
कोच्चि- केरल हाईकोर्ट ने महाकुंभ मेला 2025 में प्रार्थना मालाएं बेचते हुए वायरल हुई 18 वर्षीय मोनालिसा को पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया है। जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की एकलपीठ ने 19 जून को सुनवाई के दौरान मोनालिसा की याचिका पर अंतरिम आदेश जारी करते हुए एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस स्टेशन के एसएचओ को मोनालिसा की जान की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को तय की है।
मोनालिसा ने याचिका में आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश के खानगोर जिले की रहने वाली वह 2025 महाकुंभ मेला में प्रार्थना मालाएं बेचते हुए सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिसके बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री की। उसने केरल के एक मंदिर में अपनी मर्जी से 11 मार्च को साथी एक्टर मोहम्मद फरमान खान से शादी की, जिसका पंजीकरण केरल रजिस्ट्रेशन ऑफ मैरिज (कॉमन) रूल्स 2008 के तहत किया गया। शादी की खबर सार्वजनिक होते ही सोशल मीडिया पर दोनों के खिलाफ घृणा अभियान शुरू हो गया। याचिका के अनुसार, दंपति की तस्वीरों को सार्वजनिक रूप से जलाया गया और चप्पलों से पीटा गया, इन दृश्यों को भी वायरल किया गया।
मोनालिसा को अज्ञात व्यक्तियों से धमकी भरे संदेश मिले, जिनमें एक संदेश में हिंदी में लिखा था- “तुम महाकुंभ मेला में ट्रेंडिंग स्टार बन गईं और अब पाकिस्तानी से शादी कर ली। जिस दिन हमें तुम मिलोगी, हमारी टीम तुम्हें गोली मार देगी। जय श्री राम बोलो, या योगी आदित्यनाथ जी या बीजेपी मोदी जी को बताओ।”
याचिका में कहा गया कि धमकियों के कारण मोनालिसा और उनके पति को अजनबी लगातार फॉलो कर रहे हैं। पुलिस और सिटी पुलिस कमिश्नर में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद सुरक्षा नहीं मिली, जिससे वह अपनी अभिनय करियर भी आगे नहीं बढ़ा पा रही हैं।
यह विवाद तब और गहरा गया जब मोनालिसा के पिता ने मध्य प्रदेश में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी बेटी शादी के समय महज 16 साल की थी। इस आधार पर वहां आपराधिक मामला दर्ज हुआ। गिरफ्तारी के डर से मोनालिसा और फरमान ने केरल हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मांगी, जिस पर फरमान को एक महीने की अस्थायी सुरक्षा दी गई थी। इसके अलावा तिरुवनंतपुरम पोक्सो कोर्ट में शादी की वैधता को चुनौती देने वाली एक शिकायत लंबित है, जबकि दंपति ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में मोनालिसा की उम्र के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए अलग याचिका दायर की है।
कोर्ट ने सरकारी वकील को नोटिस जारी करते हुए प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता को सुरक्षा देने की जरूरत पर संतोष जताया। यह मामला अंतरधार्मिक विवाह, उम्र और सोशल मीडिया ट्रोलिंग से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को केंद्र में लाता है।
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