AIIMS ऋषिकेश में SC/ST कर्मचारियों की हड़ताल: पदोन्नति में आरक्षण नियमों की अनदेखी पर भीम आर्मी चीफ ने की ये मांग

चंद्रशेखर आजाद ने जेपी नड्डा को लिखा पत्र
कर्मचारियों और ऑल एससी-एसटी वेलफेयर एसोसिएशन का आरोप है कि 10 अक्टूबर को जारी पदोन्नति (DPC) आदेश में आरक्षण रोस्टर, योग्यता के नियमों और मंत्रालय के निर्देशों की अनदेखी की गई है।
कर्मचारियों और ऑल एससी-एसटी वेलफेयर एसोसिएशन का आरोप है कि 10 अक्टूबर को जारी पदोन्नति (DPC) आदेश में आरक्षण रोस्टर, योग्यता के नियमों और मंत्रालय के निर्देशों की अनदेखी की गई है।सोशल मीडिया
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नई दिल्ली- अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ऋषिकेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण संबंधी नियमों की गंभीर अनदेखी किए जाने के आरोप लगाते हुए नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने 10 अक्टूबर को जारी किए गए दोषपूर्ण DPC आदेश की समीक्षा, रिव्यू DPC आयोजित करने और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

पत्र के अनुसार, AIIMS ऋषिकेश में कार्यरत SC/ST कर्मचारियों ने पदोन्नति प्रक्रिया में आरक्षण नियमों, मंत्रालय के पूर्व निर्देशों, ‘Own Merit’ सिद्धांत और आरक्षण रोस्टर की स्पष्ट अनदेखी की शिकायत की है। कर्मचारियों ने 10 अक्टूबर के DPC आदेश पर आपत्ति जताई है। 11 अक्टूबर को उन्होंने असहमति पत्र भी प्रस्तुत किया, लेकिन प्रशासन द्वारा कोई सकारात्मक संज्ञान न लिए जाने के कारण 12 अक्टूबर से आल एससी/एसटी एम्प्लाइज वेलफेर असोसिएशन के बैनर तले कर्मचारी शांतिपूर्ण कार्य बहिष्कार-हड़ताल पर हैं।

आजाद ने बताया कि 13 अक्टूबर को उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कर्मचारियों से बात की और उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्रीय महत्व के चिकित्सा संस्थान में कर्मचारियों का इस प्रकार कार्य बहिष्कार पर जाना प्रशासनिक विफलता है और इससे स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।

इससे पहले भी प्रकरण में आजाद ने हस्तक्षेप किया था। 16 दिसंबर 2025 को उन्होंने ‘अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के कल्याण संबंधी संसदीय समिति’ के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था। इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने कार्यालय ज्ञापन संख्या 8 (2)/SCTC/2026 (दिनांक 22 जनवरी ) के माध्यम से स्वास्थ्य मंत्रालय और AIIMS ऋषिकेश को शिकायतों की जांच कर 30 जनवरी 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। कर्मचारियों के अनुसार, मंत्रालय ने 10 मार्च को भी इस संबंध में निर्देश जारी किए थे, लेकिन AIIMS प्रशासन द्वारा उन पर क्या कार्रवाई की गई, यह स्पष्ट नहीं है। कर्मचारियों ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) के समक्ष भी यह प्रकरण उठाया हुआ है।

आजाद ने मंत्री से अनुरोध किया है कि वे संबंधित अधिकारियों को निम्नलिखित बिंदुओं पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दें:

  1. 10 अक्टूबर के DPC आदेश की लागू नियमों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। मंत्रालय के 10 मार्च के निर्देशों पर AIIMS ऋषिकेश द्वारा की गई कार्रवाई और अनुपालन की स्थिति स्पष्ट कराई जाए तथा अनुपालन रिपोर्ट तलब की जाए।

  2. पूर्व DPC और आरक्षण रोस्टर की समीक्षा कर DoPT दिशा-निर्देशों के अनुसार आवश्यकतानुसार Review DPC आयोजित कराई जाए।

  3. पदोन्नति में आरक्षण से संबंधित ‘Own Merit’ सिद्धांत का सही अनुप्रयोग सुनिश्चित किया जाए और इसके मानदंडों तथा अभिलेखों की जांच कराई जाए।

  4. संसदीय समिति, NCSC और NCST के समक्ष प्रस्तुत शिकायतों, जवाबों, निर्देशों और अनुपालन रिपोर्ट (ATR) की समीक्षा कराई जाए।

  5. DPC आदेश जारी करने से पूर्व संबंधित न्यायिक आदेशों और न्यायालय में लंबित मामलों के प्रभाव का परीक्षण कराया जाए।

  6. मंत्रालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पदोन्नति में आरक्षण नकारने, 10 अक्टूबर के DPC में कथित अनियमितताओं और गुप्त जॉइनिंग कराने में वर्तमान निदेशक, उपनिदेशक, AO और JAO की भूमिका की जांच की जाए। साथ ही आरक्षण रोस्टर एवं DPC प्रक्रिया में Liaison Officer की भूमिका और जिम्मेदारियों की समीक्षा कराई जाए।

  7. कर्मचारियों द्वारा 11 अक्टूबर को प्रस्तुत असहमति अभ्यावेदनों पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिखित, कारणयुक्त और समयबद्ध निर्णय दिलाया जाए।

  8. AIIMS प्रशासन और एसोसिएशन के अधिकृत प्रतिनिधियों के बीच तत्काल औपचारिक बैठक आयोजित कराई जाए।

  9. प्रकरण के निस्तारण के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की जाए तथा की गई कार्रवाई से कर्मचारियों और एसोसिएशन को लिखित रूप में अवगत कराया जाए।

भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने पत्र में कहा है कि इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं, ताकि पूर्व में उठाई गई शिकायतों सहित वर्तमान विवाद का निष्पक्ष और समयबद्ध निस्तारण हो तथा SC/ST कर्मचारियों के संवैधानिक एवं सेवा संबंधी अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

कर्मचारियों और ऑल एससी-एसटी वेलफेयर एसोसिएशन का आरोप है कि 10 अक्टूबर को जारी पदोन्नति (DPC) आदेश में आरक्षण रोस्टर, योग्यता के नियमों और मंत्रालय के निर्देशों की अनदेखी की गई है।
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