
नई दिल्ली- जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में 2026-27 की PhD प्रवेश प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (BAPSA) 24 अक्टूबर से टी-पॉइंट पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठा है। संगठन का आरोप है कि PhD प्रवेश में आरक्षण के नाम पर "घोटाला" हुआ है और ST की 15 तथा SC की 4 सीटें कम भरी गई हैं। गुरुवार 29 अक्टूबर को धरने के छठे दिन, BAPSA ने अन्य प्रगतिशील छात्र संगठनों के साथ प्रशासन तक अपना प्रतिनिधिमंडल पहुँचाया।
BAPSA के अनुसार, आज उसके प्रतिनिधिमंडल ने अन्य प्रगतिशील छात्र संगठनों के साथ प्रशासन के सामने अपनी माँगें रखीं। संगठन ने अपने x हैंडल पर एक पोस्ट में बताया कि वंचित समुदायों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को गेट खोलने और छात्रों की बात सुनने के लिए मजबूर किया। BAPSA की माँग है कि ST की 15 और SC की 4 सीटें दोबारा अधिसूचित की जाएँ। इससे पहले धरने के पाँचवें दिन, यानी 28 अक्टूबर को, संगठन ने टी-पॉइंट पर JNU प्रशासन का पुतला दहन किया था। BAPSA कार्यकर्ता बिस्वजीत मिंज ने बैचलर्स और मास्टर्स के छात्रों से भी एकजुट होकर इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की।
विवाद की जड़ में पहला आरोप जून 2025 NET चक्र के उम्मीदवारों के बहिष्कार का है। JNU ने अपने PhD प्रॉस्पेक्टस में UGC-NET के तीन चक्रों, यानी जून 2025, दिसंबर 2025 और जून 2026, के आधार पर आवेदन आमंत्रित किए थे। BAPSA का कहना है कि जून 2025 चक्र के उम्मीदवारों को बिना पूर्व सूचना या आधिकारिक घोषणा के प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, जबकि पंजीकरण NET पोर्टल के ज़रिए होता है और इंटरव्यू की शुरुआती सूची में जून 2025 चक्र शामिल था।
दूसरा आरोप समिति के वादे से जुड़ा है। BAPSA के मुताबिक लगातार संघर्ष और बातचीत के बाद प्रशासन आरक्षण घोटाले की जाँच के लिए समिति बनाने पर राज़ी हुआ था, लेकिन इसके बावजूद उसने PhD वाइवा वोसी की सूचना जारी कर दी। संगठन ने इसे हाशिए के समुदायों के साथ विश्वासघात बताया है और चेतावनी दी है कि माँगें न मानी गईं तो वह वाइवा नहीं होने देगा।
आरक्षण के आँकड़ों पर BAPSA का दावा है कि पिछले दस वर्षों में विश्वविद्यालय ने कई श्रेणियों में कानूनी कोटा पूरा नहीं किया। संगठन के अनुसार SC का 15% कोटा दस साल में कभी पूरा नहीं हुआ और 2015-16 से 2024-25 के बीच प्रवेश पाने वाले SC छात्रों का हिस्सा 12.87% से 14.48% के बीच रहा। ST का 7.5% कोटा भी कभी पूरा नहीं हुआ और यह हिस्सा 2018-19 में गिरकर 6.30% तथा 2023-24 में 6.31% रह गया। OBC के मामले में दावा है कि दस में से आधे वर्षों में 27% के कानूनी कोटे से कम छात्र लिए गए, जहाँ 2020-21 में यह हिस्सा 24.82% रहा और 2024-25 में फिर कोटे से नीचे चला गया। PwD छात्रों को दस में से केवल दो साल पूरा 5% कोटा मिला, और 2018-19 में उन्हें महज़ 2.75% सीटें मिलीं। ये आँकड़े BAPSA द्वारा जारी किए गए हैं और द मूकनायक इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सका है।
JNUSU कौंसिलर कोमल देवी कहती हैं," अभी विवि का एडमिशन नोटिस आया है। उसमें लिखा गया है कि जितना भी एडमिशन नेट श्रेणी में इस PhDसाइकिल का हो रहा था, वो रोक दिया गया लेकिन 30 तारीख से JRF श्रेणी के तहत एडमिशन शुरू हो जायेगा। लेकिन अभी भी हमसे छीनी गई उन 15 STऔर 4 SC सीटों के लिए BAPSA T-point पर प्रोटेस्ट पर बैठा हुआ है। जब तक 19 सीटों को री- नोटिफाई नहीं किया जाता, तब तक हम ये PhD viva-voce होने नहीं देंगे। जब तक हमारी आवाजें नहीं सुनी जाती, तब तक ये वाइवा नहीं होने देंगे।
BAPSA की माँगों की सूची लंबी है। संगठन चाहता है कि 2026-27 PhD प्रवेश में SC/ST की कमी वाली सीटें दोबारा अधिसूचित हों और 2026 का PhD ई-प्रॉस्पेक्टस SC/ST/OBC/PwD आरक्षण के सख़्त पालन के साथ दोबारा जारी किया जाए। वह NET-JRF आधारित PhD प्रवेश खत्म कर JNUEE बहाल करने, वाइवा बुलाने की प्रक्रिया में आरक्षण लागू करने, JRF मोड में 100% वाइवा वेटेज खत्म करने और वाइवा में भेदभाव रोकने की भी माँग कर रहा है। इसके अलावा राजीव भट्ट, सुखदेव थोराट और अब्दुल नाफे समितियों की रिपोर्ट लागू करने, हर ई-प्रॉस्पेक्टस में प्रोग्राम, केंद्र, स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर श्रेणीवार सीट विभाजन सार्वजनिक करने, हॉस्टल आवंटन में आरक्षण नीति का सख़्त पालन, SC, ST, OBC और PwD प्रोफ़ेसरों की तत्काल पदोन्नति, अकादमिक परिषद में पारदर्शिता, हाशिए के छात्रों के ड्रॉपआउट पर रोक और JNU में जाति जनगणना जैसी माँगें भी शामिल हैं।
धरना स्थल पर "जय भीम! हूल जोहार!", "वाइवा नहीं, जब तक हमारी आवाज़ नहीं सुनी जाती", "हमारी PhD सीटें कहाँ हैं?", "विश्वविद्यालय तुम्हारे अग्रहार नहीं हैं" और "दलित लाइव्स मैटर! आदिवासी लाइव्स मैटर!" जैसे नारे गूँजे। BAPSA ने पूरे बहुजन समुदाय, यानी SC/ST/OBC/PwD, महिलाओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों, तथा संवेदनशील शिक्षकों से धरने में शामिल होने और जारी वाइवा प्रक्रिया को रोकने की अपील की है।
धरना अनिश्चितकाल के लिए जारी है। BAPSA का रुख साफ़ है कि जब तक 15 ST और 4 SC सीटें दोबारा अधिसूचित नहीं होतीं और जाँच समिति पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, वाइवा नहीं होने दिया जाएगा। प्रशासन की ओर से आज की बातचीत पर अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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