
नई दिल्ली- दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर मैदान पर शनिवार को एक अनोखा और भावुक नजारा देखने को मिला। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के बैनर तले हजारों युवा कॉकरोच के मुखौटे पहने जमा थे। इस दौरान CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी मां के डर को लेकर ऐसा खुलासा किया जिसने हर किसी का दिल छू लिया।
अमेरिका से वापस लौटकर सीधे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे अभिजीत दीपके ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा:
"जब मैं अमेरिका गया था, तो मेरी मां इतनी नहीं रोई थी, जितना वह पिछले कुछ दिनों में रोई है... जब मैंने वापस अपने देश आने का फैसला किया।"
दीपके ने आगे कहा कि उनकी मां को बेटे की सुरक्षा की चिंता सता रही थी। उन्होंने बताया:
"मेरी मां बहुत डरी हुई थी कि कहीं यह सरकार मुझे जेल में न डाल दे। इस देश की हर मां के मन में यह डर है जब उसका बच्चा इस सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है। हम कब तक डर में जिएंगे?"
अपने संबोधन में दीपके ने सरकार द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 'कॉकरोच' शब्द को ही अपनी ताकत बताया। उन्होंने कहा: “लोग कहते हैं आंदोलन, धरना प्रदर्शन और जुलूस निकालने से क्या होता है ? इससे यह सिद्ध होता है कि हम जीवित हैं !” सरकार के लिए हम हो सकते हैं कीड़े मकौड़े, लेकिन हम जीवित है और अपने हकों की लड़ाई लड़ने के लिए सक्षम है।"
देर दोपहर जैसे ही प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पहुंचे, वैसे ही युवाओं में जबरदस्त उत्साह फैल गया। वांगचुक ने हाथों में फूल लेकर गांधीवादी अहिंसा का संदेश दिया।
उन्होंने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा. "परीक्षा घोटाले के यह मामले हिमशैल का सिर्फ सिरा हैं। इसके अंदर बहुत कुछ छिपा है और पूरी शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है।"
सबसे बड़ी चेतावनी देते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि अभिजीत दिपके या CJP के किसी भी सदस्य को गिरफ्तार किया गया: "मैं 42 दिनों (छह सप्ताह) की भूख हड़ताल पर बैठूंगा। मैं भी एक 'मानद तिलचट्टा' (Honorary Cockroach) हूं।"
वांगचुक ने सरकार से किसी भी युवा को गिरफ्तार न करने की अपील की और प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण रहने का आग्रह किया।
पूरे दिन चले इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य NEET और CBSE जैसी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच कराना और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करना था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ये घोटाले लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं।
इस प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस से अनुमति मिली हुई थी। मैदान के आसपास अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया था और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। हालांकि, कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई।
इधर कोकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बीच दिनभर अफवाहों का बाज़ार गरम था, कई तरह की फेक न्यूज़ चल रही थी जिसमे एक यह था कि अभिजीत दीपके ने भारत पहुंचते ही सबसे पहला फोन मार्क्सवादी नेता वृंदा करात को किया। कोकरोच जनता पार्टी इस पर साफ़ साफ़ शब्दों में खंडन जारी किया और बताया कि, "अभिजीत दीपके ने अपनी जिंदगी में कभी भी बृंदा करात से बात नहीं की है। परेशान युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित है, सरकार से जवाबदेही माँग रहे हैं। और गोदी मीडिया उसे बदनाम करने में लगा है। इसीलिए देश का गोदी मीडिया से भरोसा उठ चुका है!" पार्टी के प्रवक्ता बार बार यही कहते रहे, " हमारा एकमात्र एजेंडा है - भारत की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने के लिए धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा। किसी भी भ्रामक रणनीति के झांसे में न आएं!"
सीजेपी के प्रवक्ता सौरवदास ने कहा कि जंतर-मंतर पर भारी भीड़ देखकर पार्टी हम अभिभूत हैं, हमें उम्मीद थी की युवाओं का पूरा सहयोग हमें मिलेगा लेकिन पिछले कुछ दिनों में जितने पर्सनल अटैक और नेगेटिविटी फैलाई जा रही थी उससे हम चिंतित भी थे। उन्होंने इस विरोध प्रदर्शन को जवाबदेही की मांग करने वाला एक शांतिपूर्ण, छात्र-नेतृत्व वाला आंदोलन बताया और कहा कि युवाओं को अब ये महसूस हो चुका है कि पॉवर में बैठे लोगों को उनके भविष्य से कोई लेना देना नहीं है, उन्हें खुद ही अपने भविष्य के लिए आगे आना होगा।
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