“हर दिवाली हमारे दिल टूट...": JNU में हड़ताली संविदा कर्मचारियों का स्टूडेंट्स को भावुक पत्र, ऐसे ज़ाहिर की पीड़ा

कर्मचारियों ने छात्रों को खुला पत्र लिखकर भावुक अपील की है कि वे उन्हें जेएनयू परिवार का हिस्सा मानें और इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़े हों।
संविदा कर्मचारी बोनस, सवेतन अवकाश और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं।
संविदा कर्मचारी बोनस, सवेतन अवकाश और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं।
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नई दिल्ली- जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में संविदा कर्मचारियों की हड़ताल जारी है। साफ-सफाई, मेस, सुरक्षा, माली और रखरखाव से जुड़े 500 से अधिक कर्मचारियों ने वेतन में कथित अवैध कटौती, बोनस का भुगतान न होने, समान काम के लिए समान वेतन से वंचित रखने और कर्मचारियों की भारी कमी के खिलाफ संघर्ष छेड़ रखा है। कर्मचारियों ने छात्रों को खुला पत्र लिखकर भावुक अपील की है कि वे उन्हें जेएनयू परिवार का हिस्सा मानें और इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़े हों।

कर्मचारियों के अपील पत्र में लिखा; “भैया/दीदी, हम जेएनयू के संविदा कर्मचारी हैं। हमें विश्वास है कि आप हमें जेएनयू परिवार का हिस्सा मानते हैं, भले ही ठेकेदार और जेएनयू प्रशासन हमें इस परिवार का हिस्सा न मानते हों। आप हमसे हर रोज़ मिलते हैं। विश्वविद्यालय में आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी सुचारु रूप से चलती रहे, इसके लिए ज़रूरी बुनियादी सुविधाओं और सेवाओं की ज़िम्मेदारी हम ही निभाते हैं। आपके वॉशरूम की सफाई से लेकर आपके लिए खाना बनाने और आपकी सुरक्षा सुनिश्चित करने तक, हर जगह हमारी मेहनत शामिल है।”

उन्होंने स्वीकार किया कि कभी-कभी काम अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो पाता, लेकिन इसका कारण उनकी मेहनत की कमी नहीं बल्कि अत्यधिक बोझ और कर्मचारियों की भारी कमी है। “एक कर्मचारी से दस लोगों का काम करवाया जा रहा है और जेएनयू प्रशासन की मंशा निकट भविष्य में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की नहीं दिखती। इस कमी के कारण सफाई व्यवस्था और भोजन की गुणवत्ता पर असर पड़ता है, जिससे अंततः आप विद्यार्थियों को समझौता करना पड़ता है।”

कर्मचारियों ने अपनी आर्थिक स्थिति का भी जिक्र किया। समान काम करने के बावजूद स्थायी कर्मचारियों की तुलना में उन्हें महज एक-चौथाई वेतन मिलता है। त्योहारों पर बोनस की जायज मांग बार-बार ठुकरा दी जाती है। “समान काम करने के बावजूद हमें स्थायी कर्मचारियों की तुलना में महज़ एक-चौथाई वेतन मिलता है। हमें समान काम के लिए समान वेतन के अधिकार से वंचित रखा जाता है। पिछले कई वर्षों से हर त्योहार के मौसम में जब भी हम बोनस की अपनी जायज़ माँग लेकर प्रशासन के सामने जाते हैं, तो हमें केवल झूठे आश्वासन देकर लौटा दिया जाता है। हर दिवाली हमारे दिल तब टूट जाते हैं, जब हम अपने बच्चों की आँखों में अधूरी इच्छाओं और मायूसी को देखते हैं। हमारा दिल अपने उन परिवारजनों और अपनों के लिए रोता है, जो हमारे साथ इन मुश्किलों को झेल रहे हैं। फिर भी हम मुस्कुराते हैं और काम पर लौट जाते हैं, जबकि हमारे बच्चों के चेहरों पर त्योहार की खुशियाँ अधूरी रह जाती हैं और हमें यह भी नहीं पता होता कि कभी हमारी परिस्थितियाँ बदलेंगी या नहीं।”

अपील में कहा गया है कि अब उनके पास संघर्ष का ही रास्ता बचा है। वे बोनस, सवेतन अवकाश और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। “हमने हमेशा आपको अपने विस्तारित परिवार का हिस्सा माना है। हमें उम्मीद है कि आप भी हमें उसी परिवार का हिस्सा मानेंगे और इस बेहद कठिन समय में हमारे साथ खड़े होंगे। अगर आप जेएनयू हैं, तो हम भी गर्व से कह सकते हैं कि हम भी जेएनयू हैं! मजदूर-छात्र एकता जिंदाबाद!”

आखिर हमें खुशियों, उमंग और उम्मीदों से क्यों वंचित रखा जाता है? जिन समस्याओं को हम पैदा ही नहीं करते, बल्कि जिनसे हम स्वयं भी प्रभावित होते हैं, उनका दोष हमारे सिर क्यों मढ़ दिया जाता है? हमारे हाथ में अब केवल संघर्ष का रास्ता बचा है। हम लड़ना चाहते हैं, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी यह सीख सके कि हम कायर नहीं हैं और न ही अपने हक़ की लड़ाई से डरते हैं। हम बोनस, सवेतन अवकाश और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की माँग को लेकर हड़ताल पर हैं।
जेएनयू संविदा कर्मचारी

जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कर्मचारियों के इस संघर्ष का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश में भी छात्रों से अपील की। वीडियो में वे कहती हैं कि जेएनयू प्रशासन कर्मचारियों का शोषण कर रहा है और श्रम आयोग के हस्तक्षेप के बावजूद अपने वादों पर खरा नहीं उतर रहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जेएनयू के छात्रों को मजदूरों के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह कर्मचारियों की विभिन्न मांगों के बावजूद उनका शोषण जारी रखे हुए है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की है और “नो वर्क, नो वेज” नियम लागू करने की चेतावनी दी है। श्रम आयुक्त की तरफ से पहले भी समझौते की कार्यवाही चल रही थी, लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि प्रशासन ने निर्देशों का पालन नहीं किया।

कर्मचारी साबरमती टी-पॉइंट पर धरना दे रहे हैं। वे जेएनयू शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) और छात्रों से समर्थन की मांग कर रहे हैं। सफाई कर्मचारियों ने काम पूरी तरह बंद रखा है, जबकि मेस कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया है। यह हड़ताल सिर्फ वेतन और बोनस का मुद्दा नहीं, बल्कि समान काम के लिए समान वेतन, पर्याप्त स्टाफ और श्रम अधिकारों की लड़ाई भी है।

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