िलाफ़ भीड़ की हिंसा या लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं; मुस्लिम घरों, इलाक़ों, मस्जिदों और मदरसों को निशाना बनाकर किए जा रहे तोड़-फोड़ के अभियानों; बुलडोज़र कार्रवाई आदि के मद्देनजर AIMPLB ने ऐसा निर्णय लिया है।एआई निर्मित सांकेतिक तस्वीर
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नई दिल्ली- ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने सोमवार को मुसलमानों के सामाजिक और राजनीतिक हाशिएकरण तथा मस्जिदों और मदरसों के विध्वंस के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। बोर्ड की कार्यकारिणी समिति ने इस आंदोलन के लिए एक एक्शन कमेटी का गठन किया है, जो समाज के लोकतंत्र-प्रेमी और शांति-प्रेमी वर्गों के साथ समन्वय स्थापित करेगी। बोर्ड ने कहा कि यह आंदोलन "नफरत और शत्रुता को बढ़ावा देने, सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने और मुसलमानों के जीवन, संपत्ति, सम्मान और गरिमा पर हमलों" को उजागर करेगा।

बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी की अध्यक्षता में रविवार को हुई बैठक में कहा गया कि समान नागरिक संहिता (UCC) का जबरन कार्यान्वयन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत दी गई धार्मिक स्वतंत्रता के विपरीत है। कार्यकारिणी समिति ने बीजेपी शासित राज्यों में UCC के नाम पर हो रहे विधायी प्रयासों पर भी चिंता व्यक्त की। बैठक में कहा गया कि उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब असम, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी UCC लागू करने की तैयारियां चल रही हैं। बोर्ड ने उत्तराखंड UCC कानून को नैनीताल हाईकोर्ट में चुनौती देने की तरह ही अन्य राज्यों में भी कानूनी कार्रवाई करने का संकल्प लिया है।

 प्रवक्ता एसक्यूआर इलियास ने बताया कि BJP-शासित राज्यों में मुसलमानों के ख़िलाफ़ भीड़ की हिंसा या लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं; मुस्लिम घरों, इलाक़ों, मस्जिदों और मदरसों को निशाना बनाकर किए जा रहे तोड़-फोड़ के अभियानों; बुलडोज़र कार्रवाई आदि के मद्देनजर AIMPLB ने ऐसा निर्णय लिया है।
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बोर्ड ने वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने के प्रयासों को भी संविधान के अनुच्छेद 25 के विपरीत बताया। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार संसद के माध्यम से वंदे मातरम को सभी नागरिकों या स्कूली छात्रों के लिए अनिवार्य करने जैसा कोई कदम उठाती है, तो बोर्ड इसके खिलाफ अदालतों का रुख करेगा। कार्यकारिणी समिति ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश का स्वागत किया, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार के स्कूलों और मदरसों में वंदे मातरम गाने के निर्देश पर रोक लगाई गई थी। बोर्ड ने कहा कि वंदे मातरम की सामग्री मुस्लिम आस्था के तौहीद (ईश्वर की एकता) के सिद्धांत के विपरीत है, इसलिए इस्लामी कानून में इसकी अनुमति नहीं है।

बोर्ड ने मुसलमानों से अपील की कि वे सहिष्णुता या देशभक्ति के नाम पर अपनी आस्था और विश्वासों से समझौता न करें। कार्यकारिणी समिति ने फैसला किया कि मुस्लिम समुदाय की बिगड़ती स्थिति, सांप्रदायिक तनाव और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर एक व्यापक दस्तावेज तैयार कर प्रकाशित किया जाएगा, ताकि देश के जागरूक, न्यायप्रिय और लोकतांत्रिक मानसिकता वाले वर्गों की अंतरात्मा को जगाया जा सके।

बोर्ड के प्रवक्ता एसक्यूआर इलियास ने बताया कि इन निर्णयों का संबंध विशेष रूप से बीजेपी शासित राज्यों में मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती भीड़ हिंसा या लिंचिंग की घटनाओं, मुस्लिम घरों और बस्तियों, मस्जिदों और मदरसों को निशाना बनाकर किए जा रहे विध्वंस अभियान, बुलडोजर कार्रवाई, सरकारी समारोहों, स्कूलों और सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने के प्रयासों, विभिन्न राज्यों में UCC के कार्यान्वयन से संबंधित घटनाक्रमों और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कमाल मौला/भोजशाला मस्जिद के फैसले से है।

इलियास ने कहा कि कार्यकारिणी समिति ने खेद व्यक्त किया कि मुस्लिम समुदाय के जीवन, संपत्ति, गरिमा, धर्म और आस्था पर नियोजित हमलों के बावजूद, धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दल "आपराधिक मौन" बनाए हुए हैं और उनके नेता इन मुद्दों पर स्पष्ट रुख नहीं लेते। इलियास ने कहा, "हम कांग्रेस सहित सभी दलों से नाखुश हैं। उनमें से कोई भी मुसलमानों के मुद्दों को मजबूती से नहीं उठाता।" उन्होंने कहा कि एक्शन कमेटी का गठन किया जा रहा है और आंदोलन जुलाई के अंत तक शुरू हो सकता है।

कार्यकारिणी समिति ने कमाल मौला मस्जिद मामले पर भी गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला सदियों पुरानी मुस्लिम परंपरा और 1991 के पूजा स्थल अधिनियम की भावना के विपरीत है। बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती देने वाली मस्जिद समिति को हर संभव कानूनी सहायता देने का संकल्प लिया।

 प्रवक्ता एसक्यूआर इलियास ने बताया कि BJP-शासित राज्यों में मुसलमानों के ख़िलाफ़ भीड़ की हिंसा या लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं; मुस्लिम घरों, इलाक़ों, मस्जिदों और मदरसों को निशाना बनाकर किए जा रहे तोड़-फोड़ के अभियानों; बुलडोज़र कार्रवाई आदि के मद्देनजर AIMPLB ने ऐसा निर्णय लिया है।
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