
दिल्ली - शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग कर सोशल मीडिया पर नया अनुरोध किया है। उन्होंने लिखा, “प्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, अब जब आपने इस्तीफे स्वीकार करना शुरू कर दिया है, तो कृपया मेरा भी स्वीकार कर लीजिए। सात साल हो गए हैं!!” कन्नन का यह पोस्ट उनके 2019 के इस्तीफे को लेकर है, जो सात साल बाद भी लंबित पड़ा है।
इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर सवालों की झड़ी लग गई। एक यूजर ने पूछा कि अगर 2019 में दिया गया इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं हुआ तो सरकार को उनका वेतन देना चाहिए। कन्नन ने जवाब दिया, “नहीं। न वेतन, न निलंबन, कुछ भी नहीं। बस फाइल पर बैठे हैं ठीक वैसे ही जैसे हर दूसरे मुद्दे पर।”
एक अन्य सवाल पर उन्होंने कहा कि इससे उनका पेशेवर रूप से आगे बढ़ना संभव नहीं हो पा रहा। वे दूसरी कंपनियों में शामिल नहीं हो सकते, चुनाव नहीं लड़ सकते और अपना खुद का फर्म भी नहीं खोल सकते। पेंशन नहीं मिल रही और एनपीएस की रकम भी लंबित है। जब पूछा गया कि सरकार इस्तीफा क्यों नहीं स्वीकार कर रही, तो उन्होंने कहा, “पता नहीं दोस्त। मुझे नहीं लगता कि वे खुद भी जानते हैं कि ज्यादातर समय वे जो कर रहे हैं वह क्यों कर रहे हैं। जैसे कुत्ते कार का पीछा करते हैं।”
कन्नन गोपीनाथन 2012 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश (एजीएमयूटी) कैडर से हैं। अगस्त 2019 में वे दमन और दीव में पावर सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत थे।
कन्नन गोपीनाथन ने पिछले कई सालों से बार-बार कहा है कि उन्होंने 2019 में अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद मोदी सरकार द्वारा संचार बंदी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगे प्रतिबंधों के विरोध में इस्तीफा दिया था।
पिछले साल कांग्रेस में शामिल होने वाले कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, “अनुच्छेद 370 को निरस्त करना सरकार का फैसला हो सकता है। लेकिन अगर आप पूरे राज्य को बंद कर दें, सभी पत्रकारों, सांसदों और पूर्व मुख्यमंत्रियों को जेल में डाल दें, परिवहन, संचार और इंटरनेट बंद कर दें, तो क्या यह सही है? यह सवाल सिर्फ मेरे लिए नहीं, हम सभी के लिए है। क्या यह एक लोकतांत्रिक देश में सही हो सकता है? क्या इसके खिलाफ आवाज नहीं उठानी चाहिए थी? मैंने वह सवाल उठाया था और आज भी उसी पर खड़ा हूं।”
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