
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी AMRUT ड्रोन मिशन योजना बड़े विवाद में फंस गई है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को सशक्त बनाने के नाम पर शुरू की गई इस योजना पर जातिवादी भेदभाव का गंभीर आरोप लगा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह योजना केवल ऊपरी जातियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई है, जबकि SC, ST और OBC युवाओं को पूरी तरह बाहर रखा गया है।
मानवाधिकार अधिवक्ता प्रियदर्शी तेलंग ने इस फैसले की तीखी निंदा करते हुए कहा कि योजना का रजिस्ट्रेशन फॉर्म ही भेदभाव को साफ तौर पर उजागर करता है। फॉर्म में आवेदकों को अपनी जाति चुनने के लिए विकल्प दिए गए हैं, जिनमें ब्राह्मण, बनिया (वैश्य), राजपुरोहित, काम्मा, कायस्थ, अयंगर, नायर, नायडू, पटिदार, बंगाली, पटेल, भूमिहार, येलमर, मारवाड़ी, ठाकुर जैसी कथित ऊपरी जातियां शामिल हैं। वहीं SC, ST और OBC समुदायों के लिए कोई विकल्प ही नहीं रखा गया है।
अधिसूचना के मुताबिक, यह कोर्स नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से एप्रूव्ड रिमोट पायलट ट्रेनिंग सिलेबस पर आधारित है। इसमें थ्योरी, सिमुलेटर ट्रेनिंग और प्रैक्टिकल फ्लाइंग शामिल है। छोटे और मध्यम श्रेणी के RPAS (रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम) की पूरी ट्रेनिंग दी जाएगी। 10 दिनों के इस कोर्स के पूरा होने पर उम्मीदवार DGCA की लिखित और प्रैक्टिकल परीक्षा पास करने के बाद रिमोट पायलट इंस्ट्रक्टर, ड्रोन टेक्नीशियन, सर्वे स्पेशलिस्ट, एग्री-स्प्रेइंग ऑपरेटर, सिनेमैटोग्राफी पायलट जैसी आधुनिक नौकरियों के लिए तैयार हो सकेंगे।
योजना की आधिकारिक पात्रता शर्तों में साफ लिखा है कि केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के उम्मीदवार ही आवेदन कर सकते हैं, जिनकी पारिवारिक वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम हो। कानूनी रूप से EWS श्रेणी केवल जनरल या ऊपरी जाति के लिए ही लागू होती है। SC, ST और OBC समुदायों के लिए अलग आरक्षण व्यवस्था होने के कारण उन्हें इस योजना से बाहर रखा गया है।
अन्य जरूरी योग्यताएं इस प्रकार हैं: आयु 18 से 55 वर्ष, SSC पास, आधार कार्ड, फोटो आईडी, पता प्रमाण पत्र, DGCA फॉर्मेट में मेडिकल सर्टिफिकेट, पासपोर्ट साइज फोटो, महाराष्ट्र का मूल निवासी होना और PAN कार्ड।
प्रियदर्शी तेलंग ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा, " महाराष्ट्र ने एक भविष्योन्मुखी DGCAIndia द्वारा अनुमोदित और सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित ड्रोन प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया है, जो आर्थिक रूप से कमज़ोर सवर्ण जातियों को अवसर प्रदान करता है जबकि उन समुदायों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है, जिन्हें सदियों से शिक्षा और आजीविका से व्यवस्थित रूप से वंचित रखा गया है। हम अधिकांश युवाओं को बाहर रखने के इस फ़ैसले की कड़ी निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि फडणवीस सरकार तुरंत SC, ST और OBC युवाओं को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दें।"
उन्होंने कहा, “सरकार उभरती हुई टेक्नोलॉजी और भविष्य की आजीविका के अवसरों की बात करती है, लेकिन इस योजना को इस तरह तैयार किया गया है कि सदियों से शिक्षा और आर्थिक अवसरों से वंचित रहे SC, ST और OBC युवा इसमें शामिल ही नहीं हो सकें। यह सार्वजनिक धन से चलाई जा रही योजना है, जिसका फायदा केवल चुनिंदा ऊपरी जातियों तक सीमित रखा गया है।”
यह विवाद महाराष्ट्र सरकार की सामाजिक न्याय नीतियों पर सवाल उठा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रोन जैसी उभरती हुई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र को केवल कुछ खास जातियों तक सीमित रखना न सिर्फ असमानता को बढ़ावा देगा, बल्कि राज्य के बहुसंख्यक युवाओं को भविष्य की अर्थव्यवस्था से दूर रखेगा।
अभी तक महाराष्ट्र सरकार की ओर से इन गंभीर आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
अमृत ड्रोन मिशन (Amrut Drone Mission) महाराष्ट्र सरकार (महाराष्ट्र संशोधन, उन्नती व प्रबोधिनी - AMRUT) द्वारा शुरू की गई एक प्रमुख पहल है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं को मुफ्त ड्रोन पायलट प्रशिक्षण प्रदान करके रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को कृषि, सर्वेक्षण (Surveying), आपदा प्रबंधन और सुरक्षा निरीक्षण जैसे उभरते क्षेत्रों में रोजगार के लिए तैयार करना है। यह 10 दिन का कोर्स है, जो नागरिक उड्डयन महानिदेशालय द्वारा मान्यता प्राप्त है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सरकारी प्रमाणपत्र, साथ ही नौकरी और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं।
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