जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में ऋतु बराला मामले पर कांग्रेस का जोरदार हंगामा: टीकाराम जूली ने बताया ‘अघोषित जेल’

बुधवार को पुलिस कमिश्नरेट के बाहर कांग्रेसियों का जमावड़ा, ऋतु बराला की FIR दर्ज करने को लेकर दबाव
जयपुर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का पुलिस कमिश्नरेट पर धरना दिल्ली पुलिस द्वारा एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव ऋतु बराला के साथ कथित मारपीट के मामले में 'जीरो एफआईआर' दर्ज करने की मांग को लेकर दो दिनों से जारी है।
जयपुर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का पुलिस कमिश्नरेट पर धरना दिल्ली पुलिस द्वारा एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव ऋतु बराला के साथ कथित मारपीट के मामले में 'जीरो एफआईआर' दर्ज करने की मांग को लेकर दो दिनों से जारी है।
Published on: 

जयपुर- एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव ऋतु बराला से दिल्ली में कथित मारपीट के मामले में जीरो एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर कांग्रेस का जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पर धरना बुधवार को भी जारी रहा। राहुल गांधी के निर्देश के बाद, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और अन्य नेताओं के नेतृत्व में कांग्रेस ने कमिश्नरेट पर धरना शुरू किया था। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आज सुबह कमिश्नरेट परिसर से ही मीडिया से बात करते हुए इसे ‘अघोषित जेल’ बताया। उन्होंने कहा कि दोनों मुख्य द्वारों पर ताले जड़ दिए गए हैं, वॉशरूम बंद कर दिए गए हैं। न मीडिया को अंदर आने दिया जा रहा है और न ही कांग्रेस के पदाधिकारियों को। जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार तानाशाही, सत्ता के अहंकार और गुंडागर्दी पर उतारू है।

आज सुबह कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा गिरने से चोटिल हो गए। जूली ने कहा कि संवेदनहीनता की सारी हदें पार हो गईं, जब एक भी अधिकारी उनका हालचाल पूछने तक नहीं आया। उलटे अधिकारी आते हैं और देखकर चले जाते हैं। जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सवाल किया, “आखिर आप किस बात से इतना घबरा रहे हैं? हम न पीछे हटेंगे, न झुकेंगे, न्याय लेकर रहेंगे।”

13 अक्टूबर को दिल्ली के राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के पास मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एनएसयूआई के प्रदर्शन के दौरान झुंझुनू की ऋतु बराला को हिरासत में लिया गया था। उनका आरोप है कि डिटेंशन बस में दिल्ली पुलिस की महिला कांस्टेबल चंचल यादव और कुछ अन्य ने उनकी गर्दन पकड़ी, बाल खींचे, चेहरे पर नाखूनों से खरोंचा, थप्पड़ मारे और थाने में पैरों पर डंडे से मारा। ऋतु ने जयपुर के मोती डूंगरी थाने में शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया। पुलिस का कहना है कि दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में पहले से एफआईआर नंबर 291/2026 दर्ज है और रितु की शिकायत उसी में शामिल कर जांच चल रही है। कांग्रेस का तर्क है कि जीरो एफआईआर कानूनी अधिकार है और दिल्ली वाली एफआईआर अलग प्रकृति की है।

13 अक्टूबर को दिल्ली प्रदर्शन के दौरान आरोप है कि ऋतु को डिटेंशन बस में दिल्ली पुलिस की महिला कांस्टेबल चंचल यादव और कुछ अन्य ने उनकी गर्दन पकड़ी, बाल खींचे, चेहरे पर नाखूनों से खरोंचा, थप्पड़ मारे और थाने में पैरों पर डंडे से मारा।
13 अक्टूबर को दिल्ली प्रदर्शन के दौरान आरोप है कि ऋतु को डिटेंशन बस में दिल्ली पुलिस की महिला कांस्टेबल चंचल यादव और कुछ अन्य ने उनकी गर्दन पकड़ी, बाल खींचे, चेहरे पर नाखूनों से खरोंचा, थप्पड़ मारे और थाने में पैरों पर डंडे से मारा।

19 अक्टूबर शाम राहुल गांधी के फोन के बाद डोटासरा, रितु बराला और अन्य नेता मोती डूंगरी थाने गए। शिकायत स्वीकार होने के बावजूद एफआईआर न दर्ज होने पर वे कमिश्नरेट पहुंच गए। वहां रातभर धरना दिया। मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, महिला विधायक और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। पुलिस ने गेट बंद किए, बैरिकेडिंग की और दो बार हल्का बल प्रयोग किया। रात में भी लाठीचार्ज के आरोप लगे। डोटासरा, जूली, प्रताप सिंह खाचरियावास समेत कई नेताओं ने रात कमिश्नरेट में बिताई।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि महिलाओं के मामलों में जीरो एफआईआर अनिवार्य है (बीएनएसएस धारा 173(1) का हवाला देते हुए)। पुलिस को राजनीतिक मोहरा बनाने से रोकने और मुख्यमंत्री से राजधर्म निभाने की मांग की। गहलोत ने पूछा कि क्या देश में दो कानून चल रहे हैं, एक सत्ता पक्ष के लिए और एक विपक्ष के लिए?

मीडिया से मुखातिब हुए गहलोत ने आगे कहा कि " मेरे वक्त में मैंने एक बहुत बड़ा फैसला किया था कंपल्सरी FIR, का , इतना बड़ा फायदा होगा जो गरीब है, दलित है, पिछड़े हैं, उनको थाने में जा के FIR दर्ज करवाने की कोई तकलीफ नहीं आई थी। और थानेदार नहीं करेगा तो एसपी करता , एसपी ऑफिस करता। इतना बड़ा हमने निर्णय किया, इनको पूछो कि तुमने वो हटाया क्यों? हटाने से अब क्या हुआ है? हटाने के बाद में ऐसी स्थिति बन गई है, धक्के खा रहे हैं वहां पर! जिसका रेप हुआ है, उसको कह रहे हैं तुम समझौता कर लो, जिससे रेप किया उससे। तो यह जो स्थिति बनी है, उसी कारण से तमाम तरह से यह गड़बड़ हो रही है। अगर कंपल्सरी FIR की होती, यह नौबत ही नहीं आती, ना धरना देते, FIR दर्ज हो जाती। तफ्तीश तो पुलिस को करनी होती है ना, FIR दर्ज करने में क्या तकलीफ है? कोई किसी को प्रॉब्लम है, अब कर लीजिए, अगर आपको लगे भई इस FIR में कोई दम नहीं, तफ्तीश आप कर रहे हो, FR लगानी है या चार्जशीट बन सकती है, चार्जशीट पेश करनी है ये बाद की बातें हैं। तो क्यों आपने प्रेस्टीज पॉइंट बनाया और यह स्थिति बनी कि हमें धरना देना पड़ा कांग्रेस वालों को? वो भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं, उनको खुद को धरने बैठना पड़ा, इससे बड़ा दुर्भाग्य की बात क्या होगी? सरकार के दिलों-दिमाग के अंदर विपक्ष के प्रति कोई सम्मान नहीं है! केंद्र में यही हो रहा है, मोदी जी के राज में। अगर सम्मान होता तो राहुल गांधी, खड़गे को सम्मान मिलता पार्लियामेंट के अंदर भी और बाहर भी। आप देख रहे हो क्या स्थिति है।"

कांग्रेस का आरोप है कि पुलिस कमिश्नर और डीजीपी दबाव में हैं। डोटासरा ने कहा कि दिल्ली की एफआईआर दिखा दी जाए तो वे हाथ जोड़कर चले जाएंगे, लेकिन अभी तक कॉपी नहीं दी गई। रितु बराला ने कहा कि जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाएंगी।

धरना अनिश्चितकालीन है। कांग्रेस का नारा है, “राजस्थान की बेटी को न्याय दो।” पुलिस पक्ष कहता है कि एक ही घटना पर दो एफआईआर कानूनी रूप से संभव नहीं। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी है।

जयपुर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का पुलिस कमिश्नरेट पर धरना दिल्ली पुलिस द्वारा एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव ऋतु बराला के साथ कथित मारपीट के मामले में 'जीरो एफआईआर' दर्ज करने की मांग को लेकर दो दिनों से जारी है।
"ज़मानत सही, फिर भी जेल": सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची सीजेपी, अर्जेंट सुनवाई मांगी
जयपुर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का पुलिस कमिश्नरेट पर धरना दिल्ली पुलिस द्वारा एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव ऋतु बराला के साथ कथित मारपीट के मामले में 'जीरो एफआईआर' दर्ज करने की मांग को लेकर दो दिनों से जारी है।
राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग: चित्तौड़गढ़ में प्रथम वर्ष की छात्राओं के उत्पीड़न की शिकायत, बढ़ते मामलों में राज्य की चुप्पी पर सवाल
जयपुर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का पुलिस कमिश्नरेट पर धरना दिल्ली पुलिस द्वारा एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव ऋतु बराला के साथ कथित मारपीट के मामले में 'जीरो एफआईआर' दर्ज करने की मांग को लेकर दो दिनों से जारी है।
आदिवासी दंपती और हिंदू विवाह अधिनियम: क्या मिलेगा तलाक? राजस्थान हाईकोर्ट बोला, "हां, अगर..."
जयपुर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का पुलिस कमिश्नरेट पर धरना दिल्ली पुलिस द्वारा एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव ऋतु बराला के साथ कथित मारपीट के मामले में 'जीरो एफआईआर' दर्ज करने की मांग को लेकर दो दिनों से जारी है।
राजस्थान निकाय चुनाव: 'सरकारी मशीनरी की धांधली से जबरन हराए गए बसपा उम्मीदवार', नतीजों पर भड़कीं मायावती

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक को सब्सक्राइब करें

'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।

यहां सब्सक्राइब करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com