
मुम्बई- महाराष्ट्र शासन के सामाजिक न्याय व विशेष सहाय्य विभाग ने 20 मई को एक शासन आदेश जारी कर अनुसूचित जाति (SC) घटक योजना के तहत आवंटित निधि को मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना के लिए उपयोग करने की मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के तहत वित्त वर्ष 2026-27 में ₹3000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें से मार्च 2026 और अप्रैल 2026 के लिए कुल ₹730.51 करोड़ (प्रत्येक माह ₹365.2550 करोड़) महिला एवं बाल विकास विभाग को वितरित किए जा रहे हैं।
आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि वित्त विभाग के दिनांक 09.04.2026 के परिपत्र के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निधि वितरण की कार्यप्रणाली की रूपरेखा तैयार कर प्रस्तुत कर दी गई है। तदनुसार, वित्त विभाग ने इस हेतु अनुमोदन प्राप्त कर लिया है। इस बजट शीर्ष के अंतर्गत "मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन" योजना (2235-D767) के लिए, महिला लाभार्थियों हेतु मार्च 2026 माह के लिए 365.2550 करोड़ रुपये और अप्रैल 2026 माह के लिए 365.2550 करोड़ रुपये, कुल 730.5100 करोड़ रुपये की राशि, प्रशासनिक विभाग प्रमुख के रूप में सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग को बजटीय निधि वितरण प्रणाली के माध्यम से वितरित किए जाने हेतु सरकार द्वारा अनुमोदित की गई है।
ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस कदम की आलोचना की गई। आलोचकों और विपक्षी नेताओं ने इस कदम को विशेष वर्ग के कल्याण के फंड का दुरुपयोग करार दिया।
ह्यूमन राइट्स एडवोकेट प्रियदर्शी तेलंग ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मंत्रालय से लेकर जिला कलेक्टरेट स्तर तक SC/ST के लिए आरक्षित निधियों का नियमित रूप से राजनीतिक सुविधा के लिए अनुरूप अन्य परियोजनाओं में डायवर्सन किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दलित और आदिवासी बस्तियों को सड़क, ड्रेनेज, पीने का पानी, स्कूल और बुनियादी स्वच्छता जैसी सुविधाओं से जानबूझकर वंचित रखा जा रहा है।
तेलंग ने कहा, “करोड़ों रुपये की SC/ST कल्याण निधि को प्रभावशाली संस्थानों की सड़कें बनाने या अन्य विभागों की खाई पाटने में इस्तेमाल करना मात्र प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि संवैधानिक न्याय पर सुनियोजित हमला है।” उन्होंने लाडकी बहन योजना के लिए SC/ST घटक फंड से ₹730.51 करोड़ के सिफनिंग को “नंगी अवसरवादिता” करार दिया और इसे जाति आधारित वित्तीय हिंसा (caste-based fiscal violence) बताया।
उन्होंने मांग की कि महाराष्ट्र सरकार को डायवर्जन रोकने के लिए एक सख्त कानून लाना चाहिए, जिसमें दोषी अधिकारियों और राजनेताओं के लिए जेल की सजा का प्रावधान हो। तेलंग ने पूछा कि जो दलित वोटों की अपील सामाजिक न्याय के नाम पर करते हैं, खासकर महाराष्ट्र कांग्रेस, क्या वे SC/ST समुदायों के हक की बहाली की मांग करेंगे और फंड डायवर्जन का विरोध करेंगे?
एक्टिविस्ट राजेंद्र पटोड़े ने इसे लूट करार दिया. उन्होंने x पर अपने पोस्ट में लिखा, " अनुसूचित जातियों के लिए 'लड़की बहिन योजना' के तहत आवंटित 730.5100 करोड़ रुपये की राशि आज अन्यत्र मोड़ दी गई! पुनर्वर्गीकरण, बिना नियुक्तियों के ही 'ओपन कैटेगरी' को 'आरक्षित कैटेगरी' के लिए आरक्षित कर देना, मुख्यमंत्री की तीर्थ यात्राएँ, अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग का विभाजन, जनगणना में जाति और धर्म का पंजीकरण, और मतदाता पुन: सत्यापन कार्यक्रम, इन सब के माध्यम से राज्य सरकार ने एक बार फिर अनुसूचित जातियों और जनजातियों की शिक्षा, छात्रवृत्ति, फेलोशिप, 'स्वाधार' योजना, रोज़गार, स्वास्थ्य, जल आपूर्ति, आवास और विकास कार्यों के लिए निर्धारित 730.5100 करोड़ रुपये के आरक्षित कोष को लूट लिया है।"
आपको बता दें फरवरी माह में महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसत ने अपनी ही सरकार की नीति पर असंतोष व्यक्त किया और दोहराया कि उनके विभाग के फंड को 'लाड़की बहिन' जैसी योजनाओं के लिए इस्तेमाल किया गया, जो कि अस्वीकार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि वित्तीय बोझ के कारण सरकार 'लाड़की बहिन' योजना के तहत किए गए वादे के अनुसार 1,500 रुपये की राशि को बढ़ाकर 2,100 रुपये नहीं करेगी।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.
यहां सपोर्ट करें